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धन-धान्य और सुख शांति की कामना के साथ घर-घर पूजे गए गोधन
Updated Sat, 10 Nov 2018 12:01 AM IST
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कोंच/रामपुरा। गोवर्धन पूजा गुरुवार को कोंच और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बड़े ही श्रद्घाभाव और परंपरागत उत्साह के साथ मनाया गया। घरों में बीच आंगन में गोबर के गोधन पसारे गये और उन्हें खीलों-पुष्पों से सुसज्जित किया गया।
घर के मुखिया ने परिवार के सभी सदस्यों के साथ मिल कर विधि विधान के साथ गोवर्धन का पूजन किया। परिवार के सभी सदस्यों ने मिल कर गिर्राजजी महाराज की प्रदक्षिणा की और उनसे प्रार्थना की कि उनके घरों में सदा सुख शांति रहे और अन्न के भंडार उनके घरों में भरे रहें।
अन्नकूट से भगवान गोवर्धन का भोग लगाया गया। वस्तुत: गोवर्धन पर्वत की इस प्रतिकृति पर गोबर से पहाड़, वृक्ष, नदियां, वन आदि उकेरे गये थे, माना जाता है कि यह प्राकृतिक धरोहरें हमें जीविकोपार्जन के साधन उपलब्ध कराती हैं।
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द्वापर में भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों को देवराज इंद्र की पूजा करने के बजाय उस गोबर्धन पर्वत की पूजा करने के लिये प्रेरित किया था जो हमें अपना जीवन चलाने के लिये साल भर अन्न, ईंधन और अन्य जरूरी चीजें उपलब्ध कराता है। तभी से गोधन पूजा का प्रचलन प्रारंभ हुआ, ऐसा विद्वानों का मानना है। उधर रामपुरा में पूरे विधि विधान से पूजन कार्यक्रम हुआ। छप्पन भोग लगाए गए।
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घर के मुखिया ने परिवार के सभी सदस्यों के साथ मिल कर विधि विधान के साथ गोवर्धन का पूजन किया। परिवार के सभी सदस्यों ने मिल कर गिर्राजजी महाराज की प्रदक्षिणा की और उनसे प्रार्थना की कि उनके घरों में सदा सुख शांति रहे और अन्न के भंडार उनके घरों में भरे रहें।
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अन्नकूट से भगवान गोवर्धन का भोग लगाया गया। वस्तुत: गोवर्धन पर्वत की इस प्रतिकृति पर गोबर से पहाड़, वृक्ष, नदियां, वन आदि उकेरे गये थे, माना जाता है कि यह प्राकृतिक धरोहरें हमें जीविकोपार्जन के साधन उपलब्ध कराती हैं।
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द्वापर में भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों को देवराज इंद्र की पूजा करने के बजाय उस गोबर्धन पर्वत की पूजा करने के लिये प्रेरित किया था जो हमें अपना जीवन चलाने के लिये साल भर अन्न, ईंधन और अन्य जरूरी चीजें उपलब्ध कराता है। तभी से गोधन पूजा का प्रचलन प्रारंभ हुआ, ऐसा विद्वानों का मानना है। उधर रामपुरा में पूरे विधि विधान से पूजन कार्यक्रम हुआ। छप्पन भोग लगाए गए।