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फसल अवशेष जलाया तो सीधे होगी कार्रवाई - एसडीएम
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औरैया। शासन के निर्देशों के अनुपालन में यदि किसी ने भी फसल अवशेष जलाया तो उसके विरुद्ध विधिक कार्रवाई तय है, जेल जाने के साथ जुर्माना तक की कार्रवाई की जाएगी। यह बात उपजिलाधिकारी रमापति ने शनिवार को अजीतमल में ब्लॉक स्तरीय कृषि विभाग की आत्मा योजना के तहत खरीफ गोष्ठी में कही।
उपजिलाधिकारी ने कहा कि डीएम अभिषेक सिंह ने पराली की रोकथाम के लिए त्रिस्तरीय व्यवस्था की है। ग्राम स्तर पर सभी लेखपाल अपने क्षेत्राधिकार में नोडल अधिकारी नामित किए गए हैं जो यह सुनिश्चित करेंगे कि फसल अवशेष जलाने की एक भी घटना न हो ।
इसी प्रकार तहसील स्तर पर उप जिलाधिकारी, पुलिस क्षेत्राधिकारी एवं कृषि विभाग के अधिकारियों का मोबाइल दस्ता बनाया गया है जो इस प्रकार की घटना की सूचना प्राप्त होते ही मौके पर पहुंचकर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
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जनपद स्तर पर एडीएम वित्त एवं राजस्व रेखा एस चौहान की अध्यक्षता में एक सेल गठित किया गया है जो प्रतिदिन जनपद के कोने-कोने में इस घटना को घटित न होने देने के लिए प्रत्येक प्रकार की कार्रवाई का प्रतिदिन अनुश्रवण करेंगी।
उपकृषि निदेशक ने कहा कि फसल अवशेष जलाने से उठने वाला धुआं न केवल मानव समाज के लिए बल्कि गर्भवती माताओं के गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी बेहद हानिकारक हो सकता है।
इससे जहां एक तरफ मिट्टी में मौजूद मित्र सूक्ष्म जीव और पोषक तत्व नष्ट होते हैं वहीं दूसरी तरफ पर्यावरण भी प्रदूषित होता है अत: इस बात की आवश्यकता है कि पराली का उचित प्रबंधन किया जाए।
कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. अनंत कुमार डॉ. बृज विकास सिंह ने फसल अवशेष प्रबंधन के तरीकों के बारे में विस्तार से चर्चा की। गोष्ठी में कृषक उत्पादन संगठन, सोलर पंप योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, कृषि यंत्रीकरण योजना, किसान क्रेडिट कार्ड ,जैविक खेती एवं उर्वरक व्यवस्था तथा खरीफ एवं रबी फसलों की तकनीकी पर विस्तार से चर्चा की गई।
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उपजिलाधिकारी ने कहा कि डीएम अभिषेक सिंह ने पराली की रोकथाम के लिए त्रिस्तरीय व्यवस्था की है। ग्राम स्तर पर सभी लेखपाल अपने क्षेत्राधिकार में नोडल अधिकारी नामित किए गए हैं जो यह सुनिश्चित करेंगे कि फसल अवशेष जलाने की एक भी घटना न हो ।
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इसी प्रकार तहसील स्तर पर उप जिलाधिकारी, पुलिस क्षेत्राधिकारी एवं कृषि विभाग के अधिकारियों का मोबाइल दस्ता बनाया गया है जो इस प्रकार की घटना की सूचना प्राप्त होते ही मौके पर पहुंचकर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
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जनपद स्तर पर एडीएम वित्त एवं राजस्व रेखा एस चौहान की अध्यक्षता में एक सेल गठित किया गया है जो प्रतिदिन जनपद के कोने-कोने में इस घटना को घटित न होने देने के लिए प्रत्येक प्रकार की कार्रवाई का प्रतिदिन अनुश्रवण करेंगी।
उपकृषि निदेशक ने कहा कि फसल अवशेष जलाने से उठने वाला धुआं न केवल मानव समाज के लिए बल्कि गर्भवती माताओं के गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी बेहद हानिकारक हो सकता है।
इससे जहां एक तरफ मिट्टी में मौजूद मित्र सूक्ष्म जीव और पोषक तत्व नष्ट होते हैं वहीं दूसरी तरफ पर्यावरण भी प्रदूषित होता है अत: इस बात की आवश्यकता है कि पराली का उचित प्रबंधन किया जाए।
कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. अनंत कुमार डॉ. बृज विकास सिंह ने फसल अवशेष प्रबंधन के तरीकों के बारे में विस्तार से चर्चा की। गोष्ठी में कृषक उत्पादन संगठन, सोलर पंप योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, कृषि यंत्रीकरण योजना, किसान क्रेडिट कार्ड ,जैविक खेती एवं उर्वरक व्यवस्था तथा खरीफ एवं रबी फसलों की तकनीकी पर विस्तार से चर्चा की गई।