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Amroha News: 200 साल से भी पुराना है धनौरा की रामलीला का इतिहास
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मंडी धनौरा। नगर की रामलीला का इतिहास करीब 200 साल पुराना है। भव्य मंचन के लिए प्रसिद्ध इस रामलीला में आज भी दिन और रात दोनों समय मंचन होता है। यह सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल भी रही है। रामलीला में हिंदुओं के साथ मुस्लिम समुदाय के लोग भी उत्साह से भाग लेते थे। रात के मंचन के बाद सामाजिक और धार्मिक नाटक भी प्रस्तुत किए जाते थे।
रात की रामलीला में कई साल तक राम का किरदार निभाने वाले 90 वर्षीय जगऔतार त्यागी बताते हैं कि उनके दादा नगर की रामलीला के बारे में बताते थे। दिन का मंचन प्राचीन देवी मंदिर के सामने रामलीला मैदान में, जबकि रात का मंचन अग्रसेन बाजार में होता था। मुस्लिम समाज के इश्तियाक अहमद और सलीम का इसमें विशेष योगदान रहता था।
समिति के पूर्व अध्यक्ष 92 वर्षीय ध्रुवप्रसाद गोयल के मुताबिक, उस दौर में स्थानीय लोग ही पात्रों की भूमिका निभाते थे। पंडित रामऔतार और बाद में जय नारायण मांगलिक रावण, जबकि अभिनंदन शर्मा हनुमान का किरदार निभाते थे। समिति के पूर्व अध्यक्ष 80 वर्षीय कृष्ण गोपाल अग्रवाल बताते हैं कि रामलीला देखने दूर-दूर से लोग आते थे।
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धनौरा में दिन की रामलीला खासकर ग्रामीणों और रात का मंचन नगर के लोगों के लिए होता था। अब रात की रामलीला देखने भी बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचते हैं।
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हर तीन साल में होता है समिति का चुनाव
रामलीला का मंचन श्रीरामलीला प्रबंध समिति मंदिर महादेव कराती है। करोड़ों रुपये की संपत्ति वाली समिति के अध्यक्ष और सदस्यों के लिए हर तीन साल में चुनाव होता है। इस साल चुनाव के दौरान मतदान स्थल पर पीएसी की एक प्लाटून तैनात की गई थी। रामलीला का मंच मंडल में सबसे बड़ा और पक्का बना है।
रामलीला महोत्सव पर खर्च होते हैं 20 लाख रुपये
करीब 15 दिन चलने वाले रामलीला महोत्सव पर समिति लगभग 20 लाख रुपये खर्च करती है। भगवान राम की बरात मुख्य आकर्षण होती है। इसमें करीब 25 झांकियों के साथ बैंड, ऊंट और हाथी शामिल होते हैं। झांकियां बनाने वाले कलाकार मेरठ और बरेली से आते हैं। दशहरा पर रामलीला मैदान में करीब 50 हजार लोग जुटते हैं।
पुरुष निभाते थे महिलाओं के किरदार
रामलीला से जुड़े अवनीश कुमार बताते हैं कि पहले पुरुष कलाकार ही महिलाओं की भूमिका निभाते थे। कलाकार रोजाना घंटों संवाद याद करते थे। पर्दे के पीछे सुरेंद्र जैन संवाद की किताब लेकर मौजूद रहते थे। महिला पात्र निभाने वाले पुरुष मंच से नगर के चर्चित लोगों पर व्यंग्यात्मक टिप्पणियां भी करते थे, जिन्हें लोग बुरा नहीं मानते थे।
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शिव बरात के साथ ही रामलीला महोत्सव शुरू हो जाएगा। इस साल रामलीला महोत्सव के भव्य मंचन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस साल दिल्ली से आने वाले कलाकार रामलीला का मंचन करेंगे। पहली बार महिलाओं का किरदार महिला कलाकारों द्वारा ही निभाया जाएगा।
-जागेश अग्रवाल अध्यक्ष रामलीला प्रबंध समिति, धनौरा
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रात की रामलीला में कई साल तक राम का किरदार निभाने वाले 90 वर्षीय जगऔतार त्यागी बताते हैं कि उनके दादा नगर की रामलीला के बारे में बताते थे। दिन का मंचन प्राचीन देवी मंदिर के सामने रामलीला मैदान में, जबकि रात का मंचन अग्रसेन बाजार में होता था। मुस्लिम समाज के इश्तियाक अहमद और सलीम का इसमें विशेष योगदान रहता था।
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समिति के पूर्व अध्यक्ष 92 वर्षीय ध्रुवप्रसाद गोयल के मुताबिक, उस दौर में स्थानीय लोग ही पात्रों की भूमिका निभाते थे। पंडित रामऔतार और बाद में जय नारायण मांगलिक रावण, जबकि अभिनंदन शर्मा हनुमान का किरदार निभाते थे। समिति के पूर्व अध्यक्ष 80 वर्षीय कृष्ण गोपाल अग्रवाल बताते हैं कि रामलीला देखने दूर-दूर से लोग आते थे।
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धनौरा में दिन की रामलीला खासकर ग्रामीणों और रात का मंचन नगर के लोगों के लिए होता था। अब रात की रामलीला देखने भी बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचते हैं।
हर तीन साल में होता है समिति का चुनाव
रामलीला का मंचन श्रीरामलीला प्रबंध समिति मंदिर महादेव कराती है। करोड़ों रुपये की संपत्ति वाली समिति के अध्यक्ष और सदस्यों के लिए हर तीन साल में चुनाव होता है। इस साल चुनाव के दौरान मतदान स्थल पर पीएसी की एक प्लाटून तैनात की गई थी। रामलीला का मंच मंडल में सबसे बड़ा और पक्का बना है।
रामलीला महोत्सव पर खर्च होते हैं 20 लाख रुपये
करीब 15 दिन चलने वाले रामलीला महोत्सव पर समिति लगभग 20 लाख रुपये खर्च करती है। भगवान राम की बरात मुख्य आकर्षण होती है। इसमें करीब 25 झांकियों के साथ बैंड, ऊंट और हाथी शामिल होते हैं। झांकियां बनाने वाले कलाकार मेरठ और बरेली से आते हैं। दशहरा पर रामलीला मैदान में करीब 50 हजार लोग जुटते हैं।
पुरुष निभाते थे महिलाओं के किरदार
रामलीला से जुड़े अवनीश कुमार बताते हैं कि पहले पुरुष कलाकार ही महिलाओं की भूमिका निभाते थे। कलाकार रोजाना घंटों संवाद याद करते थे। पर्दे के पीछे सुरेंद्र जैन संवाद की किताब लेकर मौजूद रहते थे। महिला पात्र निभाने वाले पुरुष मंच से नगर के चर्चित लोगों पर व्यंग्यात्मक टिप्पणियां भी करते थे, जिन्हें लोग बुरा नहीं मानते थे।
शिव बरात के साथ ही रामलीला महोत्सव शुरू हो जाएगा। इस साल रामलीला महोत्सव के भव्य मंचन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस साल दिल्ली से आने वाले कलाकार रामलीला का मंचन करेंगे। पहली बार महिलाओं का किरदार महिला कलाकारों द्वारा ही निभाया जाएगा।
-जागेश अग्रवाल अध्यक्ष रामलीला प्रबंध समिति, धनौरा