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Amroha News: वाहनों की फिटनेस जांच के लिए अमरोहा में बनेंगे तीन एटीएस
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अमरोहा। वाहनों की फिटनेस जांच में पारदर्शिता और सुविधा बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार ने स्वचालित परीक्षण स्टेशन (एटीएस) की स्थापना व संचालन की नई नीति लागू की है। इसके तहत प्रत्येक जिले में कम से कम तीन एटीएस स्थापित करना जरूरी होगा। यहां वाहनों की फिटनेस जांच स्वचालित प्रक्रिया से होगी और फोटो-वीडियो भी सुरक्षित रखे जाएंगे।
अपर मुख्य सचिव परिवहन अर्चना अग्रवाल के निर्देश पर वर्ष 2023 की एटीएस नीति समाप्त कर केंद्र के संशोधित नियमों के अनुरूप नई व्यवस्था लागू की गई है। इच्छुक आवेदक नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (एनएसडब्ल्यूएस) पोर्टल से 24 घंटे आवेदन कर सकेंगे।
परिवहन आयुक्त की रिपोर्ट के आधार पर अमरोहा समेत 36 जिलों को प्रथम चरण में प्राथमिकता वाले जिलों में शामिल किया गया है। इन जिलों में या तो आवेदन नहीं मिले या प्राप्त आवेदन पात्र नहीं पाए गए। सूची में पीलीभीत, बदायूं, संभल, शामली, कासगंज, ललितपुर, हरदोई, अमेठी, बहराइच, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर समेत अन्य जिले शामिल हैं। इन जिलों के आवेदनों की पहले जांच होगी।
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एक लेन पर साल में 12 हजार वाहनों की जांच
शासन ने एटीएस की अधिकतम संख्या तय करने के लिए क्षमता का फार्मूला भी निर्धारित किया है। एक वाहन की फिटनेस जांच में औसतन 15 मिनट लगने के आधार पर एक लेन से प्रतिदिन 40 वाहनों और माह में करीब एक हजार वाहनों की जांच मानी गई है। इस तरह एक लेन से साल में करीब 12 हजार और दो लेन से 24 हजार वाहनों की फिटनेस जांच हो सकेगी। इसी क्षमता के आधार पर जिले में एटीएस की अधिकतम संख्या निर्धारित की जाएगी।
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दस साल की लीज और पांच लाख की बैंक गारंटी
एटीएस के लिए आवेदक के पास निर्धारित भूमि का स्वामित्व होना चाहिए। किराये या पट्टे की भूमि होने पर न्यूनतम 10 वर्ष की अवधि का पट्टा जरूरी होगा। एक आवेदक को एक जिले में एक ही एटीएस स्थापित करने की अनुमति होगी। किसी व्यक्ति या संस्था को प्रदेश में अधिकतम तीन एटीएस स्थापित करने की अनुमति होगी। आरसी के लिए आवेदन करते समय परिवहन आयुक्त के पक्ष में पांच लाख रुपये की बैंक गारंटी भी देनी होगी।
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फोटो-वीडियो से होगी जांच की निगरानी
एटीएस संचालक को वाहन की आगे, पीछे, दाएं और बाएं हिस्से की जियो-टैग तस्वीरें तथा कम से कम 10 सेकंड का जियो-टैग वीडियो केंद्रीय मोबाइल एप के जरिए अपलोड करना होगा। जांच के फोटो, वीडियो और अन्य परीक्षण आंकड़े कम से कम छह महीने तक सुरक्षित रखने होंगे। एटीएस की प्रत्येक छह महीने में संपरीक्षा होगी।
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अमरोहा में वाहन मालिका को मिल सकती है सुविधा
अमरोहा को प्राथमिकता वाले जिलों में शामिल किए जाने से यहां नए स्वचालित परीक्षण स्टेशन स्थापित होने का रास्ता साफ हुआ है। जिले में वाहनों की फिटनेस जांच के लिए नए केंद्र बनने से वाहन मालिकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुविधा मिलने की उम्मीद है। शासन ने स्पष्ट किया है कि पात्र आवेदनों का चयन पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा।
