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20 घंटे बिजली आपूर्ति पर फिरा पानी

Mon, 08 Feb 2016 11:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
अमर उजाला ब्यूरो औरैया Updated Mon, 08 Feb 2016 11:30 PM IST
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20-hour power supply and turned on the water
बिजली विभाग ने दिसंबर 2015 में वसूली अभियान चलाकर उच्चाधिकारियों को साबित कर दिया था कि वह भी शहर में 4.62 रुपये की दर से रेट ला सकते हैं। इससे जल्द ही शहरवासियों को 20 घंटे बिजली दिए जाने की मांग कर सकते हैं। लेकिन विभागीय अधिकारियों की गलत फहमी ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी। दो माह में ही बिजली दर की स्थिरता जवाब दे गई। अब शहर के उपभोक्ताओं की 20 घंटे निर्बाध आपूर्ति मिलने की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
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शहर के उपभोक्ताओं को शासन से निर्धारित मानकों के तहत आपूर्ति दिलाए जाने को बिजली अधिकारियों ने नवंबर माह में वसूली के प्रति चौकड़ी भरनी शुरू कर दी। यही नहीं अधिकारियों ने शहर में 4.62 रुपये थ्रू रेट करने के लिए नया सगूफा भी बनाया। इसके तहत निर्धारित शेड्यूल के बाद भी लोकल स्तर से आदेश जारी कर 15 घंटे की आपूर्ति में कटौती करवाने के काम शुरू कर दिया।
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विभागीय सूत्रों के मुताबिक ऐसा इसलिए किया गया था जिससे उपभोक्ताओं को कम आपूर्ति दी जाएगी तो खपत भी कम होगी। वहीं वसूली अभियान युद्ध स्तर पर चलाया ही जा रहा था। ऐसे में दिसंबर माह में अधिकारियों की मंशा के अनुरूप 4.62 रुपये की दर पर पहुंच गया। मजे की बात तो यह है कि लक्ष्य सामने देख जहां अधिकारी फूले नहीं समा रहे थे तो वहीं उनकी यह खुशी महज कुछ दिनों तक ही सीमित रह सकी। जनवरी माह के बाद एक बार फिर से विभाग प्राथमिक स्थिति में पहुंच गया। अधिकारियों की लापरवाही से 4.62 रुपये की दर का लक्ष्य फिर से दूर चला गया।
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 दिसंबर माह में विभागीय अधिकारी 4.62 रुपये की दर लगाने जान के दम भर रहे है। वास्तव में वह अमर उजाला अभियान के तहत बिजली बिल घोटाले के खुलासे का असर था। इसमें घोटाले में शामिल सभी उपभोक्ताओं के बिल अपलोड कर जब उनसे वसूली गई तो शासन के निर्धारित रेट को पाना विभाग के लिए मामूली बात हो गई। मजे की बात तो यह है कि अमर उजाला की इस मुहिम से विभाग ने निर्धारित रेट तो प्राप्त कर लिया,

लेकिन उसे स्थिर बनाने में उनके पसीना छूट गया। लिहाजा दो माह में ही थ्रू रेट अपने पुराने सूचकांक पर पहुंचकर लटक गया। इससे शहर की जनता को बंधी 20 घंटे निर्बाध आपूर्ति मिलने की उम्मीद पूरी तरह से धूमिल हो गई। वहीं दो माह में भी थ्रू रेट की स्थिरता बकरार न रख पाने वाले अधिकारियों की भी कार्यशैली पर प्रश्न चिंह लग गए हैं।


हमने थ्रू रेट को स्थिर रखने के लिए पूरा प्रयास किया है। हालांकि अभी भी हम बिजली चोरों को पूरी तरह से चिन्हित नहीं कर पा रहे हैं। इसके चलते थ्रू रेट को लक्ष्य के अनुरूप लाने में सफल नहीं हो पा रहे हैं।
केबी गुप्ता, अधीक्षण अभियंता
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