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हस्तांतरण के छह माह बाद भी शुरू न हो सकी जिला पशु चिकित्सालय की रेफरल लैब
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औरैया। जिला पशु चिकित्सालय परिसर में पिछले छह माह से तैयार खड़ी रेफरल लैब विभाग को हस्तांतरित हो चुकी है। तकनीशियनों के न होने से आज तक इसका संचालन शुरू नहीं हो सका है। इससे पशु पालकों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। अहम बात यह है कि लैब में जरूरत के मुताबिक मशीनें लैब निर्माण से पहले ही आ गई थीं, जो अभी तक डिब्बों में ‘कैद’ हैं।
ब्लॉक स्थित जिला पशु चिकित्सालय परिसर में पशुओं में होने वाली बीमारियों की जांच के लिए रेफरल लैब का निर्माण कराया गया था। 34 लाख रुपये के बजट से तैयार इमारत को अब संचालन की दरकार है। अहम बात यह है कि शासन की ओर से लैब निर्माण से पूर्व ही उसमें होने वाली जांच के लिए उपयोग होने वाले मशीनरी की भी उपलब्धता करा दी गई थी, लेकिन संचालन शुरू न होने से यह डिब्बों में बंद हैं। चिकित्सकों की मानें तो इस लैब के शुरू होने से जांच के अभाव में जिले भर में उचित उपचार न मिलने से मरने वाले पशुओं के ग्राफ में कमी आएगी। वर्तमान में गाय, भैंस आदि के बछड़ों की मृत्यु दर जिले भर में लगभग 15 प्रतिशत है। बड़े जानवरों की मृत्यु दर सिर्फ दो प्रतिशत है। अब लैब के तैयार हो जाने से बीमारी से ग्रसित पशु के खून का सैंपल समय से बड़ी लैब में जांच को भेजा जा सकेगा, जिससे समय से ऑन लाइन रिपोर्ट आने पर पशु को सही इलाज मिल सकेगा। इस संबंध में डॉ. यतींद्र दीक्षित ने बताया कि जुलाई 2018 में उक्त लैब विभाग को हस्तांतरित कर दी गई थी। अब शासन से लैब संचालन के लिए लैब टेक्नीशियन, लैब इंचार्ज आदि स्टॉफ की दरकार है।
डिप्टी सीवीओ डॉ. एके सिंह ने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों में जिला पशु चिकित्सालय को एक रेफरल लैब की सौगात दी गई है। इसके बाद लैब का निर्माण को करा दिया गया लेकिन शासन से पद स्थापना न हो पाने के चलते किसी भी जिले में लैब संचालित नहीं हो सकी हैं। यह शासन स्तर का मामला है। फिलहाल जो लैब बनाई गई है वह रेफरल लैब है। यहां पर बीमार पशुओं का खून एकत्रित करके बड़ी लैब में जांच को भेजे जाने की व्यवस्था होगी। यहां केवल पेट में कीड़े आदि होने की ही जांच हो सकेगी। लगातार शासन को पत्राचार किया जा रहा है। जैसे ही शासन से पदस्थापना कर स्टॉफ मुहैया कराया जाएगा, लैब का संचालन शुरू हो जाएगा।
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-34 लाख रुपये के बजट से हुई है तैयार, बनने से पहले आए उपकरण डिब्बों की बढ़ा रहे शोभा
अमर उजाला ब्यूरो
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ब्लॉक स्थित जिला पशु चिकित्सालय परिसर में पशुओं में होने वाली बीमारियों की जांच के लिए रेफरल लैब का निर्माण कराया गया था। 34 लाख रुपये के बजट से तैयार इमारत को अब संचालन की दरकार है। अहम बात यह है कि शासन की ओर से लैब निर्माण से पूर्व ही उसमें होने वाली जांच के लिए उपयोग होने वाले मशीनरी की भी उपलब्धता करा दी गई थी, लेकिन संचालन शुरू न होने से यह डिब्बों में बंद हैं। चिकित्सकों की मानें तो इस लैब के शुरू होने से जांच के अभाव में जिले भर में उचित उपचार न मिलने से मरने वाले पशुओं के ग्राफ में कमी आएगी। वर्तमान में गाय, भैंस आदि के बछड़ों की मृत्यु दर जिले भर में लगभग 15 प्रतिशत है। बड़े जानवरों की मृत्यु दर सिर्फ दो प्रतिशत है। अब लैब के तैयार हो जाने से बीमारी से ग्रसित पशु के खून का सैंपल समय से बड़ी लैब में जांच को भेजा जा सकेगा, जिससे समय से ऑन लाइन रिपोर्ट आने पर पशु को सही इलाज मिल सकेगा। इस संबंध में डॉ. यतींद्र दीक्षित ने बताया कि जुलाई 2018 में उक्त लैब विभाग को हस्तांतरित कर दी गई थी। अब शासन से लैब संचालन के लिए लैब टेक्नीशियन, लैब इंचार्ज आदि स्टॉफ की दरकार है।
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डिप्टी सीवीओ डॉ. एके सिंह ने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों में जिला पशु चिकित्सालय को एक रेफरल लैब की सौगात दी गई है। इसके बाद लैब का निर्माण को करा दिया गया लेकिन शासन से पद स्थापना न हो पाने के चलते किसी भी जिले में लैब संचालित नहीं हो सकी हैं। यह शासन स्तर का मामला है। फिलहाल जो लैब बनाई गई है वह रेफरल लैब है। यहां पर बीमार पशुओं का खून एकत्रित करके बड़ी लैब में जांच को भेजे जाने की व्यवस्था होगी। यहां केवल पेट में कीड़े आदि होने की ही जांच हो सकेगी। लगातार शासन को पत्राचार किया जा रहा है। जैसे ही शासन से पदस्थापना कर स्टॉफ मुहैया कराया जाएगा, लैब का संचालन शुरू हो जाएगा।
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-34 लाख रुपये के बजट से हुई है तैयार, बनने से पहले आए उपकरण डिब्बों की बढ़ा रहे शोभा
अमर उजाला ब्यूरो