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अधूरी गोशालाएं पूरी हो जाएं तो मिले किसानों को राहत
Updated Mon, 03 Dec 2018 11:53 PM IST
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उरई। जनपद को अन्ना जानवरों से निजात दिलाने के लिए सरकार भले ही लाख प्रयास कर ले पर अधिकारियों की हीलाहवाली उसके मंसूबों को पूरे नहीं होने दे रही है। शासन की ओर से तकरीबन साल भर पूर्व बुंदेलखंड में आवश्यकतानुसार गोशाला निर्माण का फैसला लिया गया था। गोशालाओं के नाम पर करोड़ों का बजट भी बना और काम भी शुरू हुआ लेकिन काम की रफ्तार ऐसी है कि किसानों की लगभग दो सीजन फसल पर अन्ना जानवरों का ग्रहण लगा हुआ है।
सर्दी का मौसम जनपद के किसानों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है। यह मुसीबत भी मौसम की नहीं बल्कि अन्ना जानवरों की देन है। जिनसे अपनी फसलों को बचाने के लिए किसानों को रात दिन खेतों पर ही रहकर रखवाली करनी पड़ रही है। कोई खेत में खुले आसमान के नीचे चारपाई डाले है तो कोई झोपड़ी बनाकर वहीं खाना भी बना रहा है। जबकि अन्ना मवेशियों के लिए जिले में निर्माणाधीन गोशालाओं की सुध लेने वाला भी कोई नहीं है।
गोशाला का निर्माण कार्य ठेकेदारों की मनमानी पर चल रहा है। कहीं चहारदीवारी की दीवार गिर रही है तो कहीं चहारदीवारी ही नहीं बनी है। जहां अधिकारी निरीक्षण कर भी रहे हैं तो वहां भी काम रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। किसानों का कहना है कि एक तो गोशालाओं का कुछ अता पता नहीं है, उस पर अधिकारी खेतों में कटीले तार न लगाने की बात भी कह रहे हैं, आखिर कोई तो बताए किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए करे तो क्या करे।
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रामपुरा प्रतिनिधि के अनुसार, निनावली में करीब साढ़े तीन करोड़ की लागत से तैयार हो रही गोशाला अपने निर्माण से पहले ही विवादों के घेरे में आ गई है। करीब पंद्रह दिन पूर्व निर्माणाधीन गोशाला की दीवार जेसीबी की टक्कर से भरभरा कर गिर पड़ी। इसकी शिकायत इलाकाई लोगों ने डीएम से लेकर सीएम तक से पोर्टल पर कर दी। यह और बात है कि जांच के नाम पर खानापूरी हुई और निर्माण का काम फिर चालू हो गया। गोशाला के जिम्मेदारों का कहना है कि तीन चार माह के भीतर गोशाला बनकर तैयार हो जाएगी।
कदौरा प्रतिनिधि के अनुसार, अन्ना मवेशियों से सबसे अधिक प्रभावित कदौरा क्षेत्र में चतेला के पास करीब तीन करोड़ की लागत से गोशाला तैयार की जा रही है। इस गोशाला को जनवरी तक पूरा होना है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस रफ्तार से काम हो रहा है, उससे लगता नहीं है कि तय समय के भीतर गोशाला में जानवरों की चहल पहल दिखाई देने लगेगी। हालांकि नगर पालिका के ईओ मैथिलीशरण का कहना है कि गोशाला का 70 फीसदी से अधिक काम पूरा भी हो गया और प्रयास किया जा रहा है कि तय समय पर गोशाला चालू भी कर दी जाए।
