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Amroha News: नहीं मिले तीनों भाई, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ न आने से परिजनों में रोष
Sat, 30 Aug 2025 02:57 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Sat, 30 Aug 2025 02:57 AM IST
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तिगरी गंगा में डूबे तीनों भाइयों के गम में बदहवास बहन सुधा को संभालतीं सहेलियां। संवाद
गजरौला। भतीजे के मंडन संस्कार के दौरान गंगा में बहे तीन भाइयों ओमकार, बंटी व अनुज का तीसरे दिन भी सुराग नहीं लग पाया। तीनों परिवार के साथ बुधवार दोपहर बाद तिगरी में गंगा तट पर आए थे और मुंडन संस्कार के बाद तीनों नहाने लगे थे। उधर, तीसरे दिन भी प्रशासन द्वारा एसडीआरएफ या एनडीआरएफ नहीं लगाए जाने से परिजनों में रोष है।
परिजनों के मुताबिक स्थानीय गोताखोर व पुलिस जिस मोटर बोट से तीनों की तलाश कर रहे हैं, उसका भी कई बार तेल खत्म हो गया। वहीं, तिगरी गंगा घाट पहुंचे प्रभारी मंत्री केपी मलिक ने परिजनों को आश्वासन दिया कि तीनों को तलाश करने के लिए टीम लगी हैं। तलाशी अभियान में लापरवाही नहीं बरती जाएगी। उन्होंने हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
अमरोहा के मोहल्ला दानिशमंदान निवासी तीन सगे भाई अनुज, ओमकार व बंटी बुधवार को तिगरी गंगा में बह गए थे। वह भतीजे विनायक का मुंडन संस्कार कराने आए थे। तीनों के डूब जाने की जानकारी उस समय हुई थी जब शाम पांच बजे परिजन वापस जाने लगे। उसके बाद से उनकी तलाश में गंगा में अभियान चल रहा है। स्थानीय गोताखोर पुलिस को एसडीएम द्वारा मुहैया कराई गई मोटर बोट से तलाश कर रहे हैं।
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परिजनों का आरोप है कि मोटर बोट बार-बार तेल खत्म हो जाता है। ऐसे में अभियान बीच में रोकना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अभी तक न तो एसडीआरएफ और न ही एनडीआरएफ की टीम आई है। हालांकि, शिव इंटर कॉलेज में ठहरी बाढ़ राहत पीएसी की कंपनी के जवानों को शुक्रवार को बुलाया गया था। पीएसी जवानों और गोताखोरों ने शुक्रवार सुबह से शाम तक सर्च अभियान चलाया। उन्होंने तिगरी से ब्रजघाट तक गंगा में तीनों की तलाश की मगर तीनों का सुराग नहीं मिला। शाम को प्रभारी मंत्री केपी मलिक गंगा किनारे पहुंचे। परिजनों ने उनसे भी गुहार लगाई। जिस पर प्रभारी मंत्री ने तलाशी अभियान में तेजी लाने व बाहर से गोताखोर बुलाने के निर्देश दिए।
तीन दिन से परिजन भी गंगा तट पर
तीनों भाइयों की बहन सुधा का रिश्ता अमरोहा में ही तय किया गया है। तीन दिन बाद भी गंगा में तीनों का सुराग न मिलने पर सभी रिश्तेदारों, परिचितों ने गंगा किनारे डेरा डाल रखा है। गंगा में डूबे भाइयों की बहन सुधा के होने वाले ससुर तीसरे दिन शुक्रवार को गंगा किनारे आए। वह भी गंगा की तरफ काे टकटकी लगाए बैठे थे।
लाडलों के मिलने का इंतजार, आंखों में बेबसी के आंसू
