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आंकड़ों में दुरुस्त, हकीकत में सूखा है जालौन

Sat, 24 Feb 2018 12:24 AM IST
Updated Sat, 24 Feb 2018 12:24 AM IST
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आंकड़ों में दुरुस्त, हकीकत में सूखा है जालौन
उरई। गर्मी शुरू होते ही प्रदेश में बुंदेलखंड की चर्चा जोरों से शुरू हो जाती है। यह चर्चा कोई ऐतिहासिक धरोहर के लिए नहीं बल्कि पेयजल किल्लत के लिए होती है। गर्मी की दस्तक से ही बुंदेलखंड में पानी की हायतौबा शुरू हो जाती है। यह किल्लत लगभग बुंदेलखंड की सभी सातों जिलों में सुनाई देती है। हर बार प्रशासन सूखे व पेयजल संकट से निपटने के लिए तमाम तैयारियां करता है, लेकिन यह तैयारियां सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाती है। धरातल में जिले के लोगों अभी भी पीने के पानी के लिए दर दर भटक रहे है। इस वर्ष भी विभाग के आंकड़ों में जिले में कोई विशेष पानी की किल्लत नहीं है। जबकि हकीकत इससे इतर है। अब देखना यह है कि 25 फरवरी को बुंदेलखंड में सूखे की स्थिति देखने आए सचल दल को यहां क्या दिखाई देता है।
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बताते चले कि बुंदेलखंड को सूखे से निजात दिलाने के लिए 25 फरवरी को जिले में सरकार का सचल दल जिले में झांसी व चित्रकूट मंडल के अधिकारियों के साथ बैठक कर यहां के पेयजल संकट पर मंथन करेगा। सचल दल में सरकार के कई मंत्री दोनों मंडल के अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर पेयजल व सूखे को लेकर चर्चा करेंगे। बैठक को लेकर जिला प्रशासन ने सभी तैयारियां पूर्ण कर ली है।
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जिले के जलनिगम व जल संस्थान के साथ साथ अन्य विभागों से भी जिले के पेयजल संबधित आंकड़े मांगे गए है। जिसे लेकर शुक्रवार को विभागों ने बैठक को लेकर आंकड़ों की खानापूर्ति तैयार कर ली है। जल निगम के आंकड़ों के अनुसार जिले की सभी 77 पेयजल परियोजनाएं चल रही है। जबकि हकीकत में कई परियोजनाएं ठप पड़ी हैं तो कुछ में पाईप लाइन जगह-जगह से फटी पड़ी है, जिसकी वजह से ग्रामीणों को इन योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल रहा है।
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वहीं आंकड़ों में जिले में शहरी क्षेत्र में मात्र 213 हैंडपंप व ग्रामीण क्षेत्र 872 हैंडपंप खराब पड़े है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ अलग है। जिले में ऐसा कोई ब्लाक ही हो जहां दो सैकड़ा से अधिक हैंडपंप खराब न हो। खैर जो भी हो सरकारी आंकड़ों में जिले में पेयजल स्थिति ठीक नजर आती है। अब देखना है कि आने वाले सचल दल को जिले में क्या नजर आता है। क्या वह जमीनी हकीकत को देख कर लोगों का दर्द समझते है या फिर सरकारी आंकड़ों में संतोष जताते है।

- सरकारी आंकड़ों में जिले में मात्र 1085 हैंडपंप खराब
- सभी परियोजनाएं सुचारु फिर भी बूंद बूंद को तरस रहा जिला
अमर उजाला ब्यूरो
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