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Amroha News: प्रशासन ने मनरेगा के गलत भुगतान में जिनको दोषी माना, पुलिस ने दी क्लीन चिट

Thu, 11 Jun 2026 01:36 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा Updated Thu, 11 Jun 2026 01:36 AM IST
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The police have given a clean chit to those whom the administration had held guilty of irregular payments under MGNREGA.
अमरोहा। क्रिकेटर मोहम्मद शमी की बहन शबीना, बहनोई गजनबी और परिवार के कुछ अन्य सदस्यों सहित 18 लोगों के नाम मनरेगा मजदूरी के 8.68 लाख रुपये के भुगतान की घटना चर्चा में आने पर प्रशासनिक समिति की जांच के बाद भले ग्राम पंचायत से जुड़े आठ सरकारी कर्मचारियों के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति हुई थी लेकिन इस मामले में दर्ज रिपोर्ट में पुलिस ने एफआर लगा दी है। इन आठ कर्मचारियों में तीन पंचायत सचिव भी शामिल हैं।
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जोया ब्लॉक की पलौला ग्राम पंचायत में मनरेगा राशि के भुगतान का मामला जब सुर्खियों में आया था तो वहां शमी की बहन की सास गुले आयशा प्रधान थीं। प्रधान के परिवार के सदस्यों को भी मनरेगा मजदूरी के भुगतान का मामला गर्माने के बाद 27 मार्च 2025 को जांच शुरू हुई थी। प्रशासनिक समिति की जांच में तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव उमा, अंजुम और पृथ्वी, एपीओ ब्रजभान सिंह, रोजगार सेवक झम्मन लाल, तकनीकी सहायक अजय निमेष, कंप्यूटर ऑपरेटर शराफत अली और लेखाकार विजेंद्र सिंह को जिम्मेदार माना गया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने इन्हें निलंबित करने के साथ शासन से विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की थी।
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इस मामले में जोया ब्लॉक के तत्कालीन बीडीओ ने डिडौली कोतवाली में तहरीर देकर इन आठों कर्मचारियों के खिलाफ विश्वासघात और धोखाधड़ी के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी। तीन पंचायत सचिवों समेत आठ कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज इस मामले में पुलिस ने विवेचना के बाद फाइनल रिपोर्ट लगा दी है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य और गवाह नहीं मिले।
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एफआर चर्चा में आने के बाद गांव पलौला से लेकर जिला मुख्यालय तक सवाल उठाने वाले हैरत जता रहे हैं कि जिस मामले में प्रशासनिक जांच में आठ कर्मचारियों को दोषी माना गया था, उसमें पुलिस को आरोपियों के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला। सवाल यह भी है कि आखिर क्या वजह रही कि एक मामले में प्रशासनिक टीम और पुलिस की जांच में विरोधाभासी नतीजे सामने आए हैं।

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हाईकोर्ट से मिली गिरफ्तारी पर रोक की राहत

ग्राम पंचायत पलौला में 18 जॉब कार्डधारकों के नाम पर 8.68 लाख रुपये के भुगतान और अनियमितताओं के आरोपों को लेकर दर्ज एफआईआर के बाद तीन पंचायत सचिवों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इनमें शामिल हुमा परवीन, अंजुम और पृथ्वी सिंह ने याचिका दायर कर कहा था कि उन्हें गलत तरीके से इस मामले में फंसाया गया है, जबकि न तो उन्होंने जॉबकार्ड तैयार किए और न ही किसी भुगतान को स्वीकृति दी। इनकी तरफ से यह भी दलील दी गई थी कि जॉबकार्ड जारी करने और भुगतान प्रक्रिया में रोजगार सेवक तथा अन्य अधिकारियों की भूमिका होती है। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आरोपियों को अंतरिम राहत देते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। साथ ही पुलिस जांच के दौरान सहयोग करने के निर्देश दिए थे।



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शमी की बहन की सास थीं ग्राम प्रधान, उनसे हुई थी 8.68 लाख रुपये की रिकवरी



ग्राम पंचायत पलौला में मनरेगा राशि का भुगतान शमी की बहन-बहनोई समेत अन्य कई को होने का मामला गर्माने पर प्रशासनिक स्तर से शमी की बहन शबीना की सास पलौला की प्रधान गुले आयशा से 8.68 लाख रुपये की रिकवरी कराई थी। डीएम के निर्देश पर पंचायत के खातों को सीज कर दिया गया था। साथ ही ग्राम प्रधान गुले आयशा के वित्तीय अधिकार समाप्त करने और पंचायत राज अधिनियम के तहत उनके अधिकारों को खत्म करने संबंधी नोटिस भी जारी किए गए थे।


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पुलिस बोली, नहीं मिले कोई साक्ष्य



इस मामले में बीडीओ द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के विवेचक एवं डिडौली कोतवाली के इंस्पेक्टर जितेंद्र बलियान का कहना है कि पलौला ग्राम पंचायत में मनरेगा से जुड़े घपले के मामले में कोई साक्ष्य नहीं मिले थे। इसके चलते ही मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई है।



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