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जिया नहीं तो झाड़ियों में फेंका ‘घर का चिराग’
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Sat, 24 Dec 2016 11:43 PM IST
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पुलिस के मुताबिक हमीरपुर के सनेडी निवासी देशराज (35) पिछले तीन सालों से बागवानियां के पास नालका गांव में किराये के मकान में रहता था। देशराज यहां पर अकेले रहता था तथा उसकी पत्नी और एक बच्ची भी है जो उसके गांव में रहती है। दिन में जूते का कारोबार करने के अलावा वह सुबह शाम कबाड़ का कार्य भी करता था। नालका गांव में मिला था शव- 5 मार्च को कुछ लोगों ने देशराज का शव नालका गांव के जाने वाले रास्ते से कुछ दूर खेत में पड़ा देखा। लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची ओर शव को कब्जे में लिया। सनेड़ पंचायत के प्रधान धरेंद्र सिंह ने बताया कि देशराज 2 मार्च से लापता था। हर रोज बागवानियां अपने काम पर आता था। लेकिन जब दो दिन से नहीं दिखाई दिया तो उसके परिचित लोगों ने उसकी खोजबीन की जिस पर उन्हें इसका शव खेतों में मिला। पंचायत प्रधान ने बताया कि मृतक व्यक्ति शराब पीने का भी आदी था।
- फोटो : Demo Pic
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मृतक का अंतिम संस्कार समाज में पुण्य कार्य और मृतक का अधिकार माना जाता है है। इस लिहाज से लावारिस का भी अंतिम संस्कार का नियम बनाया गया है, मगर हसनपुर तहसील क्षेत्र में हैरान करने वाला मामला सामने आया है।
यहां एक निर्दयी पिता ने जन्म के बाद उसका शिशु नहीं जिया तो घर के चिराग को बगैर अंतिम संस्कार के अस्पताल के बाहर झाड़ियों में फेंक दिया। मामला खुला तो सनसनी फैल गई। बाद में सीएचसी रहरा की झाड़ियों में मिले नवजात के शव को पुलिस ने परिजनों को सौंपा। इसके बाद मृतक को दफनाया गया।
क्षेत्र के गांव शकरगड़ी में ईंट भट्ठा पर बिहार निवासी नबूद का परिवार मजदूरी करता है। बताया जाता है कि नबूद की पत्नी सुखना देवी को शुक्रवार शाम को प्रसव पीड़ा हुई थी। इस दौरान उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रहरा में भर्ती कराया गया। देर रात को सुखना ने दो बेटों को जन्म दिया, जिसमें से एक की मौत हो गई।
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शनिवार सुबह को नबूद पत्नी सुखना और दोनों बच्चों को लेकर यहां से निकला था, लेकिन सुबह करीब दस बजे कुछ लोगों ने एक नवजात का शव अस्पताल के बाहर झाड़ियों में देखा तो होश उड़ गए। सूचना पर पुलिस पहुंच गई।
पूछताछ का पता चला कि, मृत बच्चा नबूद का ही था। पुलिस ईंट भट्ठे पर पहुंच गई और परिजनों से पूछताछ की तो उसनेे पूरी बात बता दी। इसके बाद परिजन बच्चे के शव को झाड़ी से उठाकर लाए और दफनाया गया। चौकी इंचार्ज सुनील कुमार ने बताया कि नवजात के शव को झाड़ियों में फेंकने वाले परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है।
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यहां एक निर्दयी पिता ने जन्म के बाद उसका शिशु नहीं जिया तो घर के चिराग को बगैर अंतिम संस्कार के अस्पताल के बाहर झाड़ियों में फेंक दिया। मामला खुला तो सनसनी फैल गई। बाद में सीएचसी रहरा की झाड़ियों में मिले नवजात के शव को पुलिस ने परिजनों को सौंपा। इसके बाद मृतक को दफनाया गया।
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क्षेत्र के गांव शकरगड़ी में ईंट भट्ठा पर बिहार निवासी नबूद का परिवार मजदूरी करता है। बताया जाता है कि नबूद की पत्नी सुखना देवी को शुक्रवार शाम को प्रसव पीड़ा हुई थी। इस दौरान उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रहरा में भर्ती कराया गया। देर रात को सुखना ने दो बेटों को जन्म दिया, जिसमें से एक की मौत हो गई।
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शनिवार सुबह को नबूद पत्नी सुखना और दोनों बच्चों को लेकर यहां से निकला था, लेकिन सुबह करीब दस बजे कुछ लोगों ने एक नवजात का शव अस्पताल के बाहर झाड़ियों में देखा तो होश उड़ गए। सूचना पर पुलिस पहुंच गई।
पूछताछ का पता चला कि, मृत बच्चा नबूद का ही था। पुलिस ईंट भट्ठे पर पहुंच गई और परिजनों से पूछताछ की तो उसनेे पूरी बात बता दी। इसके बाद परिजन बच्चे के शव को झाड़ी से उठाकर लाए और दफनाया गया। चौकी इंचार्ज सुनील कुमार ने बताया कि नवजात के शव को झाड़ियों में फेंकने वाले परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है।