{"_id":"5c8a9d13bdec2213f8015bd5","slug":"191552588051-auraiya-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रीराम कथा जीवन का संविधान है: मानस विदूषी मृदुला रामायणी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रीराम कथा जीवन का संविधान है: मानस विदूषी मृदुला रामायणी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिबियापुर (औरैया)। बाबू दयारामनगर में पंडित ओमप्रकाश त्रिपाठी के आवास पर मानस सत्संग समागम में बुधवार की रात मैनपुरी की मानस विदुषी मृदुला रामायणी ने कहा कि श्रीराम कथा जीवन का संविधान है। श्रीराम कथा पिता-पुत्र, माता-पिता, भाई-बहन, सेवक-स्वामी, राजा और प्रजा के सुंदर संबंधों का नीति नियोजन करती है। मृदुला ने कहा कि प्रभु श्रीराम का प्रथम कार्य माता-पिता और गुरु की चरण वंदना से प्रारंभ होता है।
उन्होंने कहा कि संसार के सभी सुखों व साधनों में पति के बिना नारी को कोई आनंद नहीं है। मैनपुरी के पंडित ज्ञानजी शुक्ल ने कहा कि प्रेम लेना, प्रेम देना, प्रेम ही सत्कर्म है। प्रेम पथ पर न्याय का औचित्य ही दुष्कर्म है। जीवन में प्रेम ही सबसे महत्वपूर्ण है। मृदुला ने रामकथा का पाठ करने वाले महेश पांडे को अंगवस्त्र ओढ़ाकर आशीर्वाद दिया। मानस प्रेमी हरविलास मिश्र ने मृदुला जी एवं रामकथा आचार्य पंडित ज्ञान जी को अंगवस्त्र दिया। डॉ. रामचंद्र दीक्षित ने भी उन्हें सम्मानित किया। राम कथा में रामनाथ त्रिपाठी, सुमित नारायण त्रिपाठी, राधा कृष्ण शर्मा, रामबाबू द्विवेदी, सोने लाल प्रजापति, देवी चरण वर्मा, श्रीकांत द्विवेदी, श्याम सुंदर तिवारी, प्रधानाचार्य डॉ. योगेंद्र सिंह, प्रमेंद्र सिंह, विपुल दुबे, वाणी विलास दुबे, सुधीर मिश्रा, गगन मिश्रा, डॉक्टर एमपी शुक्ला, अतुल कुमार दुबे, आचार्य पंडित गिरीश चंद दुबे, अवधेश शुक्ला, महेंद्र प्रताप सिंह, प्रदीप शुक्ला आदि मानस प्रेमी मौजूद रहे।
-बाबू दयाराम नगर में मानस सत्संग
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि संसार के सभी सुखों व साधनों में पति के बिना नारी को कोई आनंद नहीं है। मैनपुरी के पंडित ज्ञानजी शुक्ल ने कहा कि प्रेम लेना, प्रेम देना, प्रेम ही सत्कर्म है। प्रेम पथ पर न्याय का औचित्य ही दुष्कर्म है। जीवन में प्रेम ही सबसे महत्वपूर्ण है। मृदुला ने रामकथा का पाठ करने वाले महेश पांडे को अंगवस्त्र ओढ़ाकर आशीर्वाद दिया। मानस प्रेमी हरविलास मिश्र ने मृदुला जी एवं रामकथा आचार्य पंडित ज्ञान जी को अंगवस्त्र दिया। डॉ. रामचंद्र दीक्षित ने भी उन्हें सम्मानित किया। राम कथा में रामनाथ त्रिपाठी, सुमित नारायण त्रिपाठी, राधा कृष्ण शर्मा, रामबाबू द्विवेदी, सोने लाल प्रजापति, देवी चरण वर्मा, श्रीकांत द्विवेदी, श्याम सुंदर तिवारी, प्रधानाचार्य डॉ. योगेंद्र सिंह, प्रमेंद्र सिंह, विपुल दुबे, वाणी विलास दुबे, सुधीर मिश्रा, गगन मिश्रा, डॉक्टर एमपी शुक्ला, अतुल कुमार दुबे, आचार्य पंडित गिरीश चंद दुबे, अवधेश शुक्ला, महेंद्र प्रताप सिंह, प्रदीप शुक्ला आदि मानस प्रेमी मौजूद रहे।
विज्ञापन
-बाबू दयाराम नगर में मानस सत्संग
अमर उजाला ब्यूरो