{"_id":"5ceae18ebdec220755419008","slug":"15588970873-auraiya-news163","type":"story","status":"publish","title_hn":"न जान जाने का खौफ और न ही आजीवन विकलांगता का डर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
न जान जाने का खौफ और न ही आजीवन विकलांगता का डर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
औरैया/दिबियापुर। व्यस्ततम रेलमार्गों से एक दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग से औसतन तीन मिनट में एक नानस्टाप ट्रेन गुजरती है। औरैया जिले के फफूंद, अछल्दा एवं कंचौसी समेत अन्य छोटे स्टेशनों से यात्रा शुरू करने वाले यात्री हैं कि मानते ही नहीं। अधिकांश यात्री फुट ओवर ब्रिज के बजाय जल्दबाजी में सीधे रेलवे ट्रैक ही पार करते दिखाई देते हैं। ऐसा शायद ही कोई हफ्ता गुजरता हो, जब कहीं ऐसा हादसा न होता हो कि फलां स्टेशन पर ट्रेन की चपेट में आकर यात्री की मौत हो गई। ऐसा लगता है कि जल्दबाजी के चक्कर में ट्रैक पार करने वाले इन लोगों को न तो अपनी जान जाने का डर है और न रेलवे एक्ट की विभिन्न धाराओं में पाबंद होने का खौफ। विकलांग होने की भी चिंता नहीं।
रेलवे फ्लाईओवर बन जाने के कारण फफूंद रेलवे स्टेशन की क्रासिंग बंद हो चुकी है। परंतु लोग एक छोर से दूसरे छोर पर जाने के लिए अब भी रेलवे लाइन को पार करने से नहीं चूकते। सुबह मजदूरों की आवाजाही साफ देखी जा रही है। यहां से सैकड़ों मजदूर प्रतिदिन साइकिलों को इसी प्रकार से कंधे पर उठाकर गुजरते नजर आते हैं। इसे मजबूरी कहें या इनकी आदत, कोई खौफ नहीं है।
रेलवे स्टेशन फफूंद पर एक ट्रेन से उतरे कुछ यात्रियों को रेलवे लाइन पार कर रेलवे लाइन के किनारे वाले मुहल्ले में जाना है। बुजुर्ग महिला का हाथ पकड़कर दूसरी महिला ऐसे रेलवे लाइन पार कर रही है, जैसे वह रेलवे लाइन नहीं कोई आम रास्ता पार कर रही है। महिला को यह भान भी नहीं रहा कि इस रेलमार्ग पर ट्रेनें तेज गति से गुजरती हैं।
विज्ञापन
एक महिला एक हाथ से कान में मोबाइल लगाए बात करते हुए रेलवे लाइन पार कर रही है। जबकि दूसरे हाथ में अपने छोटे से बच्चे का हाथ पकड़े है। यह महिला इतनी बेफिक्र है कि रेलवे लाइन पार करते समय इधर उधर भी नहीं देखा और लाइन पार कर ली।
प्लेटफार्म संख्या चार पर कानपुर-टूंडला पैंसेंजर आकर रुकती है। इसी बीच एनाउंसमेंट होता है कि प्लेटफार्म संख्या 2 की रेलवे लाइन से तेज गति से वंदे भारत एक्सप्रेस गुजर रही है। कोई भी यात्री रेलवे लाइन पार न करे। वंदे भारत एक्सप्रेस स्टेशन के बिल्कुल नजदीक आ चुकी है। परंतु कई युवा स्टंट करते हुए एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर गए।
प्लेटफार्म संख्या 3 पर गोमती एक्सप्रेस आ चुकी है। ट्रेन के कोचों में बैठने के लिए सीट की जुगाड़ के लिए कई यात्री प्लेटफार्म के बजाय लाइन के किनारे खड़े होकर इंतजार कर रहे हैं। उन्हें यह भी आभास नहीं कि गोमती एक्सप्रेस के रुकने के बाद कोई दूसरी ट्रेन बगल वाली लाइन से तेज गति से गुजर सकती है और बड़ा हादसा हो सकता है।
