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अब मनरेगा में बकरी पालन योजना शुरु कराने की तैयारी
Updated Sun, 10 Sep 2017 11:23 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
औरैया। मनरेगा की योजनाएं फाइलों में कैद होकर रह गई हैं। अब एक-एक कर इन्हें जनता तक पहुंचाने के प्रयास हो रहे हैं। पहले दम तोड़ चुकी वर्मी कंपोस्ट योजना को शुरू किया गया, अब बकरी पालन को बढ़ावा देने वाली योजना में जान फूंकने की तैयारी है।
गांवों में लोग बकरी पालन कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकें, इसी उद्देश्य के साथ वर्ष 2011 में मनरेगा में नई योजना शामिल की गई थी। इच्छुक गरीबों को बकरी पालन के लिए शेड बनाकर दिया जाना था। सात साल तक इसका लाभ जिले में किसी को नहीं मिल सका। गरीबी उन्मूलन के लिहाज से बनी केंद्र सरकार की यह महत्वपूर्ण योजना पूरी तरह से बेदम हो गई।
कई सालों से फाइलों में दफन इस योजना को अब यहां जन-जन तक पहुंचाने की कवायद शुरू हो गई है।
हर गांव में एक लाभार्थी
शुरुआती दौर में हर गांव से एक लाभार्थी का चयन किया जा रहा है। इसके लिए जिले से सभी खंड विकास अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। अफसरों को अपने क्षेत्र में लाभार्थियों का चयन कर उन्हें लाभ दिलाने का आदेश दिया गया है। परियोजना निदेशक जेपी गौतम ने बताया कि योजना के तहत लाभार्थी को सिर्फ भूमि उपलब्ध करानी होगी। लाभार्थी की भूमि पर मनरेगा के तहत बकरी पालन के लिए शेड का निर्माण कराया जाएगा। इसमें करीब 35 हजार रुपये खर्च होंगे। यह सारा खर्च मनरेगा के बजट से किया जाएगा।
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औरैया। मनरेगा की योजनाएं फाइलों में कैद होकर रह गई हैं। अब एक-एक कर इन्हें जनता तक पहुंचाने के प्रयास हो रहे हैं। पहले दम तोड़ चुकी वर्मी कंपोस्ट योजना को शुरू किया गया, अब बकरी पालन को बढ़ावा देने वाली योजना में जान फूंकने की तैयारी है।
गांवों में लोग बकरी पालन कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकें, इसी उद्देश्य के साथ वर्ष 2011 में मनरेगा में नई योजना शामिल की गई थी। इच्छुक गरीबों को बकरी पालन के लिए शेड बनाकर दिया जाना था। सात साल तक इसका लाभ जिले में किसी को नहीं मिल सका। गरीबी उन्मूलन के लिहाज से बनी केंद्र सरकार की यह महत्वपूर्ण योजना पूरी तरह से बेदम हो गई।
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कई सालों से फाइलों में दफन इस योजना को अब यहां जन-जन तक पहुंचाने की कवायद शुरू हो गई है।
हर गांव में एक लाभार्थी
शुरुआती दौर में हर गांव से एक लाभार्थी का चयन किया जा रहा है। इसके लिए जिले से सभी खंड विकास अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। अफसरों को अपने क्षेत्र में लाभार्थियों का चयन कर उन्हें लाभ दिलाने का आदेश दिया गया है। परियोजना निदेशक जेपी गौतम ने बताया कि योजना के तहत लाभार्थी को सिर्फ भूमि उपलब्ध करानी होगी। लाभार्थी की भूमि पर मनरेगा के तहत बकरी पालन के लिए शेड का निर्माण कराया जाएगा। इसमें करीब 35 हजार रुपये खर्च होंगे। यह सारा खर्च मनरेगा के बजट से किया जाएगा।
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