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सिर्फ 20 फीसदी गांव ओडीएफ, कैसे सौच मुक्त होगा जनपद
Updated Tue, 10 Jul 2018 11:52 PM IST
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उरई। जिले के गांवों को ओडीएफ बनाने के लिए जिला प्रशासन ने वर्ष 2014 से गांवों में शौचालय निर्माण के लिए करोड़ों की धनराशि खर्च की है। लेकिन स्थिति यह है कि प्रशासन जिले को पूर्णता ओडीएफ बनाने के लिए चार बार डेडलाइन जारी कर चुका है, लेकिन अब तक जिले को पूर्णता ओडीएफ बनाना तो छोड़िए, लक्ष्य के सापेक्ष 30 प्रतिशत भी गांवों को खुले में शौच मुक्त नहीं कर पाया है। इससे प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना धरातल पर सिर्फ हवा हवाई ही नजर आ रही है। स्थिति यह है कि जिले के 940 गंावों में जिला प्रशासन अब तक सिर्फ 198 गांवों को पूर्णता ओडीएफ बनाने का दावा कर रहा है, लेकिन प्रशासन के इस दावे में कितना दम है इसकी हकीकत तो सिर्फ गांवों की स्थिति देखने पर ही पता चलेगी।
बता दें कि केंद्र में भाजपा की सरकार बनते ही स्वच्छ भारत का नारा बुलंद करते हुए गांवों को खुले में शौच मुक्ति बनाने की मुहिम तेज की गई थी। प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना के लिए जिले में भी अधिकारियों ने शुरूआती दिनों में काफी तेजी दिर्खाई। अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक सभी इस विशेष मुहिम का हिस्सा बने। लोगों को शौचालय के प्रति जागरूक करने के लिए जिले में कई तरह के प्रशिक्षण के साथ-साथ जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए गए।
यहां तक कि जिलाधिकारी मन्नान अख्तर ने जिले की सभी 575 ग्राम पंचायतों के प्रधानों को शौचालय जागरूकता को लेकर बनी फिल्म टायलेट एक प्रेमकथा को शहर के अर्चना टाकीज में फ्री दिखाया और लोगों को घर में शौचालय बनवाने के लिए जागरूक किया। इसके साथ ही अधिकारियों ने गांवों में जाकर मार्निंग वाक की और लोगों को खुले में शौच न जाने के लिए जागरूक किया, लेकिन अधिकारियों के यह प्रयास कुछ विशेष सफल होते नहीं दिख रहे।
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तमाम प्रयासों के बाद भी जिला प्रशासन मात्र 30 प्रतिशत ही लक्ष्य पूरा कर पाया है। जबकि प्रशासन ने एक बार फिर जिले में डेडलाइन जारी करते हुए 2 अक्तूबर तक का लक्ष्य रखा है, जो फिलहाल की स्थिति में सफल होते नहीं दिख रहा है। जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब 22 हजार से अधिक शौचालय के निर्माण पूर्ण हैं इतने ही पूर्ण होने की स्थिति में है। जिले में कुल 75 हजार शौचालय के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। डीपीआरओ राज बहादुर का कहना है कि तेजी से जिले में अभियान चलाए जा रहे हैं। जल्द ही लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा।
कहां जागरूकता फैला रहीं 75 टीमें
जिले में गांवों को ओडीएफ बनाने के लिए जिला प्रशासन ने 75 अधिकारियों के नेतृत्व में 75 टीमों का गठन किया। इसमें सैकड़ों कर्मचारियों को भी जागरूकता के लिए लगाया गया था। जो रोजाना सुबह गांवों में पहुंचकर लोगों को खुले में शौच न जाने के लिए जागरूक कर रही है, लेकिन फिर भी सफलता के नाम पर जिले में सिर्फ 198 गांव ही मिले हैं।
करवाचौथ में गिफ्ट भी न भाया
