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कोर्ट में गलत रिपोर्ट देने पर पैरोकार पर कार्रवाई
Auraiya, Uttar pradesh, India
Updated Fri, 17 Jun 2016 11:56 PM IST
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चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
- फोटो : file photo
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अपर सत्र न्यायाधीश लल्लू सिंह ने अभियोजन पक्ष की लापरवाही के कारण लंबे समय से लंबित मुकदमों की साक्ष्य कार्रवाई पूरी न हो पाने पर कार्रवाई शुरू कर दी है। आठ साल से हत्या के आरोप में जेल काट रहे एक आरोपी के मुकदमे में फर्जी रिपोर्ट प्रस्तुत करने पर थाना बेला के पैरोकार को नोटिस जारी कर एसपी से कार्रवाई करने के लिए लिखा गया है।
सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय त्वरित न्याय के लिए अक्सर निर्देश जारी करता है। इसके बावजूद वादकारी को न्याय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। अपर सत्र न्यायाधीश लल्लू सिंह ने अपनी कोर्ट में हत्या के लंबित मामले पर कड़ा रुख अपनाया। मामले में हत्यारोपी आठ साल से जेल में बंद है। साक्ष्य कार्रवाई पूर्ण न हो पाने के कारण उसे आज तक दोषी या निर्दोष साबित नही किया जा पा रहा है। इस मामले की सुनवाई में तत्कालीन विवेचक को साक्ष्य के लिए प्रस्तुत होना था।
कोर्ट को बेला थाने के पैरोकार ने लिखित सूचना दी कि गवाह को सम्मन भेजा जा चुका है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पैरोकार से सम्मन वापसी की जानकारी चाही तो उसने बताया कि अभी सम्मन जारी नही हुआ है। सम्मन जारी होने की लिखित फर्जी रिपोर्ट देने पर एडीजे ने आपत्ति जताकर नोटिस जारी किया है। तीन दिन के अंदर स्पष्टीकरण भी मांगा है। इसके बाद कार्रवाई की बात कही है। एडीजे ने पैरोकार की लापरवाही की जानकारी एसपी को पत्र लिखकर दी है।
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छह अक्टूबर 2008 को बेला थाना के गांव नीमहार में जाकिर अली की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जिसमें एक आरोपी इंदल करीब आठ से जेल में बंद है। इतने दिनों में उसे जमानत भी नही मिली। कोर्ट का मानना है कि ऐसे मामलों में निर्णय एक या दो साल में हो जाने चाहिए क्योंकि अगर आरोपी निर्दोष साबित हुआ तो फिर कौन जिम्मेदार होगा। एडीजे लल्लू सिंह ने कोर्ट में लंबित मुकदमों का ब्यौरा स्टाफ से मांगकर अभियोजन की सक्रियता पर बल दिया है।
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सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय त्वरित न्याय के लिए अक्सर निर्देश जारी करता है। इसके बावजूद वादकारी को न्याय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। अपर सत्र न्यायाधीश लल्लू सिंह ने अपनी कोर्ट में हत्या के लंबित मामले पर कड़ा रुख अपनाया। मामले में हत्यारोपी आठ साल से जेल में बंद है। साक्ष्य कार्रवाई पूर्ण न हो पाने के कारण उसे आज तक दोषी या निर्दोष साबित नही किया जा पा रहा है। इस मामले की सुनवाई में तत्कालीन विवेचक को साक्ष्य के लिए प्रस्तुत होना था।
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कोर्ट को बेला थाने के पैरोकार ने लिखित सूचना दी कि गवाह को सम्मन भेजा जा चुका है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पैरोकार से सम्मन वापसी की जानकारी चाही तो उसने बताया कि अभी सम्मन जारी नही हुआ है। सम्मन जारी होने की लिखित फर्जी रिपोर्ट देने पर एडीजे ने आपत्ति जताकर नोटिस जारी किया है। तीन दिन के अंदर स्पष्टीकरण भी मांगा है। इसके बाद कार्रवाई की बात कही है। एडीजे ने पैरोकार की लापरवाही की जानकारी एसपी को पत्र लिखकर दी है।
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छह अक्टूबर 2008 को बेला थाना के गांव नीमहार में जाकिर अली की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जिसमें एक आरोपी इंदल करीब आठ से जेल में बंद है। इतने दिनों में उसे जमानत भी नही मिली। कोर्ट का मानना है कि ऐसे मामलों में निर्णय एक या दो साल में हो जाने चाहिए क्योंकि अगर आरोपी निर्दोष साबित हुआ तो फिर कौन जिम्मेदार होगा। एडीजे लल्लू सिंह ने कोर्ट में लंबित मुकदमों का ब्यौरा स्टाफ से मांगकर अभियोजन की सक्रियता पर बल दिया है।