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जिला अस्पताल में मोतिया बिंद के मरीजों संख्या में हुआ इजाफा
Updated Thu, 27 Jul 2017 11:26 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
औरैया। गर्मी का सीजन आते ही मोतियाबिंद के मरीजों की संख्या बढ़ी है। हर रोज जिला अस्पताल पहुंचने वाले नेत्ररोगियों में दो-तीन मरीजों में इसकी शिकायत मिल रही है। अस्पताल में किसी सर्जन के न होने से मरीजों को निजी चिकित्सकों की शरण लेनी पड़ रही है, जिससे उनकी जेबों पर भार पड़ रहा है।
अस्पताल मेें दो महीने से आंख संबंधी बीमारी से ग्रसित मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। मई से अब तक कुल 30 मरीज इनमें ऐसे हैं, जो मोतियाबिंद की चपेट में हैं लेकिन जिला अस्पताल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए कोई स्थायी सर्जन नहीं है। इससे आपरेशन के लिए कानपुर से सर्जन को बुलाया जाता है। डाक्टर की मानें तो पिछले दस साल में अस्पताल में आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ 70 ऑपरेशन ही किए जा सके हैं।
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इस संबंध में नेत्ररोग विभाग के आर के वर्मा बताते हैं कि वातावरण में धूल के कण बहुत ज्यादा मात्रा में हैं। वाहनों के धुएं की वजह से पर्यावरण में प्रदूषण हो रहा है, जिससे लोगों में मोतियाबिंद की शिकायत बढ़ रही है। आरके वर्मा ने बताया कि लोग इस गलतफहमी में रहते हैं कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने के लिए सर्दी का इंतजार करना चाहिए। आपरेशन में देरी से इसका आकार बढ़ता जाता है। इससे आंखों की रोशनी जाने का खतरा बढ़ जाता है। मोतियाबिंद के मरीजों से अस्पताल प्रशासन की ओर से मोबाइल नंबर ले लिया जाता है। डॉ. आरके वर्मा फोन से शिविर की जानकारी मरीज को स्वयं देते हैं। सीएमएस डॉ. प्रमोद कटियार ने बताया कि सर्जन के लिए कई बार शासन को लिखा जा चुका है पर अभी तक नियुक्ति नहीं हुई है।
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-जिला अस्पताल में सर्जन नहीं, परेशान हो रहे हैं मरीज