मुहम्मदाबाद प्रतिनिधि के अनुसार, मुहाना, जैसारी, मकरेछा, जैसारी कला, डकोर, कुसमिलिया, मुहम्मदाबाद आदि ग्रामीणों की नजरें करीब एक माह से मुहाना में बन रही गोशाला पर टिकी है। कहना है कि गोशाला बने तो खेतों पर रात की चौकीदारी से निजात मिले। फिलहाल तो गोशाला निर्माण का काम ही चल रहा है और जनवरी तक बनकर तैयार होने की भी बात की जा रही है, लेकिन चारे पानी के साथ उसके चालू होने की जानकारी देने वाला कोई नहीं है। वैसे बनने के बाद चालू होने पर ही गोशाला का उद्देश्य पूरा होगा।
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सर्दी का मौसम जनपद के किसानों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है। यह मुसीबत भी मौसम की नहीं बल्कि अन्ना जानवरों की देन है। जिनसे अपनी फसलों को बचाने के लिए किसानों को रात दिन खेतों पर ही रहकर रखवाली करनी पड़ रही है। कोई खेत में खुले आसमान के नीचे चारपाई डाले है तो कोई झोपड़ी बनाकर वहीं खाना भी बना रहा है। जबकि अन्ना मवेशियों के लिए जिले में निर्माणाधीन गोशालाओं की सुध लेने वाला भी कोई नहीं है।
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गोशाला का निर्माण कार्य ठेकेदारों की मनमानी पर चल रहा है। कहीं चहारदीवारी की दीवार गिर रही है तो कहीं चहारदीवारी ही नहीं बनी है। जहां अधिकारी निरीक्षण कर भी रहे हैं तो वहां भी काम रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। किसानों का कहना है कि एक तो गोशालाओं का कुछ अता पता नहीं है, उस पर अधिकारी खेतों में कटीले तार न लगाने की बात भी कह रहे हैं, आखिर कोई तो बताए किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए करे तो क्या करे।
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रामपुरा प्रतिनिधि के अनुसार, निनावली में करीब साढ़े तीन करोड़ की लागत से तैयार हो रही गोशाला अपने निर्माण से पहले ही विवादों के घेरे में आ गई है। करीब पंद्रह दिन पूर्व निर्माणाधीन गोशाला की दीवार जेसीबी की टक्कर से भरभरा कर गिर पड़ी। इसकी शिकायत इलाकाई लोगों ने डीएम से लेकर सीएम तक से पोर्टल पर कर दी। यह और बात है कि जांच के नाम पर खानापूरी हुई और निर्माण का काम फिर चालू हो गया। गोशाला के जिम्मेदारों का कहना है कि तीन चार माह के भीतर गोशाला बनकर तैयार हो जाएगी।
कदौरा प्रतिनिधि के अनुसार, अन्ना मवेशियों से सबसे अधिक प्रभावित कदौरा क्षेत्र में चतेला के पास करीब तीन करोड़ की लागत से गोशाला तैयार की जा रही है। इस गोशाला को जनवरी तक पूरा होना है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस रफ्तार से काम हो रहा है, उससे लगता नहीं है कि तय समय के भीतर गोशाला में जानवरों की चहल पहल दिखाई देने लगेगी। हालांकि नगर पालिका के ईओ मैथिलीशरण का कहना है कि गोशाला का 70 फीसदी से अधिक काम पूरा भी हो गया और प्रयास किया जा रहा है कि तय समय पर गोशाला चालू भी कर दी जाए।
मुहम्मदाबाद प्रतिनिधि के अनुसार, मुहाना, जैसारी, मकरेछा, जैसारी कला, डकोर, कुसमिलिया, मुहम्मदाबाद आदि ग्रामीणों की नजरें करीब एक माह से मुहाना में बन रही गोशाला पर टिकी है। कहना है कि गोशाला बने तो खेतों पर रात की चौकीदारी से निजात मिले। फिलहाल तो गोशाला निर्माण का काम ही चल रहा है और जनवरी तक बनकर तैयार होने की भी बात की जा रही है, लेकिन चारे पानी के साथ उसके चालू होने की जानकारी देने वाला कोई नहीं है। वैसे बनने के बाद चालू होने पर ही गोशाला का उद्देश्य पूरा होगा।