फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Amroha News ›   train track fracture

खतरे की घंटी, दस किमी की दूरी में दस रेल फ्रैक्चर

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 16 Dec 2019 11:42 PM IST
विज्ञापन
train track fracture
अमरोहा। सर्दियों में पटरियों का चटकना कोई नई बात नहीं है, लेकिन दस किमी की दूरी में दस जगह रेल फ्रैक्चर की घटनाएं चिंता का विषय जरूर है। अमरोहा और कैलसा रेलवे स्टेशन के बीच महज 13 दिनों के भीतर दस जगह पटरियां चटक चुकी हैं। ये सभी रेल फ्रैक्चर तीन दिसंबर से 16 दिसंबर के बीच हुए हैं। ऐसे में जर्जर ट्रैक कभी भी कोई बढ़ा हादसा करा सकते हैं।
विज्ञापन

बढ़ती सर्दी रेलवे के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। दिसंबर में दिन और रात के तापमान में अंतर आ गया है। दिसंबर के 15 दिनों में अधिकतम तापमान में 20 से 25 डिग्री के आसपास रहा। जबकि न्यूनतम तापमान नौ डिग्री से 15 डिग्री के बीच रहा। वहीं ये दिन रात के तापमान का अंतर रेलवे के लिए मुसीबत बन गया है। दिसंबर के 15 दिनों में मुरादाबाद से गजरौला के बीच 12 से अधिक स्थानों पर पटरियां चटक चुकी हैं। वहीं अमरोहा और कैलसा स्टेशन के बीच की दूरी करीब दस किमी है। अकेले इस दस किमी की दूरी में दस रेल फ्रैक्चर हुए। ये सभी दस रेल फ्रैक्चर 13 दिनों में अप और डाउन दोनों लाइन पर हुए हैं। दस किमी की दूरी में दस जगह पटरी टूटने की घटना से अधिकारियों में हड़कंप मचा है। हालांकि रेलवे अधिकारी सर्दियों में रेल फ्रैक्चर की घटना को सामान्य मानते हैं। फिर भी बढ़ती पटरी चटकने की घटनाओं से अधिकारियों में हलचल मची हुई है।
विज्ञापन

13 दिन में हुए दस रेल फ्रैक्चर
तीन दिसंबर को अमरोहा कैलसा के बीच
चार दिसंबर को कैलसा के पास
पांच दिसंबर को अमरोहा कैलसा के बीच
छह दिसंबर अमरोहा कैलसा के बीच
आठ दिसंबर को अमरोहा कैलसा के बीच तीन तीन रेल फ्रैक्चर
13 दिसंबर को अमरोहा के पास
15 दिसंबर को अमरोहा कैलसा के बीच अप लाइन में किमी संख्या 29/15 पर
15 दिसंबर को अमरोहा कैलसा के बीच डाउन लाइन में किमी 29/17 पर
सर्दियों में सिकुड़ने लगती है पटरियां
अमरोहा। सर्दियों में पटरियां सिकुड़ने लगती है। इसके चलते पटरियां टाइट हो जाती है। इस दौरान पटरियों से ट्रेन के गुजरने पर वह चटक जाती है। जबकि गर्मियों में पटरियां अपनी पुरानी अवस्था में पहुंच जाती है। यही वजह है कि पटरियों के बीच ज्वाइंट वाले जगह पर कुछ गैप छोड़ा जाता है। ताकि पटरियों के फैलने और सिकुड़ने से कोई दिक्कत न हो।
विज्ञापन
विज्ञापन

सर्दियों में बढ़ा दी जाती है ट्रैक की निगरानी
अमरेाहा। वैसे तो ट्रैक की पेट्रोलिंग साल भर चलती रहती है। गर्मी हो या बरसात या फिर सर्दी, हर मौसम में नजर रखी जाती है, लेकिन सर्दियों की शुरुआत में पेट्रोलिंग बढ़ा दी जाती है। ट्रैक मैन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। कहीं भी संदेह होने पर वह तत्काल कंट्रोल रूम को सूचना देते हैं। ऐसे ही गर्मियों के शुरू होने पर पेट्रोलिंग बढ़ा दी जाती है।
ये बनते हैं रेल फैक्चर के कारण
मौसम
ट्रैक मैन की कमी
ओवरलोड ट्रैक
मेंटेनेंस की कमी
कर्मचारी की कमी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed