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Auraiya News: तीन माह पहले खरीदे पुराने ट्रैक्टर ने निगल लीं भाई-बहनों की जिंदगी
Sun, 20 Apr 2025 12:14 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sun, 20 Apr 2025 12:14 AM IST
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बिधूना। चटक धूप में छांव की आस साक्षी, कजरी व उसके भाई रौनक को मौत के पास खींच लाई। हादसे के बाद घटना स्थल से 100 मीटर दूर लगे मेले व गांव में सन्नाटा पसर गया।
लोग मृतकों के घर की ओर दौड़ पड़े। वहीं गांव के कुछ लोग कहते मिले कि तीन माह पहले खरीदे गए ट्रैक्टर ने तीन लोगों की जिंदगी छीन ली। बिधूना के मढ़ामाछी झील निवासी अजयपाल के बेटे रौनक, बेटी साक्षी व कजरी की मौत से परिजन बदहवास हो गए। अस्पताल में बिलख रही रौनक की मां उमा देवी ने बताया कि वह संयुक्त परिवार में रहतीं हैं।
उनके जेठ छिद्दन सिंह की 25 साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। तब उनका बेटा दीपक महज दो साल का था। पति अजयपाल ने दीपक को पाल-पोस कर बड़ा किया था।
उनके देवर श्यामजी की शादी नहीं हुई थी। दो साल पहले उसका भी देहांत हो गया था। परिवार के पास कुल 16 बीघा जमीन थी। जिसपर वह लोग संयुक्त रूप से अनाज उगाकर परिवार का भरण पोषण करते थे। इसके अलावा आय के अन्य स्रोत नहीं हैं। खेती करने में परेशानी होने पर तीन माह पहले भतीजे ने पुराना ट्रैक्टर खरीदा था।
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शनिवार को ट्रैक्टर से हुए हादसे में तीनों बच्चों की मौत होने से उसकी खुशियां एक झटके में छिन गईं। अब वह जीवित नहीं रहना चाहती है। वहीं छोटे भाई व बहनों की मौत से बड़ी बहन छाया भी रो-रोकर बेहाल है। घटना के बाद से ग्रामीण परिजनों को ढांढस बंधाने में लगे हैं।
परिवार का इकलौता चिराग बचा दीपक
रौनक, बेटी साक्षी व कजरी की मौत से बिलख रहीं मां उमा ने बताया कि तीन बेटियों के बाद उसने एक बेटे को जन्म दिया था। जिसकी जन्म के कुछ देर बाद ही मौत हो गई थी। घर में दीपक के अलावा कोई दूसरा बेटा न होने पर परिजनों व उसने कई मंदिरों में माथा टेका। बड़ी मुरादों के बाद रौनक पैदा हुआ था।
हादसे में तीनों बच्चों की मौत के बाद से अब फिर से दीपक ही परिवार का इकलौता चिराग बचा है। दीपक की शादी सात साल पहले शिल्पी के साथ हुई थी। उसको भी अभी तक कोई संतान नहीं हुई है।
परिजनों का कहना है कि वह सिर्फ शवों का पोस्टमार्टम करवाना चाहते हैं। उन्हें मामले में कोई भी कार्रवाई नहीं करवानी है। भतीजा दीपक अपने चाचा अजयपाल की देखरेख के लिए सैफई गया है।
शादी के 28 दिन पहले पसर गया मातम
परिजनों ने बताया कि अजयपाल के चाचा के बेटे मोहन की शादी 17 मई को होनी है। इसको लेकर परिजनों ने तैयारी शुरू कर दी थी। अजयपाल व बच्चे शादी को लेकर बहुत उत्सुक थे। कपड़े व अन्य सामान भी खरीद चुके थे। शादी के 28 दिन पहले हुए हादसे से घर में शहनाइयां बजने से पहले ही मातम पसर गया।
पढ़ाई के साथ खेती के काम में पिता की मदद करतीं थी बेटियां
किसान अजयपाल खेती किसानी कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। उसकी बड़ी बेटी छाया घर में रहकर मां उमा के साथ काम में हाथ बंटाती है। जबकि छोटी बेटियां साक्षी कक्षा 11 व कजरी कक्षा नौ में पढ़ती थीं। दोनों स्कूल में पढ़ाई करने के बाद घर लौटकर पिता के साथ खेती-बाड़ी के काम में हाथ बंटातीं थीं। रौनक भी कक्षा एक का छात्र था।
डीएम-एसपी ने परिजन को बंधाया ढांढस
हादसे में तीन बच्चों की मौत होने की जानकारी पर बिधूना तहसील में लोगों की फरियाद सुन रहे डीएम डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, एसपी अभिजित आर शंकर सीएचसी पहुंच गए। उन्होंने मृतक बच्चों की मां से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। डीएम-एसपी ने कहा कि दुख की इस घड़ी में जिला प्रशासन पीड़ित परिवार के साथ है। परिवार को हर संभव मदद दिलाने का भी भरोसा दिया।