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प्रदेश के प्रत्येक जिले में अधिकतम तीन एटीएस सेंटर खोले जा सकेंगे। प्रत्येक सेंटर पर सालाना करीब 24 हजार वाहनों की जांच की जा सकेगी। सेंटर स्थापित करने के लिए जमीन की न्यूनतम सीमा 2.5 एकड़ से घटाकर एक एकड़ कर दी गई है। साथ ही संचालक के लिए छह करोड़ रुपये नेटवर्थ की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है। नए सेंटरों को व्यवस्था सुचारु करने के लिए छह महीने तक कुछ कार्रवाई में छूट का प्रावधान किया गया है।
-मनोज मिश्रा, एआरटीओ
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अपर मुख्य सचिव परिवहन अर्चना अग्रवाल के निर्देश पर वर्ष 2023 की एटीएस नीति समाप्त कर केंद्र के संशोधित नियमों के अनुरूप नई व्यवस्था लागू की गई है। इच्छुक आवेदक नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (एनएसडब्ल्यूएस) पोर्टल से 24 घंटे आवेदन कर सकेंगे।
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परिवहन आयुक्त की रिपोर्ट के आधार पर अमरोहा समेत 36 जिलों को प्रथम चरण में प्राथमिकता वाले जिलों में शामिल किया गया है। इन जिलों में या तो आवेदन नहीं मिले या प्राप्त आवेदन पात्र नहीं पाए गए। सूची में पीलीभीत, बदायूं, संभल, शामली, कासगंज, ललितपुर, हरदोई, अमेठी, बहराइच, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर समेत अन्य जिले शामिल हैं। इन जिलों के आवेदनों की पहले जांच होगी।
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एक लेन पर साल में 12 हजार वाहनों की जांच
शासन ने एटीएस की अधिकतम संख्या तय करने के लिए क्षमता का फार्मूला भी निर्धारित किया है। एक वाहन की फिटनेस जांच में औसतन 15 मिनट लगने के आधार पर एक लेन से प्रतिदिन 40 वाहनों और माह में करीब एक हजार वाहनों की जांच मानी गई है। इस तरह एक लेन से साल में करीब 12 हजार और दो लेन से 24 हजार वाहनों की फिटनेस जांच हो सकेगी। इसी क्षमता के आधार पर जिले में एटीएस की अधिकतम संख्या निर्धारित की जाएगी।
दस साल की लीज और पांच लाख की बैंक गारंटी
एटीएस के लिए आवेदक के पास निर्धारित भूमि का स्वामित्व होना चाहिए। किराये या पट्टे की भूमि होने पर न्यूनतम 10 वर्ष की अवधि का पट्टा जरूरी होगा। एक आवेदक को एक जिले में एक ही एटीएस स्थापित करने की अनुमति होगी। किसी व्यक्ति या संस्था को प्रदेश में अधिकतम तीन एटीएस स्थापित करने की अनुमति होगी। आरसी के लिए आवेदन करते समय परिवहन आयुक्त के पक्ष में पांच लाख रुपये की बैंक गारंटी भी देनी होगी।
फोटो-वीडियो से होगी जांच की निगरानी
एटीएस संचालक को वाहन की आगे, पीछे, दाएं और बाएं हिस्से की जियो-टैग तस्वीरें तथा कम से कम 10 सेकंड का जियो-टैग वीडियो केंद्रीय मोबाइल एप के जरिए अपलोड करना होगा। जांच के फोटो, वीडियो और अन्य परीक्षण आंकड़े कम से कम छह महीने तक सुरक्षित रखने होंगे। एटीएस की प्रत्येक छह महीने में संपरीक्षा होगी।
अमरोहा में वाहन मालिका को मिल सकती है सुविधा
अमरोहा को प्राथमिकता वाले जिलों में शामिल किए जाने से यहां नए स्वचालित परीक्षण स्टेशन स्थापित होने का रास्ता साफ हुआ है। जिले में वाहनों की फिटनेस जांच के लिए नए केंद्र बनने से वाहन मालिकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुविधा मिलने की उम्मीद है। शासन ने स्पष्ट किया है कि पात्र आवेदनों का चयन पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा।
प्रदेश के प्रत्येक जिले में अधिकतम तीन एटीएस सेंटर खोले जा सकेंगे। प्रत्येक सेंटर पर सालाना करीब 24 हजार वाहनों की जांच की जा सकेगी। सेंटर स्थापित करने के लिए जमीन की न्यूनतम सीमा 2.5 एकड़ से घटाकर एक एकड़ कर दी गई है। साथ ही संचालक के लिए छह करोड़ रुपये नेटवर्थ की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है। नए सेंटरों को व्यवस्था सुचारु करने के लिए छह महीने तक कुछ कार्रवाई में छूट का प्रावधान किया गया है।
-मनोज मिश्रा, एआरटीओ