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Amroha News: समय के साथ बदलीं परंपराएं, ढोल-बम की आवाजें अब खामोश

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 03 Mar 2026 12:36 AM IST
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Traditions have changed with time, the sounds of drums and bombs are now silent.
अमरोहा। समय के साथ होली मनाने का तरीका बदल गया है। डीजे की धुन में पारंपरिक होली के बम और गीत गुम हो गए हैं। करीब 30 साल पहले जैसा उत्साह और प्रेम अब कम नजर आता है।
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पहले लोग कई दिन पहले से ही होली की तैयारियां शुरू कर देते थे। उस दौर में लोगों के बीच गहरा प्रेम और सौहार्द दिखाई देता था। गांव-गांव बम की आवाजें गूंजती थीं। एक-दूसरे के घर जाकर रंग-गुलाल लगाना आम बात थी। गांवों में युवाओं की टोलियां निकलती थीं और हर किसी को रंग में रंग देती थीं।
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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी ने लोगों की दिनचर्या बदल दी है। इसके चलते त्योहार मनाने के ढंग में भी परिवर्तन आया है। बुजुर्गों से बात करने पर उनके अंदर बीते समय का दर्द साफ झलकता है। वह कहते हैं कि उनके जमाने में होली का आनंद ही कुछ और था। अब लोग केवल परंपरा का निर्वाह कर रहे हैं।
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करीब 30 साल पहले होली का उत्साह कई दिन पहले से शुरू हो जाता था। लोग एक-दूसरे के घरों में जाकर रंग और गुलाल लगाते थे। उस समय समाज में प्रेम और भाईचारा स्पष्ट रूप से दिखाई देता था। गांवों में युवा टोलियां बनाकर सबको रंगने निकल पड़ते थे। लोग छोटी बातों पर नाराज हो जाते हैं। कई लोग घर के बाहर या परिवार तक सीमित रहकर होली मनाते हैं। संवाद
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