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लोग मृतकों के घर की ओर दौड़ पड़े। वहीं गांव के कुछ लोग कहते मिले कि तीन माह पहले खरीदे गए ट्रैक्टर ने तीन लोगों की जिंदगी छीन ली। बिधूना के मढ़ामाछी झील निवासी अजयपाल के बेटे रौनक, बेटी साक्षी व कजरी की मौत से परिजन बदहवास हो गए। अस्पताल में बिलख रही रौनक की मां उमा देवी ने बताया कि वह संयुक्त परिवार में रहतीं हैं।
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उनके जेठ छिद्दन सिंह की 25 साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। तब उनका बेटा दीपक महज दो साल का था। पति अजयपाल ने दीपक को पाल-पोस कर बड़ा किया था।
उनके देवर श्यामजी की शादी नहीं हुई थी। दो साल पहले उसका भी देहांत हो गया था। परिवार के पास कुल 16 बीघा जमीन थी। जिसपर वह लोग संयुक्त रूप से अनाज उगाकर परिवार का भरण पोषण करते थे। इसके अलावा आय के अन्य स्रोत नहीं हैं। खेती करने में परेशानी होने पर तीन माह पहले भतीजे ने पुराना ट्रैक्टर खरीदा था।
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शनिवार को ट्रैक्टर से हुए हादसे में तीनों बच्चों की मौत होने से उसकी खुशियां एक झटके में छिन गईं। अब वह जीवित नहीं रहना चाहती है। वहीं छोटे भाई व बहनों की मौत से बड़ी बहन छाया भी रो-रोकर बेहाल है। घटना के बाद से ग्रामीण परिजनों को ढांढस बंधाने में लगे हैं।
परिवार का इकलौता चिराग बचा दीपक
रौनक, बेटी साक्षी व कजरी की मौत से बिलख रहीं मां उमा ने बताया कि तीन बेटियों के बाद उसने एक बेटे को जन्म दिया था। जिसकी जन्म के कुछ देर बाद ही मौत हो गई थी। घर में दीपक के अलावा कोई दूसरा बेटा न होने पर परिजनों व उसने कई मंदिरों में माथा टेका। बड़ी मुरादों के बाद रौनक पैदा हुआ था।
हादसे में तीनों बच्चों की मौत के बाद से अब फिर से दीपक ही परिवार का इकलौता चिराग बचा है। दीपक की शादी सात साल पहले शिल्पी के साथ हुई थी। उसको भी अभी तक कोई संतान नहीं हुई है।
परिजनों का कहना है कि वह सिर्फ शवों का पोस्टमार्टम करवाना चाहते हैं। उन्हें मामले में कोई भी कार्रवाई नहीं करवानी है। भतीजा दीपक अपने चाचा अजयपाल की देखरेख के लिए सैफई गया है।
शादी के 28 दिन पहले पसर गया मातम
परिजनों ने बताया कि अजयपाल के चाचा के बेटे मोहन की शादी 17 मई को होनी है। इसको लेकर परिजनों ने तैयारी शुरू कर दी थी। अजयपाल व बच्चे शादी को लेकर बहुत उत्सुक थे। कपड़े व अन्य सामान भी खरीद चुके थे। शादी के 28 दिन पहले हुए हादसे से घर में शहनाइयां बजने से पहले ही मातम पसर गया।
पढ़ाई के साथ खेती के काम में पिता की मदद करतीं थी बेटियां
किसान अजयपाल खेती किसानी कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। उसकी बड़ी बेटी छाया घर में रहकर मां उमा के साथ काम में हाथ बंटाती है। जबकि छोटी बेटियां साक्षी कक्षा 11 व कजरी कक्षा नौ में पढ़ती थीं। दोनों स्कूल में पढ़ाई करने के बाद घर लौटकर पिता के साथ खेती-बाड़ी के काम में हाथ बंटातीं थीं। रौनक भी कक्षा एक का छात्र था।
डीएम-एसपी ने परिजन को बंधाया ढांढस
हादसे में तीन बच्चों की मौत होने की जानकारी पर बिधूना तहसील में लोगों की फरियाद सुन रहे डीएम डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, एसपी अभिजित आर शंकर सीएचसी पहुंच गए। उन्होंने मृतक बच्चों की मां से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। डीएम-एसपी ने कहा कि दुख की इस घड़ी में जिला प्रशासन पीड़ित परिवार के साथ है। परिवार को हर संभव मदद दिलाने का भी भरोसा दिया।