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‘मन की मुराद पूरी करते हैं भगवान शिव’
ब्यूरो/ अमर उजाला, औरैया।
Updated Tue, 11 Aug 2015 12:02 AM IST
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भीखेपुर मार्ग स्थित बिरुहनी गांव में बना प्राचीन शिव मंदिर भक्तों की
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आस्था का केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर करीब ढाई सौ साल पुराना है। यहां
भगवान शिव और पार्वती की मूर्ति स्थापित है। यहां मान्यता है कि जो जिस
युगल ने मंदिर में आकर मनौती मांगी उसे भगवान शिव ने अवश्य पूरी की है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां आकर सच्ची शांति मिलती है। पड़ोसी गांव ककरैया, सुर्जनपुर सौहरी गढ़िया पुर्वा, हरसहाय आदि ग्राम के लोग रोज सुबह मंदिर में माथा टेकना नहीं भूलते हैं।
इस मंदिर में मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धालु भंडारा कराते है। गांव के वृद्ध गोपीनाथ, शिवानंद का कहना है कि जब से उन्होंने होश संभाला है तब से यहां पर लोगों की भीड़ देख रहे हैं। सावन में श्रद्धालुओं की ज्यादा भीड़ हो जाती है।
सावन के सोमवार पर इटावा, कन्नौज, कानपुर देहात, जालौन समेत अन्य जिलों से लोग मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। सावन में लोग जलाभिषेक और रुद्राभिषेक कराकर भंडारा का आयोजन करते हैं। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालु दूध से स्नान कराकर उसका प्रसाद ग्रहण करते हैं।
कहते है कि यह मंदिर पांडेय के वंशजों का रहा है। गांव के आलोक कुमार पांडेय कहते है कि उनके पूर्वजों को सपना आया था कि भगवान शिव बाग में विराजमान है। इसके बाद उनके पूर्वजों ने बाग की खुदाई कर दी। जिसमें भगवान की मूर्ति मिली थी।
वहीं पार्वती माता के कुएं में होने का सपना आया था। कुएं की सफाई के दौरान माता पार्वती की मूर्ति मिली थी। भगवान शिव व माता पार्वती की मूर्ति को विधि विधान से उनके पूर्वजों ने एक मंदिर बनाकर स्थापित कराया था।
गांव के वयोवृद्ध गोपीनाथ पांडेय कहते हैं कि जीर्णशीर्ण हो रहे इस मंदिर का उन्होंने1990 में जीर्णोद्धार कराया था। इसके बाद से श्रद्धालु मंदिर के लिए कुछ न कुछ सहयोग करते रहे हैं।
मंदिर में भगवान शंकर संग विराजमान पार्वती की मूर्ति श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचती हैं। कहा जाता है कि मंदिर में प्रवेश करते लोगों के दुख-दर्द दूर होने लगते है। सावन में यहां पर नमन करने वाला कभी खाली हाथ नहीं जाता है। वह पिछले कई दशकों से मंदिर में सेवा भाव से लगे है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां आकर सच्ची शांति मिलती है। पड़ोसी गांव ककरैया, सुर्जनपुर सौहरी गढ़िया पुर्वा, हरसहाय आदि ग्राम के लोग रोज सुबह मंदिर में माथा टेकना नहीं भूलते हैं।
इस मंदिर में मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धालु भंडारा कराते है। गांव के वृद्ध गोपीनाथ, शिवानंद का कहना है कि जब से उन्होंने होश संभाला है तब से यहां पर लोगों की भीड़ देख रहे हैं। सावन में श्रद्धालुओं की ज्यादा भीड़ हो जाती है।
सावन के सोमवार पर इटावा, कन्नौज, कानपुर देहात, जालौन समेत अन्य जिलों से लोग मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। सावन में लोग जलाभिषेक और रुद्राभिषेक कराकर भंडारा का आयोजन करते हैं। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालु दूध से स्नान कराकर उसका प्रसाद ग्रहण करते हैं।
कहते है कि यह मंदिर पांडेय के वंशजों का रहा है। गांव के आलोक कुमार पांडेय कहते है कि उनके पूर्वजों को सपना आया था कि भगवान शिव बाग में विराजमान है। इसके बाद उनके पूर्वजों ने बाग की खुदाई कर दी। जिसमें भगवान की मूर्ति मिली थी।
वहीं पार्वती माता के कुएं में होने का सपना आया था। कुएं की सफाई के दौरान माता पार्वती की मूर्ति मिली थी। भगवान शिव व माता पार्वती की मूर्ति को विधि विधान से उनके पूर्वजों ने एक मंदिर बनाकर स्थापित कराया था।
गांव के वयोवृद्ध गोपीनाथ पांडेय कहते हैं कि जीर्णशीर्ण हो रहे इस मंदिर का उन्होंने1990 में जीर्णोद्धार कराया था। इसके बाद से श्रद्धालु मंदिर के लिए कुछ न कुछ सहयोग करते रहे हैं।
मंदिर में भगवान शंकर संग विराजमान पार्वती की मूर्ति श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचती हैं। कहा जाता है कि मंदिर में प्रवेश करते लोगों के दुख-दर्द दूर होने लगते है। सावन में यहां पर नमन करने वाला कभी खाली हाथ नहीं जाता है। वह पिछले कई दशकों से मंदिर में सेवा भाव से लगे है।