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कुश्ती में भी बेटियां दिखाएं हुनर
Updated Wed, 22 Nov 2017 12:26 AM IST
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मुहम्मदाबाद। बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है तो फिर पहलवानी इससे अछूती क्यों रहे। बेटियों ने भी पहलवानी में मैडल हासिल कर साबित कर दिया है कि चाहे पढ़ाई का मैदान या फिर कुश्ती का, किसी में लड़कियां लड़कों से कम नहीं है। यह बात कुसमिलिया दंगल में पंजाब से आई महिला पहलवान हरप्रीति कौर व गीता ने कही।
पंजाब की महिला पहलवान हरप्रीति कौर का कहना है कि जब वह कक्षा 8 में पढ़ती थी, तभी से कुश्ती लड़ने का अभ्यास कर रही थी। पिता सरदार मेहर सिंह की प्रेरणा से कोच सुमनप्रीत कौर के साथ अपने स्वास्थ्य और भविष्य पर ध्यान केंद्रित किया। कहा कि अब लोग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
जबकि युवा वर्ग नशे की ओर ज्यादा बढ़ रहा है। युवाओं को चाहिए कि नशा आदि से दूर रह कर अपने स्वास्थ्य और भविष्य पर ध्यान दें। बोलीं, स्वास्थ्य अच्छा रहेगा तो भविष्य भी अच्छा बनेगा। हरियाणा की महिला पहलवान रूबी ने कहा कि उन्हें बचपन से ही पहलवानी का शौक था।
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मेरे भाई रिंकू ने मुझे प्रेरित किया। बताया कि पंजाब में आज भी सबसे ज्यादा महिलाएं पहलवान हैं। इसलिए महिलाओं को पर्दे से बाहर आकर पहलवानी की ट्रेनिंग लेना चाहिए और अपने जनपद, प्रदेश और देश का नाम रोशन करना चाहिए। गीत पहलवान पंजाब ने कहा कि कक्षा नौ से पहलवानी कर रही हैं। पिता सरदार बूटा सिंह की प्रेरणा से आज मै और मेरी बड़ी बहन जो सीआरपीएफ में है, पहलवानी कर रहे हैं। पंजाब में महिलाओं को इसकी ट्रेनिंग भी दिलाई जाती है।
कुसमिलिया में आई महिला पहलवानों ने की मन की बात
अमर उजाला ब्यूरो
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पंजाब की महिला पहलवान हरप्रीति कौर का कहना है कि जब वह कक्षा 8 में पढ़ती थी, तभी से कुश्ती लड़ने का अभ्यास कर रही थी। पिता सरदार मेहर सिंह की प्रेरणा से कोच सुमनप्रीत कौर के साथ अपने स्वास्थ्य और भविष्य पर ध्यान केंद्रित किया। कहा कि अब लोग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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जबकि युवा वर्ग नशे की ओर ज्यादा बढ़ रहा है। युवाओं को चाहिए कि नशा आदि से दूर रह कर अपने स्वास्थ्य और भविष्य पर ध्यान दें। बोलीं, स्वास्थ्य अच्छा रहेगा तो भविष्य भी अच्छा बनेगा। हरियाणा की महिला पहलवान रूबी ने कहा कि उन्हें बचपन से ही पहलवानी का शौक था।
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मेरे भाई रिंकू ने मुझे प्रेरित किया। बताया कि पंजाब में आज भी सबसे ज्यादा महिलाएं पहलवान हैं। इसलिए महिलाओं को पर्दे से बाहर आकर पहलवानी की ट्रेनिंग लेना चाहिए और अपने जनपद, प्रदेश और देश का नाम रोशन करना चाहिए। गीत पहलवान पंजाब ने कहा कि कक्षा नौ से पहलवानी कर रही हैं। पिता सरदार बूटा सिंह की प्रेरणा से आज मै और मेरी बड़ी बहन जो सीआरपीएफ में है, पहलवानी कर रहे हैं। पंजाब में महिलाओं को इसकी ट्रेनिंग भी दिलाई जाती है।
कुसमिलिया में आई महिला पहलवानों ने की मन की बात
अमर उजाला ब्यूरो