कई यात्री को पूरे परिवार एवं सामान के साथ रेलवे लाइन पार करते नजर आते हैं। एक यात्री ने पहले अपने सामान को एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर पहुंचाया। इसके बाद पत्नी और बच्चों को भी रेलवे लाइन पार कराई। जबकि रेलवे लाइन पर सामान छूटने या फिर भारी सामान लेकर रेलवे लाइन पार करते समय बच्चे या महिला का पैर फंसने से बड़ा हादसा हो सकता है।
आरपीएफ थाना प्रभारी दिनेश कुमार का कहना है कि रेलवे लाइन पार करते पकड़े जाने पर रेलवे एक्ट की धारा 147 के तहत 6 माह तक की सजा या फिर 500 रुपया जुर्माना हो सकता है। सजा मजिस्ट्रेट पर निर्भर करती है। बताया कि प्रतिमाह 20 से 20 यात्रियों को रेलवे एक्ट की धारा 147 में पाबंद किया जाता है। रेलवे लाइन पार न करने को जागरूक करने के लिए समय-समय पर जागरुकता अभियान भी चलाया जाता है। वंदे भारत और राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों के गुजरते समय आरपीएफ फोर्स यात्रियों को जागरूक करती है कि कोई हादसा न हो।
स्थानीय लोगों के अनुसार फफूंद रेलवे स्टेशन पर बने फुट ओवर ब्रिज पर बंदरों का जमावड़ा रहता है। महिलाएं और बच्चे इसी वजह से रेलवे लाइन पार करके जाना बेहतर समझते हैं। लोगों का कहना है कि यदि रेलवे स्टेशन के चारों ओर फेंसिंग लगा दी जाए तो यात्री बिना फुट ओवरब्रिज के प्लेटफार्म पर पहुंच ही नहीं पाएंगे। खुला होने से आराम से प्लेटफार्म तक आवागमन कर पाते हैं। उन्हें यही सहूलियत भरा लगता है। बंद हो चुकी रेलवे क्रासिंग पर लाइन पार करने के मामले में लोगों का कहना है कि रेलवे क्रासिंग बंद कर दी गई और रेलवे फ्लाईओवर भी बना दिया गया। पर फ्लाईओवर पर सीढ़ियां नहीं बनाईं गईं। यदि यात्री ट्रेन से उतरकर दिबियापुर के एक छोर से दूसरे छोर पर जाना चाहे तो लगभग दो किलोमीटर का चक्कर लगाकर जाना पड़ेगा।
विज्ञापन
रेलवे फ्लाईओवर बन जाने के कारण फफूंद रेलवे स्टेशन की क्रासिंग बंद हो चुकी है। परंतु लोग एक छोर से दूसरे छोर पर जाने के लिए अब भी रेलवे लाइन को पार करने से नहीं चूकते। सुबह मजदूरों की आवाजाही साफ देखी जा रही है। यहां से सैकड़ों मजदूर प्रतिदिन साइकिलों को इसी प्रकार से कंधे पर उठाकर गुजरते नजर आते हैं। इसे मजबूरी कहें या इनकी आदत, कोई खौफ नहीं है।
विज्ञापन
रेलवे स्टेशन फफूंद पर एक ट्रेन से उतरे कुछ यात्रियों को रेलवे लाइन पार कर रेलवे लाइन के किनारे वाले मुहल्ले में जाना है। बुजुर्ग महिला का हाथ पकड़कर दूसरी महिला ऐसे रेलवे लाइन पार कर रही है, जैसे वह रेलवे लाइन नहीं कोई आम रास्ता पार कर रही है। महिला को यह भान भी नहीं रहा कि इस रेलमार्ग पर ट्रेनें तेज गति से गुजरती हैं।
विज्ञापन
एक महिला एक हाथ से कान में मोबाइल लगाए बात करते हुए रेलवे लाइन पार कर रही है। जबकि दूसरे हाथ में अपने छोटे से बच्चे का हाथ पकड़े है। यह महिला इतनी बेफिक्र है कि रेलवे लाइन पार करते समय इधर उधर भी नहीं देखा और लाइन पार कर ली।
प्लेटफार्म संख्या चार पर कानपुर-टूंडला पैंसेंजर आकर रुकती है। इसी बीच एनाउंसमेंट होता है कि प्लेटफार्म संख्या 2 की रेलवे लाइन से तेज गति से वंदे भारत एक्सप्रेस गुजर रही है। कोई भी यात्री रेलवे लाइन पार न करे। वंदे भारत एक्सप्रेस स्टेशन के बिल्कुल नजदीक आ चुकी है। परंतु कई युवा स्टंट करते हुए एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर गए।
प्लेटफार्म संख्या 3 पर गोमती एक्सप्रेस आ चुकी है। ट्रेन के कोचों में बैठने के लिए सीट की जुगाड़ के लिए कई यात्री प्लेटफार्म के बजाय लाइन के किनारे खड़े होकर इंतजार कर रहे हैं। उन्हें यह भी आभास नहीं कि गोमती एक्सप्रेस के रुकने के बाद कोई दूसरी ट्रेन बगल वाली लाइन से तेज गति से गुजर सकती है और बड़ा हादसा हो सकता है।
कई यात्री को पूरे परिवार एवं सामान के साथ रेलवे लाइन पार करते नजर आते हैं। एक यात्री ने पहले अपने सामान को एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर पहुंचाया। इसके बाद पत्नी और बच्चों को भी रेलवे लाइन पार कराई। जबकि रेलवे लाइन पर सामान छूटने या फिर भारी सामान लेकर रेलवे लाइन पार करते समय बच्चे या महिला का पैर फंसने से बड़ा हादसा हो सकता है।
आरपीएफ थाना प्रभारी दिनेश कुमार का कहना है कि रेलवे लाइन पार करते पकड़े जाने पर रेलवे एक्ट की धारा 147 के तहत 6 माह तक की सजा या फिर 500 रुपया जुर्माना हो सकता है। सजा मजिस्ट्रेट पर निर्भर करती है। बताया कि प्रतिमाह 20 से 20 यात्रियों को रेलवे एक्ट की धारा 147 में पाबंद किया जाता है। रेलवे लाइन पार न करने को जागरूक करने के लिए समय-समय पर जागरुकता अभियान भी चलाया जाता है। वंदे भारत और राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों के गुजरते समय आरपीएफ फोर्स यात्रियों को जागरूक करती है कि कोई हादसा न हो।
स्थानीय लोगों के अनुसार फफूंद रेलवे स्टेशन पर बने फुट ओवर ब्रिज पर बंदरों का जमावड़ा रहता है। महिलाएं और बच्चे इसी वजह से रेलवे लाइन पार करके जाना बेहतर समझते हैं। लोगों का कहना है कि यदि रेलवे स्टेशन के चारों ओर फेंसिंग लगा दी जाए तो यात्री बिना फुट ओवरब्रिज के प्लेटफार्म पर पहुंच ही नहीं पाएंगे। खुला होने से आराम से प्लेटफार्म तक आवागमन कर पाते हैं। उन्हें यही सहूलियत भरा लगता है। बंद हो चुकी रेलवे क्रासिंग पर लाइन पार करने के मामले में लोगों का कहना है कि रेलवे क्रासिंग बंद कर दी गई और रेलवे फ्लाईओवर भी बना दिया गया। पर फ्लाईओवर पर सीढ़ियां नहीं बनाईं गईं। यदि यात्री ट्रेन से उतरकर दिबियापुर के एक छोर से दूसरे छोर पर जाना चाहे तो लगभग दो किलोमीटर का चक्कर लगाकर जाना पड़ेगा।