गजरौला। गंगा में बहे तीनों भाइयों की तलाश में टीम ने बुधवार व बृहस्पतिवार के बाद शुक्रवार को भी दिनभर अभियान चलाया। वहीं, अपने लाडलों के मिलने की आस में परिजन भी आंखों में बेबसी के आंसू लिए एकटक घाट किनारे बैठे रहे। इस उम्मीद में कि उनके जिगर के टुकड़े मिल जाए और वह उन्हें अपने गले लगा ले।
गंगा घाट पर बैठे पिता रामपाल का चहरा मुरझा गया है। आंखों में आंसू है। साथ में बैठे रिश्तेदार व ग्रामीणों उन्हें दिलासा दे रहे है। उधर, तीनों की मां शशिबाला बदहवास है। वह बेटों के गम उनका रो-रोकर बुरा हाल है। वह पास बैठीं महिलाओं व रिश्तेदार से यही पूछ रही है कि उनके बेटे कम आएंगे। बीच-बीच में गंगा की तरफ जाती है और अपने तीनों बेटों को नाम लेकर पुकारती है। उधर, बहन सुधा भी बदहवास है। उसे कुछ नहीं सूझ रहा। वह कटान से बचाव के लिए तट बांध पर चलते-चलते अचानक गिरने लगी जिसे उसकी सहेलियों ने संभाल लिया। नौगावां से आईं तीनों भाइयों की मौसी सुषमा व सीमा का भी बुरा हाल था।
बेटों के गम में रिश्तेदार के घर नहीं जा रहे परिजन
गजरौला। गंगा में डूृबे तीनों भाइयों की बुआ तिगरी में ही रहती हैं। जिनके घर तीनों का और परिजनों का खूब आना जाना होता था, लेकिन जब से तीनों भाई गंगा डूबे हैं, उनके पिता रामपाल, मां शशिबाला गंगा किनारे ही बैठे रहते हैं। पूरी रात गंगा किनारे ही कट जाती है। तीनों भाइयों के परिचितों ने बताया कि उनके माता-पिता और बहन से काफी कह लिया कि रात में तिगरी जाकर रिश्तेदार के घर सो जाएं, लेकिन किनारे से उठने को तैयार नहीं हैं। तीनों के गम में बेहाल मां और बहन के मुंह में निवाला तक नहीं गया।
साथ आए लोगों ने लगाई आर्थिक सहायता की गुहार
तीसरे दिन उनके बीच एडीएम, एसडीएम विभा श्रीवास्तव व अन्य अधिकारी गए। इस दौरान तीनों के परिचितों ने उनसे परिवार की आर्थिक सहायता की गुहार लगाई। एसडीएम ने बताया कि पहले तीनों को तलाश कर लिया जाए, इसके बाद आर्थिक सहायता की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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परिजनों के मुताबिक स्थानीय गोताखोर व पुलिस जिस मोटर बोट से तीनों की तलाश कर रहे हैं, उसका भी कई बार तेल खत्म हो गया। वहीं, तिगरी गंगा घाट पहुंचे प्रभारी मंत्री केपी मलिक ने परिजनों को आश्वासन दिया कि तीनों को तलाश करने के लिए टीम लगी हैं। तलाशी अभियान में लापरवाही नहीं बरती जाएगी। उन्होंने हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
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अमरोहा के मोहल्ला दानिशमंदान निवासी तीन सगे भाई अनुज, ओमकार व बंटी बुधवार को तिगरी गंगा में बह गए थे। वह भतीजे विनायक का मुंडन संस्कार कराने आए थे। तीनों के डूब जाने की जानकारी उस समय हुई थी जब शाम पांच बजे परिजन वापस जाने लगे। उसके बाद से उनकी तलाश में गंगा में अभियान चल रहा है। स्थानीय गोताखोर पुलिस को एसडीएम द्वारा मुहैया कराई गई मोटर बोट से तलाश कर रहे हैं।
