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फिर मरे दो बंदर कई दूसरे बीमार
ब्यूरो अमर उजाला/अमरोहा।
Updated Tue, 03 Apr 2018 01:30 AM IST
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- फोटो : demo pic
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ढबारसी में बंदरों की मौत रुकने का नाम नहीं ले रही है। सोमवार को फिर दो बंदरों की मौत हो गई जबकि, दर्जनों बंदर बीमार चल रहे हैं। बीमार बंदर कब दम तोड़ दें, कहा नहीं जा सकता। तमाम कोशिशों के बाद भी बंदरों की मौत पर लगाम नहीं लगाया जा सका है।
सोमवार को ढबारसी में सुबह एक बंदर का शव पड़ा मिला। दोपहर होने तक दो बंदरों की मौत हो गई। वहीं दर्जनों बंदर अभी भी जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। गौरतलब है कि पिछले बारह दिनों से ढबारसी में बंदरों की लगातार मौत हो रही है। अब तक डेढ़ सौ से ज्यादा बंदर मौत की नींद सो चुके हैं। मंगलवार को यहां पर एक बंदर का पोस्टमार्टम किया गया था। जिसका विसरा सुरक्षित करते हुए आईवीआरई बरेली भेजा गया। बरेली के वैैैज्ञानिकों ने बंदरों की मौत जहर से होने की बात पुख्ता कर दी। यानी ढबारसी में बंदरों को जहर देकर मारा जा रहा है। डाक्टरों का मानना है कि धीमा जहर बंदरों को दिया गया है। जिसके चलते बंदर बीमार पड़ने के बाद दम तोड़ रहे हैं। एक बंदर के पोस्टमार्टम के बाद से ही बीमार बंदरो का इलाज शुरू कर दिया गया। इलाज से भी बंदरों को कोई राहत नहीं मिल रही है। इलाज के बाद भी बंदरों की मौत जारी है।
डाक्टर गांव में डटे हुए हैं जोकि, बंदरों का इलाज कर रहे हैं। बीमार बंदरों के लिए गांव में ग्लूकोज के टब भरकर रखे गए थे। वहीं खान पान का इंतजाम भी किया जा रहा है। इसके अलावा इंजेक्शन सहित तमाम दवाईयां बंदरों को दी जा रही है। फिर भी बंदरों की मौत नहीं रुक रही है।
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सोमवार को ढबारसी में सुबह एक बंदर का शव पड़ा मिला। दोपहर होने तक दो बंदरों की मौत हो गई। वहीं दर्जनों बंदर अभी भी जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। गौरतलब है कि पिछले बारह दिनों से ढबारसी में बंदरों की लगातार मौत हो रही है। अब तक डेढ़ सौ से ज्यादा बंदर मौत की नींद सो चुके हैं। मंगलवार को यहां पर एक बंदर का पोस्टमार्टम किया गया था। जिसका विसरा सुरक्षित करते हुए आईवीआरई बरेली भेजा गया। बरेली के वैैैज्ञानिकों ने बंदरों की मौत जहर से होने की बात पुख्ता कर दी। यानी ढबारसी में बंदरों को जहर देकर मारा जा रहा है। डाक्टरों का मानना है कि धीमा जहर बंदरों को दिया गया है। जिसके चलते बंदर बीमार पड़ने के बाद दम तोड़ रहे हैं। एक बंदर के पोस्टमार्टम के बाद से ही बीमार बंदरो का इलाज शुरू कर दिया गया। इलाज से भी बंदरों को कोई राहत नहीं मिल रही है। इलाज के बाद भी बंदरों की मौत जारी है।
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डाक्टर गांव में डटे हुए हैं जोकि, बंदरों का इलाज कर रहे हैं। बीमार बंदरों के लिए गांव में ग्लूकोज के टब भरकर रखे गए थे। वहीं खान पान का इंतजाम भी किया जा रहा है। इसके अलावा इंजेक्शन सहित तमाम दवाईयां बंदरों को दी जा रही है। फिर भी बंदरों की मौत नहीं रुक रही है।
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