घरों में शौचालय निर्माण के लिए जागरूक करने के लिए जिला प्रशासन ने करवाचौथ के विशेष मौके पर विशेष योजना तैयार की। इस योजना के तहत करवाचौथ के मौके पर आवेदकों को सिर्फ एक फोन पर शौचालय मिले। इसमें किसी भी औपचारिकता को नियमों से परे रखा गया। इस योजना के माध्यम से जिला प्रशासन पूरे प्रदेश में सराहना हुई, लेकिन इसके बाद भी जिले के गांवों को अब तक पूर्णता ओडीएफ नहीं कराया जा सका।
940 में से मात्र 198 गांव ही ओडीएफ की श्रेणी में
- 2 अक्तूबर तक होना है पूर्णता ओडीएफ गांव
अमर उजाला ब्यूरो
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बता दें कि केंद्र में भाजपा की सरकार बनते ही स्वच्छ भारत का नारा बुलंद करते हुए गांवों को खुले में शौच मुक्ति बनाने की मुहिम तेज की गई थी। प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना के लिए जिले में भी अधिकारियों ने शुरूआती दिनों में काफी तेजी दिर्खाई। अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक सभी इस विशेष मुहिम का हिस्सा बने। लोगों को शौचालय के प्रति जागरूक करने के लिए जिले में कई तरह के प्रशिक्षण के साथ-साथ जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए गए।
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यहां तक कि जिलाधिकारी मन्नान अख्तर ने जिले की सभी 575 ग्राम पंचायतों के प्रधानों को शौचालय जागरूकता को लेकर बनी फिल्म टायलेट एक प्रेमकथा को शहर के अर्चना टाकीज में फ्री दिखाया और लोगों को घर में शौचालय बनवाने के लिए जागरूक किया। इसके साथ ही अधिकारियों ने गांवों में जाकर मार्निंग वाक की और लोगों को खुले में शौच न जाने के लिए जागरूक किया, लेकिन अधिकारियों के यह प्रयास कुछ विशेष सफल होते नहीं दिख रहे।
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तमाम प्रयासों के बाद भी जिला प्रशासन मात्र 30 प्रतिशत ही लक्ष्य पूरा कर पाया है। जबकि प्रशासन ने एक बार फिर जिले में डेडलाइन जारी करते हुए 2 अक्तूबर तक का लक्ष्य रखा है, जो फिलहाल की स्थिति में सफल होते नहीं दिख रहा है। जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब 22 हजार से अधिक शौचालय के निर्माण पूर्ण हैं इतने ही पूर्ण होने की स्थिति में है। जिले में कुल 75 हजार शौचालय के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। डीपीआरओ राज बहादुर का कहना है कि तेजी से जिले में अभियान चलाए जा रहे हैं। जल्द ही लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा।
कहां जागरूकता फैला रहीं 75 टीमें
जिले में गांवों को ओडीएफ बनाने के लिए जिला प्रशासन ने 75 अधिकारियों के नेतृत्व में 75 टीमों का गठन किया। इसमें सैकड़ों कर्मचारियों को भी जागरूकता के लिए लगाया गया था। जो रोजाना सुबह गांवों में पहुंचकर लोगों को खुले में शौच न जाने के लिए जागरूक कर रही है, लेकिन फिर भी सफलता के नाम पर जिले में सिर्फ 198 गांव ही मिले हैं।
करवाचौथ में गिफ्ट भी न भाया
घरों में शौचालय निर्माण के लिए जागरूक करने के लिए जिला प्रशासन ने करवाचौथ के विशेष मौके पर विशेष योजना तैयार की। इस योजना के तहत करवाचौथ के मौके पर आवेदकों को सिर्फ एक फोन पर शौचालय मिले। इसमें किसी भी औपचारिकता को नियमों से परे रखा गया। इस योजना के माध्यम से जिला प्रशासन पूरे प्रदेश में सराहना हुई, लेकिन इसके बाद भी जिले के गांवों को अब तक पूर्णता ओडीएफ नहीं कराया जा सका।
940 में से मात्र 198 गांव ही ओडीएफ की श्रेणी में
- 2 अक्तूबर तक होना है पूर्णता ओडीएफ गांव
अमर उजाला ब्यूरो