{"_id":"6aac3572d5fc155e880eaab4","slug":"auraiya-news-auraiya-news-c-211-1-akb1003-151734-2026-09-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Auraiya News: बर्न यूनिट का संचालन नहीं, निकल रहा हर माह 1.62 लाख रुपये वेतन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Auraiya News: बर्न यूनिट का संचालन नहीं, निकल रहा हर माह 1.62 लाख रुपये वेतन
Fri, 18 Sep 2026 12:16 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Fri, 18 Sep 2026 12:16 AM IST
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज परिसर में बनी प्लास्टिक सर्जरी एंड बर्न यूनिट। संवाद
औरैया। चिलौली परिसर में स्थित प्लास्टिक सर्जरी एंड बर्न यूनिट का संचालन ठप है। इसके बावजूद नौ कर्मचारियों को यूनिट के नाम पर वेतन लगातार निकल रहा है। इस ओर आजतक किसी का ध्यान भी नहीं गया है। शासन की ओर से बर्न यूनिट की एक करोड़ रुपये से बिल्डिंग बनाई है। इसमें सुविधाएं भी हैं, लेकिन डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टॉफ के न होने की वजह से इसका संचालन नहीं हो पा रहा है।
इस यूनिट में खास बात यह है कि वर्ष 2025 में आउटसोर्सिंग के माध्यम से छह कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है। इसमें तीन ड्रेसर व छह एमटीवी के पद पर कार्यरत हैं, लेकिन इन कर्मचारियों से मेडिकल कॉलेज के अन्य कामों में लगाया गया है। बाकायदा रोस्टर बनाकर काम कराया जा रहा है। कोई वार्ड बॉय का काम रहा तो कोई सफाई की व्यवस्था को संभाल रहा है।
जबकि नियमानुसार जिस काम के लिए कर्मचारी रखा जाता, उससे वही काम लेकर वेतन निकाला जाता, मेडिकल कॉलेज में यह व्यवस्था लागू नहीं है। अधिकारियों का दावा है कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को सर्जरी विभाग में लगाया गया है। इसमें उसने बर्न के मरीजों को मैनेज कराए जा रहे हैं। यह भी जानकारी दी कि हर दिन एक से दो मरीज बर्न के आ रहे हैं। वहीं, इन कर्मचारियों के नाम पर हर माह 1.62 लाख रुपये निकाले जा रहे।
विज्ञापन
-- -- -- -
यूनिट में लगे छह एसी हो गए बेकार
बर्न यूनिट में छह एसी लगाए गए हैं। मौजूदा समय में यह एसी कंडम हो गई, साथ ही यूनिट के बाहर बड़ी-बड़ी घास खड़ी हुई हैं। सीढ़ियों के पत्थर बाहर निकलने लगे व शीशे भी टूट गए हैं।
-- -- -
एक-दूसरे को जिम्मेदार बताते अधिकारी
बर्न यूनिट के संचालन को लेकर अधिकारियों में ही स्थिति स्पष्ट नहीं है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य सीएमओ को जिम्मेदार बताते तो सीएमओ प्राचार्य को जिम्मेदार बताते हैं। पिछले प्राचार्य की ओर से संचालक के संबंध में सीएमओ को पत्राचार भी किया गया है।
-- -- -- -
इन स्टॉफ की है जरूरत
प्लास्टिक सर्जन-01
जनरल सर्जन- 02
ईएमओ- 03
नर्स- 06
फिजियोथेरेपिस्ट- 01
-- -- -- -- --
प्लास्टिक सर्जरी एंड बर्न यूनिट के नाम पर लगे आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से सर्जन सर्जरी में बर्न के मरीजों को मैनेज कराया जा रहा है। हर दिन एक-दो बर्न के मरीज आते भी हैं। इसके चलते उनका वेतन जारी हो रहा है।
-डॉ.मुकेशवीर सिंह, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
विज्ञापन
इस यूनिट में खास बात यह है कि वर्ष 2025 में आउटसोर्सिंग के माध्यम से छह कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है। इसमें तीन ड्रेसर व छह एमटीवी के पद पर कार्यरत हैं, लेकिन इन कर्मचारियों से मेडिकल कॉलेज के अन्य कामों में लगाया गया है। बाकायदा रोस्टर बनाकर काम कराया जा रहा है। कोई वार्ड बॉय का काम रहा तो कोई सफाई की व्यवस्था को संभाल रहा है।
विज्ञापन
जबकि नियमानुसार जिस काम के लिए कर्मचारी रखा जाता, उससे वही काम लेकर वेतन निकाला जाता, मेडिकल कॉलेज में यह व्यवस्था लागू नहीं है। अधिकारियों का दावा है कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को सर्जरी विभाग में लगाया गया है। इसमें उसने बर्न के मरीजों को मैनेज कराए जा रहे हैं। यह भी जानकारी दी कि हर दिन एक से दो मरीज बर्न के आ रहे हैं। वहीं, इन कर्मचारियों के नाम पर हर माह 1.62 लाख रुपये निकाले जा रहे।
विज्ञापन
यूनिट में लगे छह एसी हो गए बेकार
बर्न यूनिट में छह एसी लगाए गए हैं। मौजूदा समय में यह एसी कंडम हो गई, साथ ही यूनिट के बाहर बड़ी-बड़ी घास खड़ी हुई हैं। सीढ़ियों के पत्थर बाहर निकलने लगे व शीशे भी टूट गए हैं।
एक-दूसरे को जिम्मेदार बताते अधिकारी
बर्न यूनिट के संचालन को लेकर अधिकारियों में ही स्थिति स्पष्ट नहीं है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य सीएमओ को जिम्मेदार बताते तो सीएमओ प्राचार्य को जिम्मेदार बताते हैं। पिछले प्राचार्य की ओर से संचालक के संबंध में सीएमओ को पत्राचार भी किया गया है।
इन स्टॉफ की है जरूरत
प्लास्टिक सर्जन-01
जनरल सर्जन- 02
ईएमओ- 03
नर्स- 06
फिजियोथेरेपिस्ट- 01
प्लास्टिक सर्जरी एंड बर्न यूनिट के नाम पर लगे आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से सर्जन सर्जरी में बर्न के मरीजों को मैनेज कराया जा रहा है। हर दिन एक-दो बर्न के मरीज आते भी हैं। इसके चलते उनका वेतन जारी हो रहा है।
-डॉ.मुकेशवीर सिंह, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज