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बिना डॉक्टरों का पशु अस्पताल, कैसे हो इलाज
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औरैया। हैदरपुर का पशु अस्पताल सफेद हाथी साबित हो रहा है। यहां लाखों रुपये की लागत से बनी बिल्डिंग बर्बाद हो रही है। अस्पताल में ताला लटकता रहता है। डाक्टर और फार्मासिस्ट का अता-पता तक नहीं है। क्षेत्र के किसान मजबूरन झोलाछाप से पशुओं का इलाज कराने को विवश हैं। इतना ही नहीं, इन दिनों इस पशु अस्पताल को अस्थायी गोशाला के रूप में तब्दील कर दिया गया है।
हैदलपुर में लगभग एक दशक पहले पशु चिकित्सालय का निर्माण कराया गया था, निर्माण होने से क्षेत्रीय पशुपालकों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन पिछले लंबे समय से यहां पर चिकित्सकों व फार्मासिस्ट की तैनाती नहीं है। हैदरपुर ग्राम पंचायत मजरा निवासी एवं इटावा लोकसभा सांसद ने क्षेत्रीय लोगों की मांग पर टूटी पड़ी बाउंड्रीवाल को तो दुरुस्त करा दिया है, लेकिन चिकित्सकों के अभाव में यह बिल्डिंग फिलहाल सफेद हाथी साबित हो रही है। सेंगुर नदी क्षेत्र में यही एक मात्र पशु अस्पताल है, जो प्रशासन की अनदेखी के चलते अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। क्षेत्र के हैदरपुर, सुर्जनपुर, प्रतापपुर ऊंचा, बहादुरपुर, पड़रिया, चपटा, अलीपुर, बेलाझार, हरसांयपुर्वा, रामनगर सहित एक दर्जन से अधिक गांवो के पशुपालक इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। ऐसे में इन गांव के पशुपालकों को भटकना पड़ रहा है। पशुओं के बीमार होने पर मजबूरन झोलाछाप की शरण लेनी पड़ती है। राजेंद्र दुबे, अवनीश सिंह, श्याम सिंह आदि क्षेत्रीय पशुपालकों ने तत्काल चिकित्सक व फार्मासिस्ट की तैनाती कराने की मांग की है।
जिले में बड़े पैमाने पर पशु चिकित्सकों व फार्मासिस्ट की कमी है। शासन को अवगत करा दिया गया है। स्टाफ उपलब्ध होते ही अस्पताल को सुचारु रूप से शुरू कराया जाएगा।-डा.मोहन सिंह प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी
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-हैदरपुर पशु अस्पताल की बिल्डिंग में पड़ा रहता है ताला
अमर उजाला ब्यूरो
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हैदलपुर में लगभग एक दशक पहले पशु चिकित्सालय का निर्माण कराया गया था, निर्माण होने से क्षेत्रीय पशुपालकों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन पिछले लंबे समय से यहां पर चिकित्सकों व फार्मासिस्ट की तैनाती नहीं है। हैदरपुर ग्राम पंचायत मजरा निवासी एवं इटावा लोकसभा सांसद ने क्षेत्रीय लोगों की मांग पर टूटी पड़ी बाउंड्रीवाल को तो दुरुस्त करा दिया है, लेकिन चिकित्सकों के अभाव में यह बिल्डिंग फिलहाल सफेद हाथी साबित हो रही है। सेंगुर नदी क्षेत्र में यही एक मात्र पशु अस्पताल है, जो प्रशासन की अनदेखी के चलते अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। क्षेत्र के हैदरपुर, सुर्जनपुर, प्रतापपुर ऊंचा, बहादुरपुर, पड़रिया, चपटा, अलीपुर, बेलाझार, हरसांयपुर्वा, रामनगर सहित एक दर्जन से अधिक गांवो के पशुपालक इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। ऐसे में इन गांव के पशुपालकों को भटकना पड़ रहा है। पशुओं के बीमार होने पर मजबूरन झोलाछाप की शरण लेनी पड़ती है। राजेंद्र दुबे, अवनीश सिंह, श्याम सिंह आदि क्षेत्रीय पशुपालकों ने तत्काल चिकित्सक व फार्मासिस्ट की तैनाती कराने की मांग की है।
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जिले में बड़े पैमाने पर पशु चिकित्सकों व फार्मासिस्ट की कमी है। शासन को अवगत करा दिया गया है। स्टाफ उपलब्ध होते ही अस्पताल को सुचारु रूप से शुरू कराया जाएगा।-डा.मोहन सिंह प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी
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-हैदरपुर पशु अस्पताल की बिल्डिंग में पड़ा रहता है ताला
अमर उजाला ब्यूरो