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थानों के मालखानों में जंग खा रहे 108 लाइसेंसी असलाह

Sun, 29 Nov 2020 11:30 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 29 Nov 2020 11:30 PM IST
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108 licensee rustling in mines
औरैया। जिले भर के 10 थानों के मालखानों में लंबे अरसे से जमा असलाह मुकदमों के पेच में फंसे होने व पारिवारिक समस्याओं के चलते न उठाए जाने से जंग खा रहे हैं। जिले में सबसे पुराना 1983 की जमा बंदूक को स्वाभिमान के चलते नहीं उठाया गया।
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सालों से थाना-कोतवाली के मालखानों में जंग खा रहे लाइसेंसी असलाहों को संबंधित व्यक्ति द्वारा अभी तक न उठाए जाने से बेवजह पुलिस को इनकी रखवाली करनी पड़ रही है। औरैया जिले के थानों की बात करें तो पुलिस रिकार्ड में 1977 से लेकर पिछले कुछ सालों तक कुल 1699 असलाह मालखानों में जमा थे। जिसमें से 1591 ऐसे असलाह थे जो विरासत, फौती व निरस्त किए गए लाइसेंस के शामिल थे। इनमें ही 108 ऐसे असलाह हैं जिनके मामले न्यायालय में विचाराधीन व असलाह से संबंधित व्यक्ति के न रहने पर उसके पारिवारिक सदस्यों के रुचि न लेने के कारण जमा हैं।
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स्वाभिमान के चलते तत्कालीन प्रधान ने नहीं छुड़ाई बंदूक
पुराना असलाह बिधूना कोतवाली में 1983 में तत्कालीन पुर्वा दला गांव के प्रधान दुर्जन लाल पाल पुत्र पुत्तू लाल का जमा है। कोतवाली पुलिस ने बताया कि रिकार्ड में दर्ज अभिलेखों में अपराध संख्या 71/1983 के तहत दर्जन लाल पाल द्वारा लाइसेंसी बंदूक के नवीनीकरण में हुई अनदेखी के कारण तत्कालीन उपनिरीक्षक करन सिंह द्वारा रख-रखाव में लापरवाही किए जाने व समय पर लाइसेंस को नवीनीकरण न कराने का नोटिस दिया था। इसी बात को लेकर स्वाभिमान के चलते दुर्जन लाल पाल ने अपनी लाइसेंसी बंदूक (सिंगल बैरल गन) को कोतवाली में जमा की। लगभग दस साल बाद उनका निधन हो गया। दुर्जनपाल के दो पुत्र हैं। जिसमें वीरपाल बाहर नौकरी करता हैं। दूसरा छोटा पुत्र रविंद्र पाल किसानी करता है। रविंद्र ने बताया कि पिताजी ने अपने रहते जब बंदूक नहीं छुड़ाई तो उनके निधन के उपरांत हम लोगों ने कभी भी असलाह की जरूरत नहीं समझी।
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अधिकारी बोले
थानों के मालखानों में जमा असलाहों में अधिकांश गजईया हैं। जिनका उपयोग अब नहीं होता है। इसके अलावा जो लाइसेंसी असलाह हैं, उनमें अधिकांश मुकदमों से संबंधित हैं। जो न्यायालयों में विचाराधीन हैं। कुछ ऐसे असलाह भी हैं, जिनके लाइसेंसी की मृत्यु के उपरांत उनके परिजनों ने उठाने में कोई रुचि नहीं दिखाई।
-कमलेश दीक्षित, अपर पुलिस अधीक्षक, औरैया।
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