फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Auraiya News ›   agricalture,auraiya news

आधुनिक तकीनीकी से तैयार कर रहे पीली और लाल शिमला मिर्च(संशोधित खबर)

Sat, 12 Feb 2022 12:13 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 12 Feb 2022 12:13 AM IST
विज्ञापन
agricalture,auraiya news
खेत में लगी लाल व हरी शिमला मिर्च। संवाद - फोटो : AURAIYA
बिधूना। क्षेत्र के गांव रामपुर वामपुर के उन्नतशील किसान मोनू शाक्य लाल, पीली और हरी शिमला मिर्च की फसल से दो माह में दो लाख रुपये कमा चुके हैं। मोनू की यह तरक्की बताती है कि किसान कैसे आधुनिक तकनीकी की मदद से अपनी आमदनी को बढ़ा सकता है। मोनू की शिमला मिर्च इस समय दिल्ली तक जा रही है।
विज्ञापन

उन्नतशील किसानों में गिने जाने वाले मोनू शाक्य ने बताया कि कोरोना काल में फसल के अच्छे दाम नहीं मिले। काफी नुकसान भी उठाना पड़ा। तभी उन्होंने शिमला मिर्च खेती करने के तरीके सीखे। कृषि वैज्ञानिकों से जानकारी ली। इसके बाद कानपुर से बीज लाकर अगस्त माह में नर्सरी तैयार की और बिना पॉली हाउस के खुले में पौधे तैयार किए। मोनू शाक्य ने बताया कि सितंबर के अंत और अक्तूबर माह के शुरुआत में पौधों की रोपाई की।
विज्ञापन

बताया कि बीच में बारिश होने की वजह से कुछ लागत बढ़ी। दिसंबर माह से मिर्च की पैदावार शुरू हो गई। करीब दो माह में वह चार लाख रुपये की मिर्च बेच चुके हैं। फसल तैयार करने में दो लाख रुपये की लागत आई थी। यह दो लाख रुपये यदि निकाल दें तो दो लाख रुपये शुद्ध मुनाफा हो चुका है। जबकि करीब दो लाख रुपये की फसल अभी बिकने के लिए बाकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

मोनू ने बताया कि शिमला मिर्च की मांग दिल्ली की बाजार में अधिक है। बड़े शहरों में यह मिर्च 250 से 300 रुपये प्रति किलो तक बिकती है। पांच बीघे में हरी व एक बीघा में लाल व पीली शिमला मिर्च की फसल तैयार करके अब तक वह 150 क्विंटल मिर्च बेच चुके हैं। जैविक खाद के साथ हर मौसम में फसल तैयार करने की विधि वह सीख रहे हैं। इसके लिए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा बताए गए उपाय भी अपना रहे हैं।
खुले में फसल तैयार कर पेश की मिसाल
प्रगतिशील किसान मोनू शाक्य ने बताया कि उनके खेतों की मिट्टी उपजाऊ है। इसलिए वह हर तरह की फसल उगाने की सोचते हैं। बताया कि शिमला मिर्च की फसल वैसे तो पॉली हाउस में की जाती है, जिससे तेज धूप, बारिश, हवा आदि का प्रभाव एक निश्चित स्तर तक ही रहेे, लेकिन उन्होंने एकदम खुले में फसल की। इसमें उन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ।

अच्छी पैदावार हुई और समय से फल निकला। बताया कि पौधा दिसंबर से लेकर पूरे फरवरी माह तक मिर्च देगा। पांच बीघे में कुल दो लाख का खर्च आया है। अभी तक वह चार लाख से अधिक की मिर्च बेच चुके हैं, अभी और मिर्च बेचना बाकी है। इससे वह करीब दो लाख रुपये और कमाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed