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Amroha News: अबकी आम आदमी की पहुंच में होगा आम
Tue, 08 Apr 2025 01:58 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Tue, 08 Apr 2025 01:58 AM IST
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अमरोहा आम के बाद में पड़े पर लगी अमिया। संवाद
अमरोहा। आम के शौकिनों के लिए यह अच्छी खबर है। पेड़ों पर लदा भारी बौर अच्छी पैदावार के संकेत दे रहा है। उम्मीद की जा रही है कि भारी पैदावार के कारण कीमतें कम रहेंगी और फलों का राजा आम आदमी की पहुंच में होगा।
जिले में करीब 12 हजार हेक्टेयर में आम के बगीचे हैं। जिला मुख्यालय के अलावा तहसील हसनपुर व नौगांवा सादात में आम के बड़े बाग हैं। इनका दशहरी, चौसा, लंगड़ा, बंबई, फजरी, समर बहिश्त, सुरखा, हुसन आरा, खट्टा और तोतापरी मशहूर है। विदेशी भी अमरोहा के आम के दिवाने हैं, जो लाखों रुपये खर्च कर यहां से अपनी पसंद के आम मंगाते हैं। अमरोहा की मिट्टी में कई किस्म के आम की पैदावार होती है।
जिले से सऊदी अरब, कुवैत, दुबई, बहरीन, शारजाह, ओमान, सिंगापुर, मलेशिया, अबुधाबी, अमेरिका, जापान, आस्ट्रेलिया, ईरान, उज्बेकिस्तान, इटली, स्पेन, जर्मनी, हालैंड और लंदन तक आम निर्यात किया जाता है। सबसे अधिक मांग खड़ी देशों से रहती है। अच्छी पैदावार होगी तो आम के दाम सस्ते रहेंगे और हर कोई अमरोहा के आम का स्वाद चक सकेगा। बीते सालों की तरह इस साल भी 15 जून के बाद अरब देशों में आम की खेप भेजने की तैयारी है।
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अमरोहा के दशहरी, चौसा और लंगड़ा ने दी महाराष्ट्र के अल्फांसो, गुजरात के केसर और नीलम को मात
यूपी मैंगो एक्सपोर्ट एसोसिएशन अध्यक्ष नदीम सिद्दीकी बताते हैं कि अमरोहा का वातावरण और मिट्टी आम की पैदावार के लिए बेहद मुफीद है। यहां पैदा होने वाले आम की कुछ किस्में ऐसी भी हैं, जो दुनियाभर में मशहूर हैं। जिसमें सबसे ज्यादा दशहरी, चौसा और लंगड़ा आम पसंद किया जाता है। विदेश से सबसे ज्यादा मांग इन्हीं तीन वैरायटी के आम की रहती है। अमरोहा के आमों की मिठास ने तो निर्यात के मामले में महाराष्ट्र का अल्फांसो और गुजरात का केसर और नीलम तथा आंध्र प्रदेश के बैगनपल्ली को भी मात दी है।
समर बहिश्त, हुस्न आरा व सुरखा की मांग अधिक
नदीम सिद्दीकी ने बताया कि वैसे तो प्रदेश में लगभग 70 किस्म के आमों की पैदावार होती है। इनमें लखनवी सफेदा, बनारसी लंगड़ा, मलिहाबादी दशहरी की मांग देश-विदेश में की जाती है, लेकिन इन सभी किस्म के आम पर अमरोहा का चौसा, लंगड़ा, दशहरी, समर बहिश्त, हुस्नआरा, आम्रपाली, मकसूस और सुरखा हर साल भारी पड़ता है।
दुबई भेजा जाएगा 200 टन आम
मैंगो एक्सपोर्ट नदीम सिद्दीकी ने बताया कि दुबई से आम का आर्डर मिलने शुरू हो गए हैं। इस बार पिछले सालों के सापेक्ष विदेश से आने वाली मांग के मुताबिक, यह दायरा और बढ़ सकता है। उससे कारोबार बेहतर होने की उम्मीद है। अकेले दुबई को 200 टन आम भेजे की तैयारी है। इसमें सिर्फ दशहरी, लंगड़ा और चौसा आम शामिल है।
मनौटा गांव से हुई नियादर मनोटा आम की शुरुआत
अमरोहा के आम का स्वाद लोगों को विदेशों से भी खींच लाता है। नियादर मनोटा आम की प्रजाति को हसनपुर तहसील के गांव मनौटा में करीब सौ साल पहले जमींदार एवं उस दौर के हकीम युसूफ खां ने घर में तैयार किया था। इस पेड़ की परवरिश जमींदार के नौकर नियादर मनोटा व्यक्ति ने की थी। फल आने पर जमींदार ने अपने गांव मनौटा का नाम एवं नौकर नियादर का नाम एक साथ मिलाकर इस आम का नाम नियादर मनोटा रख दिया था। हसनपुर से इस आम की वैरायटी जनपद बुलंदशहर, बिजनौर, मुरादाबाद, मेरठ, गाजियाबाद के साथ प्रदेशभर में फैल चुकी है। इस आम का पेड़ हर साल फल देता है। 40 से 50 वर्ष पुराने पेड़ भी अभी खूब फल दे रहे हैं। नियादर मनोटा आम की एक खासियत यह है कि आम खाने के कई घंटे बाद तक इसकी खुशबू आती रहती है। यह आम आकार में बेहद छोटा होता है।
खड़ी देशों में पाकिस्तानी चौसे को मात देता है अमरोहा का लंगड़ा
खाड़ी देशों में पाकिस्तान के चौसा आम को अमरोहा का लंगड़ा कड़ी टक्कर देता है। यही वजह है कि पिछले सालों के मुकाबले खाड़ी देशों में अमरोहा के दशहरी, लंगड़ा और चौसा की डिमांड बढ़ने लगी है। पाकिस्तान का चौसा खाने में खास माना जाता है, अमरोहा का लंगड़ा पाकिस्तान के चौसे पर भारी पड़ है।
दो साल में बढ़ गया 1800 हेक्टेयर रकबा
जिला उद्यान अधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि दो साल में आम के बगीचे का रकबा 1800 हेक्टेयर बढ़ गया है। साल 2023-24 में 10200 हेक्टेयर था, अब ये बढ़कर 12000 हेक्टेयर हो गया है।
- आम का सीजन शुरू होने को है। आम के लिए अमरोहा देश-विदेश में मशहूर है। अगर आंधी-बारिश नहीं हुई तो इस साल आम की बंपर पैदावार होने का अनुमान है। इसका अंदाजा आम के पेड़ों पर लदे बौर से लगाया जा रहा है। बीते सालों के तरह इस साल भी 15 जून के बाद अरब देशों में आम भेजा जाएगा। - नदीम सिद्दीकी, अध्यक्ष यूपी मैंगो एक्सपोर्ट एसोसिएशन
- इस साल बगीचों में आम के पड़ों पर बौर अच्छा है। पिछले सालों के मुकाबले आम की पैदावार बढ़ने का अनुमान है। बीते साल 2,05,560 मीट्रिक टन आम की पैदावार हुई थी। इसके बाद दस प्रतिशत बढ़ने की संभावना है। - संतोष कुमार, जिला उद्यान अधिकारी
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जिले में करीब 12 हजार हेक्टेयर में आम के बगीचे हैं। जिला मुख्यालय के अलावा तहसील हसनपुर व नौगांवा सादात में आम के बड़े बाग हैं। इनका दशहरी, चौसा, लंगड़ा, बंबई, फजरी, समर बहिश्त, सुरखा, हुसन आरा, खट्टा और तोतापरी मशहूर है। विदेशी भी अमरोहा के आम के दिवाने हैं, जो लाखों रुपये खर्च कर यहां से अपनी पसंद के आम मंगाते हैं। अमरोहा की मिट्टी में कई किस्म के आम की पैदावार होती है।
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जिले से सऊदी अरब, कुवैत, दुबई, बहरीन, शारजाह, ओमान, सिंगापुर, मलेशिया, अबुधाबी, अमेरिका, जापान, आस्ट्रेलिया, ईरान, उज्बेकिस्तान, इटली, स्पेन, जर्मनी, हालैंड और लंदन तक आम निर्यात किया जाता है। सबसे अधिक मांग खड़ी देशों से रहती है। अच्छी पैदावार होगी तो आम के दाम सस्ते रहेंगे और हर कोई अमरोहा के आम का स्वाद चक सकेगा। बीते सालों की तरह इस साल भी 15 जून के बाद अरब देशों में आम की खेप भेजने की तैयारी है।
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अमरोहा के दशहरी, चौसा और लंगड़ा ने दी महाराष्ट्र के अल्फांसो, गुजरात के केसर और नीलम को मात
