{"_id":"32-142916","slug":"Auraiya-142916-32","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘मनुष्य जन्म को व्यर्थ नहीं करना चाहिए’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘मनुष्य जन्म को व्यर्थ नहीं करना चाहिए’
Auraiya
Updated Mon, 22 Jul 2013 05:33 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुरादगंज (औरैया)। क्षेत्र के ग्राम हैदरपुर स्थित पक्का तालाब पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य पं.संतोष कुमार अवस्थी ने कहा कि मानव ईश्वर की सर्वोत्कृष्ट कृति है। इसे व्यर्थ नहीं गवाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 84 लाख योनियों में मानव जीवन सबसे अच्छा है। क्योंकि अन्य योनियों में जीव भोग करता है। मानव योनि में भोग के साथ जीवन कर्म भी करने का मौका मिलता है। बताया कि कर्म के माध्यम से मानव प्रभु को प्राप्त कर सकता है। कहा कि हमें मानव जीवन में ईर्ष्या, द्वेष, अहंकार आदि अवगुणों का त्याग कर सदैव ईश्वर का स्मरण करना चाहिए। आचार्य ने नाग नाथने की कथा का भी श्रवण कराया। बताया कि जब समाज रूपी दह में अभिमान व अहंकार रूपी नाग विष भर देता है तो मानव को जीवन जीना दुश्वार हो जाता है। ऐसी कठिन परिस्थितियों में भगवान को याद करने पर वह स्वयं आकर अहंकार नाग को नाथ कर धर्म रूपी नकेल डालकर मानव का जीवन कष्ट रहित कर देते हैं।
विज्ञापन