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Amroha News: बारिश से शहर में भरा पानी, फसल डूबने से किसान परेशान
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अमरोहा। बेमौसम बारिश ने किसानों को परेशान कर दिया है। शुक्रवार की सुबह करीब रुक-रुक कर चार घंटे झमाझम बारिश हुई। रात में तेज बारिश हुई। इससे खेतों में दोबारा से नमी बन गई। कई क्षेत्रों में बारिश तेज होने के कारण खेतों में पानी भर गया। कृषि अधिकारियों के मुताबिक गिरी हुई सरसों और गेहूं की फसल में नुकसान बढ़ सकता है। वही आम के बोर गलने की आशंका है। बारिश के कारण फसलों को कितना नुकसान हुआ हैं, इसका सर्वे करने के लिए टीमें गठित की जा चुकी है।
20 और 21 मार्च के बाद शुक्रवार की सुबह एक बार फिर मौसम बदल गया। गरज के साथ तेज हवाओं और झमाझम बारिश हुई। बेमौसम बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया। गनीमत रही कि हवा नहीं चली। खेतों में कटी पड़ी सरसों और गिरी पड़ी गेहूं की फसल में नुकसान बढ़ने का अनुमान हुआ है। बागों में आम का बौर झड़ गया है। बाकी बचा हुआ बौर गलने की कगार पर पहुंच गया है। विभागीय आंकड़ों की बात करें तो जनपद में 92 हेक्टेयर जमीन में गेहूं की फसल है। सरसों का रकबा 7 हजार हेक्टेयर है, जबकि आम के बाग 20 हजार हेक्टेयर में है। स्थिति ये है कि तीनों फसल से किसानों को काफी उम्मीदें थीं। लेकिन बेमौसम बारिश ने भारी नुकसान पहुंचा दिया है। जिला कृषि अधिकारी राजीव कुमार ने बताया कि पिछले दिनों गेहूं की फसल में 15 फीसदी का नुकसान सामने आया था। जबकि सरसों की फसल में 10 से 15 फीसदी और आम की फसल में करीब 20 फीसदी नुकसान होने का अनुमान था। लेकिन शुक्रवार की बारिश के बाद तीनों फसलों में नुकसान बढ़ सकता है। वहीं डीएम बीके त्रिपाठी के आदेश पर नुकसान का सर्वे करने के लिए टीमें गठित की गई हैं। जिला कृषि अधिकारी राजीव कुमार ने बताया कि 33 फीसदी से कम नुकसान पर सरकार की ओर से किसानों को मुआवजा नहीं मिलेगा। हां जनपद में करीब तीन हजार किसान ऐसे हैं जिन्होंने अपनी फसल का निजी कंपनियों से बीमा कराया हुआ है। ऐसे सभी किसानों का मुआवजा कंपनी देगी।
आज भी बारिश की संभावना
जिला कृषि अधिकारी राजवी कुमार ने बताया कि शनिवार को भी बारिश की संभावना बनी हुई हैं। वहीं मौसम में बदलाव के बाद तापमान में उतराव-चढ़ाव देखा जा रहा है। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 27 डिग्री और न्यूनतम तापमान 18 डिग्री रिकार्ड किया गया है।
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3 दिन में 48 एमएम हुई बारिश, टूटा 8 साल का रिकार्ड
जिला कृषि अधिकारी राजीव कुमार ने बताया कि मार्च के महीने में 3 दिन बारिश हुई है। जिसमें करीब 48 एमएम बारिश होना रिकॉर्ड किया गया है। ये आंकड़ा पिछले आठ सालों में सबसे अधिक है। इससे पहले वर्ष 2000 में 42.50 एमएम बारिश हुई थी। जबकि वर्ष 2016 में 15.99 एमएम, वर्ष 2017 में 16 एमएम बारिश हुई थी। जबकि शेष वर्षों में मार्च के महीने में बरसात नहीं हुई।
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20 और 21 मार्च के बाद शुक्रवार की सुबह एक बार फिर मौसम बदल गया। गरज के साथ तेज हवाओं और झमाझम बारिश हुई। बेमौसम बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया। गनीमत रही कि हवा नहीं चली। खेतों में कटी पड़ी सरसों और गिरी पड़ी गेहूं की फसल में नुकसान बढ़ने का अनुमान हुआ है। बागों में आम का बौर झड़ गया है। बाकी बचा हुआ बौर गलने की कगार पर पहुंच गया है। विभागीय आंकड़ों की बात करें तो जनपद में 92 हेक्टेयर जमीन में गेहूं की फसल है। सरसों का रकबा 7 हजार हेक्टेयर है, जबकि आम के बाग 20 हजार हेक्टेयर में है। स्थिति ये है कि तीनों फसल से किसानों को काफी उम्मीदें थीं। लेकिन बेमौसम बारिश ने भारी नुकसान पहुंचा दिया है। जिला कृषि अधिकारी राजीव कुमार ने बताया कि पिछले दिनों गेहूं की फसल में 15 फीसदी का नुकसान सामने आया था। जबकि सरसों की फसल में 10 से 15 फीसदी और आम की फसल में करीब 20 फीसदी नुकसान होने का अनुमान था। लेकिन शुक्रवार की बारिश के बाद तीनों फसलों में नुकसान बढ़ सकता है। वहीं डीएम बीके त्रिपाठी के आदेश पर नुकसान का सर्वे करने के लिए टीमें गठित की गई हैं। जिला कृषि अधिकारी राजीव कुमार ने बताया कि 33 फीसदी से कम नुकसान पर सरकार की ओर से किसानों को मुआवजा नहीं मिलेगा। हां जनपद में करीब तीन हजार किसान ऐसे हैं जिन्होंने अपनी फसल का निजी कंपनियों से बीमा कराया हुआ है। ऐसे सभी किसानों का मुआवजा कंपनी देगी।
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आज भी बारिश की संभावना
जिला कृषि अधिकारी राजवी कुमार ने बताया कि शनिवार को भी बारिश की संभावना बनी हुई हैं। वहीं मौसम में बदलाव के बाद तापमान में उतराव-चढ़ाव देखा जा रहा है। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 27 डिग्री और न्यूनतम तापमान 18 डिग्री रिकार्ड किया गया है।
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3 दिन में 48 एमएम हुई बारिश, टूटा 8 साल का रिकार्ड
जिला कृषि अधिकारी राजीव कुमार ने बताया कि मार्च के महीने में 3 दिन बारिश हुई है। जिसमें करीब 48 एमएम बारिश होना रिकॉर्ड किया गया है। ये आंकड़ा पिछले आठ सालों में सबसे अधिक है। इससे पहले वर्ष 2000 में 42.50 एमएम बारिश हुई थी। जबकि वर्ष 2016 में 15.99 एमएम, वर्ष 2017 में 16 एमएम बारिश हुई थी। जबकि शेष वर्षों में मार्च के महीने में बरसात नहीं हुई।