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परिजनों का आरोप है कि मोटर बोट बार-बार तेल खत्म हो जाता है। ऐसे में अभियान बीच में रोकना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अभी तक न तो एसडीआरएफ और न ही एनडीआरएफ की टीम आई है। हालांकि, शिव इंटर कॉलेज में ठहरी बाढ़ राहत पीएसी की कंपनी के जवानों को शुक्रवार को बुलाया गया था। पीएसी जवानों और गोताखोरों ने शुक्रवार सुबह से शाम तक सर्च अभियान चलाया। उन्होंने तिगरी से ब्रजघाट तक गंगा में तीनों की तलाश की मगर तीनों का सुराग नहीं मिला। शाम को प्रभारी मंत्री केपी मलिक गंगा किनारे पहुंचे। परिजनों ने उनसे भी गुहार लगाई। जिस पर प्रभारी मंत्री ने तलाशी अभियान में तेजी लाने व बाहर से गोताखोर बुलाने के निर्देश दिए।
तीन दिन से परिजन भी गंगा तट पर
तीनों भाइयों की बहन सुधा का रिश्ता अमरोहा में ही तय किया गया है। तीन दिन बाद भी गंगा में तीनों का सुराग न मिलने पर सभी रिश्तेदारों, परिचितों ने गंगा किनारे डेरा डाल रखा है। गंगा में डूबे भाइयों की बहन सुधा के होने वाले ससुर तीसरे दिन शुक्रवार को गंगा किनारे आए। वह भी गंगा की तरफ काे टकटकी लगाए बैठे थे।
लाडलों के मिलने का इंतजार, आंखों में बेबसी के आंसू
गजरौला। गंगा में बहे तीनों भाइयों की तलाश में टीम ने बुधवार व बृहस्पतिवार के बाद शुक्रवार को भी दिनभर अभियान चलाया। वहीं, अपने लाडलों के मिलने की आस में परिजन भी आंखों में बेबसी के आंसू लिए एकटक घाट किनारे बैठे रहे। इस उम्मीद में कि उनके जिगर के टुकड़े मिल जाए और वह उन्हें अपने गले लगा ले।
गंगा घाट पर बैठे पिता रामपाल का चहरा मुरझा गया है। आंखों में आंसू है। साथ में बैठे रिश्तेदार व ग्रामीणों उन्हें दिलासा दे रहे है। उधर, तीनों की मां शशिबाला बदहवास है। वह बेटों के गम उनका रो-रोकर बुरा हाल है। वह पास बैठीं महिलाओं व रिश्तेदार से यही पूछ रही है कि उनके बेटे कम आएंगे। बीच-बीच में गंगा की तरफ जाती है और अपने तीनों बेटों को नाम लेकर पुकारती है। उधर, बहन सुधा भी बदहवास है। उसे कुछ नहीं सूझ रहा। वह कटान से बचाव के लिए तट बांध पर चलते-चलते अचानक गिरने लगी जिसे उसकी सहेलियों ने संभाल लिया। नौगावां से आईं तीनों भाइयों की मौसी सुषमा व सीमा का भी बुरा हाल था।
बेटों के गम में रिश्तेदार के घर नहीं जा रहे परिजन
गजरौला। गंगा में डूृबे तीनों भाइयों की बुआ तिगरी में ही रहती हैं। जिनके घर तीनों का और परिजनों का खूब आना जाना होता था, लेकिन जब से तीनों भाई गंगा डूबे हैं, उनके पिता रामपाल, मां शशिबाला गंगा किनारे ही बैठे रहते हैं। पूरी रात गंगा किनारे ही कट जाती है। तीनों भाइयों के परिचितों ने बताया कि उनके माता-पिता और बहन से काफी कह लिया कि रात में तिगरी जाकर रिश्तेदार के घर सो जाएं, लेकिन किनारे से उठने को तैयार नहीं हैं। तीनों के गम में बेहाल मां और बहन के मुंह में निवाला तक नहीं गया।
साथ आए लोगों ने लगाई आर्थिक सहायता की गुहार
तीसरे दिन उनके बीच एडीएम, एसडीएम विभा श्रीवास्तव व अन्य अधिकारी गए। इस दौरान तीनों के परिचितों ने उनसे परिवार की आर्थिक सहायता की गुहार लगाई। एसडीएम ने बताया कि पहले तीनों को तलाश कर लिया जाए, इसके बाद आर्थिक सहायता की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।