यूपी मैंगो एक्सपोर्ट एसोसिएशन अध्यक्ष नदीम सिद्दीकी बताते हैं कि अमरोहा का वातावरण और मिट्टी आम की पैदावार के लिए बेहद मुफीद है। यहां पैदा होने वाले आम की कुछ किस्में ऐसी भी हैं, जो दुनियाभर में मशहूर हैं। जिसमें सबसे ज्यादा दशहरी, चौसा और लंगड़ा आम पसंद किया जाता है। विदेश से सबसे ज्यादा मांग इन्हीं तीन वैरायटी के आम की रहती है। अमरोहा के आमों की मिठास ने तो निर्यात के मामले में महाराष्ट्र का अल्फांसो और गुजरात का केसर और नीलम तथा आंध्र प्रदेश के बैगनपल्ली को भी मात दी है।
समर बहिश्त, हुस्न आरा व सुरखा की मांग अधिक
नदीम सिद्दीकी ने बताया कि वैसे तो प्रदेश में लगभग 70 किस्म के आमों की पैदावार होती है। इनमें लखनवी सफेदा, बनारसी लंगड़ा, मलिहाबादी दशहरी की मांग देश-विदेश में की जाती है, लेकिन इन सभी किस्म के आम पर अमरोहा का चौसा, लंगड़ा, दशहरी, समर बहिश्त, हुस्नआरा, आम्रपाली, मकसूस और सुरखा हर साल भारी पड़ता है।
दुबई भेजा जाएगा 200 टन आम
मैंगो एक्सपोर्ट नदीम सिद्दीकी ने बताया कि दुबई से आम का आर्डर मिलने शुरू हो गए हैं। इस बार पिछले सालों के सापेक्ष विदेश से आने वाली मांग के मुताबिक, यह दायरा और बढ़ सकता है। उससे कारोबार बेहतर होने की उम्मीद है। अकेले दुबई को 200 टन आम भेजे की तैयारी है। इसमें सिर्फ दशहरी, लंगड़ा और चौसा आम शामिल है।
मनौटा गांव से हुई नियादर मनोटा आम की शुरुआत
अमरोहा के आम का स्वाद लोगों को विदेशों से भी खींच लाता है। नियादर मनोटा आम की प्रजाति को हसनपुर तहसील के गांव मनौटा में करीब सौ साल पहले जमींदार एवं उस दौर के हकीम युसूफ खां ने घर में तैयार किया था। इस पेड़ की परवरिश जमींदार के नौकर नियादर मनोटा व्यक्ति ने की थी। फल आने पर जमींदार ने अपने गांव मनौटा का नाम एवं नौकर नियादर का नाम एक साथ मिलाकर इस आम का नाम नियादर मनोटा रख दिया था। हसनपुर से इस आम की वैरायटी जनपद बुलंदशहर, बिजनौर, मुरादाबाद, मेरठ, गाजियाबाद के साथ प्रदेशभर में फैल चुकी है। इस आम का पेड़ हर साल फल देता है। 40 से 50 वर्ष पुराने पेड़ भी अभी खूब फल दे रहे हैं। नियादर मनोटा आम की एक खासियत यह है कि आम खाने के कई घंटे बाद तक इसकी खुशबू आती रहती है। यह आम आकार में बेहद छोटा होता है।
खड़ी देशों में पाकिस्तानी चौसे को मात देता है अमरोहा का लंगड़ा
खाड़ी देशों में पाकिस्तान के चौसा आम को अमरोहा का लंगड़ा कड़ी टक्कर देता है। यही वजह है कि पिछले सालों के मुकाबले खाड़ी देशों में अमरोहा के दशहरी, लंगड़ा और चौसा की डिमांड बढ़ने लगी है। पाकिस्तान का चौसा खाने में खास माना जाता है, अमरोहा का लंगड़ा पाकिस्तान के चौसे पर भारी पड़ है।
दो साल में बढ़ गया 1800 हेक्टेयर रकबा
जिला उद्यान अधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि दो साल में आम के बगीचे का रकबा 1800 हेक्टेयर बढ़ गया है। साल 2023-24 में 10200 हेक्टेयर था, अब ये बढ़कर 12000 हेक्टेयर हो गया है।
- आम का सीजन शुरू होने को है। आम के लिए अमरोहा देश-विदेश में मशहूर है। अगर आंधी-बारिश नहीं हुई तो इस साल आम की बंपर पैदावार होने का अनुमान है। इसका अंदाजा आम के पेड़ों पर लदे बौर से लगाया जा रहा है। बीते सालों के तरह इस साल भी 15 जून के बाद अरब देशों में आम भेजा जाएगा। - नदीम सिद्दीकी, अध्यक्ष यूपी मैंगो एक्सपोर्ट एसोसिएशन
- इस साल बगीचों में आम के पड़ों पर बौर अच्छा है। पिछले सालों के मुकाबले आम की पैदावार बढ़ने का अनुमान है। बीते साल 2,05,560 मीट्रिक टन आम की पैदावार हुई थी। इसके बाद दस प्रतिशत बढ़ने की संभावना है। - संतोष कुमार, जिला उद्यान अधिकारी