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Amroha News: कागजों में फिट होकर सड़कों पर दौड़ रहे वाहन, बन रहे हादसों का कारण
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अमरोहा। परिवहन विभाग और यातायात पुलिस के जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण जुगाड़ व अनफिट वाहन कागजों में फिट होकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं जो हादसे का कारण बनते हैं। मानकों के विपरीत दौड़ रहे इन वाहनों पर कार्रवाई भी नहीं हो पाती है।
बिना फिटनेस सड़कों पर चल रहे वाहनों के कारण लगातार हादसे हो रहे हैं। पलभर में जिंदगी मौत के मुंह में समा जाती है। दोपहिया से लेकर बड़े वाहनों तक के फिटनेस के लिए मानक तय किए गए हैं लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही व वाहन मालिकों की मनमानी के चलते मानक पूरे नहीं होते। सांठगांठ कर ऐसे कई वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है। जिम्मेदार 20-20 साल पुराने वाहनों कागजों में दुरुस्त दिखा दिया जाता हैं।
ऐसे जुगाड़ व खटारा वाहन जब सड़कों पर तेज रफ्तार में दौड़ते हैं तो कभी ब्रेक फेल या असंतुलित होकर पलटने की वजह से हादसे हो जाते हैं। वहीं, हादसों के लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी नहीं की जाती है। 18 जुलाई को हसनपुर-गजरौला रोड पर स्कूल वैन और पिकअप का हादसा ऐसी ही लापरवाही का नतीजा है। स्कूल वैन की फिटनेस थी या नहीं इस पर सबका ध्यान गया। लेकिन, पिकअप के मानक पूरे थे, इस ओर किसी का ध्यान नहीं था।
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बाइक से लेकर कार तक नो फिटनेस
बड़े कामर्शियल वाहनों की तो फिटनेस चेकिंग कभी-कभार की जाती है लेकिन बाइक से लेकर कार तक कोई फिटनेस चेक नहीं करता। शहर की कोई ऐसी सड़क नहीं होगी जिसमें खस्ताहाल और अवैध गैस किट लगी स्कूली वाहन न दौड़ रहे हो, लेकिन यातायात विभाग और परिवहन की ओर से सबकुछ जानते हुए भी इसे अनदेखा कर दिया जाता है। जो कई बार नौनिहालों की जीवन पर भारी पड़ जाता है।
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ट्रैक्टर और ट्रक पर नहीं लगते रिफ्लेक्टर
रात के अंधेरे में हादसों को रोकने के लिए रिफ्लेक्टर लगाना अनिवार्य है ताकि सामने वाले वाहन से खुद को बचाया जा सके। रिफ्लेक्टर लगवाने का जिम्मा यातायात व परिवहन विभाग का होता है। इसके लिए बाकायदा कानून भी है। इसका उपयोग नहीं करने वालों पर एमवी एक्ट के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए लेकिन इसके नाम पर यदाकदा अभियान चलाकर खानापूर्ति कर ली जाती है। अधिकांश वाहनों पर रिफ्लेक्टर दिखाई नहीं देते।
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भार ढोने में ज्यादा उपयोग हो रहे ट्रैक्टर
ट्रैक्टर का वैसे तो उपयोग कृषि कार्य में किया जाना चाहिए लेकिन आजकल इससे ज्यादा इसका उपयोग भार ढोने में किया जा रहा है। ओवरलोड ट्रैक्टर सड़कों पर आसानी से फर्राटा भरते दिखाई नजर आ जाएंगे। मामला किसानों से जुड़े होने के कारण ट्रैक्टर चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस तक चेक नहीं किए जाते हैं जबकि करीब 90 फीसदी ट्रैक्टर चलाने वालों पर लाइसेंस नहीं होता है। जिम्मेदार भी इस ओर कोई ध्यान नहीं देते। यही कारण है कि हाईवे पर आए दिन ट्रैक्टर-ट्राॅली की वजह से हादसे होते रहते हैं।
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बिना फिटनेस सड़कों पर चल रहे वाहनों के कारण लगातार हादसे हो रहे हैं। पलभर में जिंदगी मौत के मुंह में समा जाती है। दोपहिया से लेकर बड़े वाहनों तक के फिटनेस के लिए मानक तय किए गए हैं लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही व वाहन मालिकों की मनमानी के चलते मानक पूरे नहीं होते। सांठगांठ कर ऐसे कई वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है। जिम्मेदार 20-20 साल पुराने वाहनों कागजों में दुरुस्त दिखा दिया जाता हैं।
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ऐसे जुगाड़ व खटारा वाहन जब सड़कों पर तेज रफ्तार में दौड़ते हैं तो कभी ब्रेक फेल या असंतुलित होकर पलटने की वजह से हादसे हो जाते हैं। वहीं, हादसों के लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी नहीं की जाती है। 18 जुलाई को हसनपुर-गजरौला रोड पर स्कूल वैन और पिकअप का हादसा ऐसी ही लापरवाही का नतीजा है। स्कूल वैन की फिटनेस थी या नहीं इस पर सबका ध्यान गया। लेकिन, पिकअप के मानक पूरे थे, इस ओर किसी का ध्यान नहीं था।
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बाइक से लेकर कार तक नो फिटनेस
बड़े कामर्शियल वाहनों की तो फिटनेस चेकिंग कभी-कभार की जाती है लेकिन बाइक से लेकर कार तक कोई फिटनेस चेक नहीं करता। शहर की कोई ऐसी सड़क नहीं होगी जिसमें खस्ताहाल और अवैध गैस किट लगी स्कूली वाहन न दौड़ रहे हो, लेकिन यातायात विभाग और परिवहन की ओर से सबकुछ जानते हुए भी इसे अनदेखा कर दिया जाता है। जो कई बार नौनिहालों की जीवन पर भारी पड़ जाता है।
ट्रैक्टर और ट्रक पर नहीं लगते रिफ्लेक्टर
रात के अंधेरे में हादसों को रोकने के लिए रिफ्लेक्टर लगाना अनिवार्य है ताकि सामने वाले वाहन से खुद को बचाया जा सके। रिफ्लेक्टर लगवाने का जिम्मा यातायात व परिवहन विभाग का होता है। इसके लिए बाकायदा कानून भी है। इसका उपयोग नहीं करने वालों पर एमवी एक्ट के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए लेकिन इसके नाम पर यदाकदा अभियान चलाकर खानापूर्ति कर ली जाती है। अधिकांश वाहनों पर रिफ्लेक्टर दिखाई नहीं देते।
भार ढोने में ज्यादा उपयोग हो रहे ट्रैक्टर
ट्रैक्टर का वैसे तो उपयोग कृषि कार्य में किया जाना चाहिए लेकिन आजकल इससे ज्यादा इसका उपयोग भार ढोने में किया जा रहा है। ओवरलोड ट्रैक्टर सड़कों पर आसानी से फर्राटा भरते दिखाई नजर आ जाएंगे। मामला किसानों से जुड़े होने के कारण ट्रैक्टर चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस तक चेक नहीं किए जाते हैं जबकि करीब 90 फीसदी ट्रैक्टर चलाने वालों पर लाइसेंस नहीं होता है। जिम्मेदार भी इस ओर कोई ध्यान नहीं देते। यही कारण है कि हाईवे पर आए दिन ट्रैक्टर-ट्राॅली की वजह से हादसे होते रहते हैं।