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दो साल से हादसों को दावत दे रहा उरई-राठ मार्ग
Updated Thu, 02 Aug 2018 12:06 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
उरई। उरई से मुहाना के बीच का करीब 22 किमी मार्ग दो साल से अधूरा पड़ा है। मार्ग पर छोटे-बड़े एक दर्जन से अधिक गड्ढेे हैं। बरसात में इनमें जलभराव होने से ये किसी छोटे से तालाब की तरह नजर आते हैं। इससे अक्सर हादसे का खतरा बना रहता है। रोड लाइट भी नहीं है। रही सही कसर आसपास की खदानें पूरी कर देती हैं। दिन और रात मौरंग से लदे ट्रक इस सड़क पर डोलते हुए चलते हैं। ओवरलोड वाहनों से पुलिया भी धंस चुकी है।
दो साल पहले सपा सरकार ने सड़क निर्माण शुरू कराया था। उस वक्त इसकी लागत करीब 121 करोड़ थी। सपा की सरकार गई तो फिर किसी ने भी अधूरे मार्ग को पूरा कराने की सुध नहीं ली। इससे हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। इस समस्या को तीन दिन पहले ही अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। इस पर पीडब्लूडी अधिकारियों ने भी सड़क की मरम्मत की बात कही थी।
घटना की सूचना पर जैसे अधिकारी वहां पहुंचे तो ग्रामीणों ने उन्हें घेरकर समस्या बतानी शुरू कर दी। इलाकाई लोगों का कहना है कि बरसात पर सड़क पर चलना खतरे से खाली नहीं रहता है। रोड पर करीब आधा दर्जन से अधिक गांव हैं लेकिन बारिश में उन्हें लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। कई बाइक सवार इन गड्ढों में अपने हाथ पैर भी तुड़वा चुके हैं।
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बारिश के कारण सड़क किनारे खंदक भी काफी भरे हुए थे। ऐसे में यदि आसपास के लोगों ने साहस दिखाते हुए खंदक में छलांग लगाकर सवारियों को निकाला न होता तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी। इलाके के देवेंद्र, मादौप्रसाद, शंकर, भूप सिंह लोधी, पप्पू आदि ने अपनी जान की परवाह न कर लोगों को बाहर निकला। मौत के मुहाने से लौटे यात्री उन्हें बार बार भगवान का दर्जा दे रहे थे।
हादसे में जो लोग घायल हुए उन्हें तो अस्पताल भेज दिया गया लेकिन जो सही सलामत थे, उनके चेहरों पर गड्ढ़ों का खौफ इस कदर था कि वे काफी देर तक उससे उबर नहीं पा रहे थे। अधिकांश सवारियां उरई की ही थीं, लिहाजा किसी को निजी वाहनों से तो किसी को रोडवेज बस से उरई तक छोड़ा गया, उस वक्त भी सभी पसीने पसीने नजर आ रहे थे।
-अमर उजाला ने तीन पहले ही प्रमुखता से छापी थी खबर
उरई। उरई से मुहाना के बीच का करीब 22 किमी मार्ग दो साल से अधूरा पड़ा है। मार्ग पर छोटे-बड़े एक दर्जन से अधिक गड्ढेे हैं। बरसात में इनमें जलभराव होने से ये किसी छोटे से तालाब की तरह नजर आते हैं। इससे अक्सर हादसे का खतरा बना रहता है। रोड लाइट भी नहीं है। रही सही कसर आसपास की खदानें पूरी कर देती हैं। दिन और रात मौरंग से लदे ट्रक इस सड़क पर डोलते हुए चलते हैं। ओवरलोड वाहनों से पुलिया भी धंस चुकी है।
दो साल पहले सपा सरकार ने सड़क निर्माण शुरू कराया था। उस वक्त इसकी लागत करीब 121 करोड़ थी। सपा की सरकार गई तो फिर किसी ने भी अधूरे मार्ग को पूरा कराने की सुध नहीं ली। इससे हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। इस समस्या को तीन दिन पहले ही अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। इस पर पीडब्लूडी अधिकारियों ने भी सड़क की मरम्मत की बात कही थी।
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घटना की सूचना पर जैसे अधिकारी वहां पहुंचे तो ग्रामीणों ने उन्हें घेरकर समस्या बतानी शुरू कर दी। इलाकाई लोगों का कहना है कि बरसात पर सड़क पर चलना खतरे से खाली नहीं रहता है। रोड पर करीब आधा दर्जन से अधिक गांव हैं लेकिन बारिश में उन्हें लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। कई बाइक सवार इन गड्ढों में अपने हाथ पैर भी तुड़वा चुके हैं।
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बारिश के कारण सड़क किनारे खंदक भी काफी भरे हुए थे। ऐसे में यदि आसपास के लोगों ने साहस दिखाते हुए खंदक में छलांग लगाकर सवारियों को निकाला न होता तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी। इलाके के देवेंद्र, मादौप्रसाद, शंकर, भूप सिंह लोधी, पप्पू आदि ने अपनी जान की परवाह न कर लोगों को बाहर निकला। मौत के मुहाने से लौटे यात्री उन्हें बार बार भगवान का दर्जा दे रहे थे।
हादसे में जो लोग घायल हुए उन्हें तो अस्पताल भेज दिया गया लेकिन जो सही सलामत थे, उनके चेहरों पर गड्ढ़ों का खौफ इस कदर था कि वे काफी देर तक उससे उबर नहीं पा रहे थे। अधिकांश सवारियां उरई की ही थीं, लिहाजा किसी को निजी वाहनों से तो किसी को रोडवेज बस से उरई तक छोड़ा गया, उस वक्त भी सभी पसीने पसीने नजर आ रहे थे।
-अमर उजाला ने तीन पहले ही प्रमुखता से छापी थी खबर