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पिता-पुत्र को ऑनर किलिंग में जेल भेजने वाली पुलिस को कोर्ट ने बताया आपराधिक षड्यंत्रकारी

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 05 Apr 2021 01:28 AM IST
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The court said that the police implicated father and son in honor killings as criminal conspirators
अमरोहा(अनिल चौहान)। पिता-पुत्र को ऑनर किलिंग के गलत आरोप में जेल भेजने के कृत्य को जिला जज की अदालत ने पुलिस का आपराधिक षड्यंत्र बताया है। तल्ख टिप्पणी करते हुए स्पष्ट कहा कि विवेचक और अन्य पुलिस कर्मियों ने षड्यंत्र कर कूटरचित साक्ष्य गढ़े हैं। जनपद न्यायाधीश ने विवेचक समेत कपड़े, जूते और आलाकत्ल की बरामदगी दिखाने में शामिल सभी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीजीपी, एडीजी, एसपी को लिखा है। न्यायालय के आदेश से पुलिस कर्मियों में हड़कंप मचा है।
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जिला जज की अदालत ने पूरे प्रकरण में पंद्रह पेज का आदेश जारी किया है। इसमें पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए तल्ख टिप्पणी की है। कहा कि विवेचक व तत्कालीन इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा ने आरोपी बनाए गए परिजनों द्वारा किशोरी की हत्या के संबंध में दी गई फर्जी एवं असत्य संस्वीकृति तैयार की थी। इसके अलावा विवेचक ने कथित मृतका के कपड़ों और जूते की फर्जी और प्रायोजित फर्द बरामदगी पर हस्ताक्षर करने वाले पुलिस कर्मियों के साथ आपराधिक षड्यंत्र कर आलाकत्ल (कट्टा) और कारतूस की बरामदगी दिखाकर जीवित किशोरी की हत्या में परिजनों (किशोरी के पिता, भाई, रिश्तेदार) को नामजद करते हुए उनकी दोषसिद्धि ऐसे अपराध में की है, जो उन्होंने किया ही नहीं।
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पुलिस ने यह कूटरचित फर्जी साक्ष्य गढ़े हैं। कथित मृतका की मां, भाई और निवर्तमान इंस्पेक्टर पंकज वर्मा के साक्ष्यों से साबित होता है कि पिता-भाई और रिश्तेदार ने षड्यंत्र रचकर किशोरी की हत्या नहीं की थी। बल्कि वह जीवित है। इस संबंध में विवेचक ने घटना के समय कथित मृतका के पहने कपड़ों और आला कत्ल आदि को परिजनों की निशानदेही पर बरामद दर्शाया है। इसे विवेचक अशोक कुमार शर्मा, एसआई राकेश कुमार, एसएसआई विनोद कुमार त्यागी, महिला कांस्टेबल अपेक्षा तोमर, कांस्टेबल अनिरुद्ध, दीपक और एसआई आरिफ मोहम्मद ने अपने-अपने साक्ष्य के द्वारा साबित भी किया है। साथ ही सभी पुलिस कर्मियों ने फर्द बरामदगी पर अपने हस्ताक्षर किया जाना स्वीकार किया है। लेकिन यह स्पष्ट किया जा चुका है कि मृतक दर्शाई गई किशोरी जीवित है। साथ ही पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य से यह भी साबित होता है कि तत्कालीन विवेचनाधिकारी और उसके साथ किशोरी के कपड़े, जूते तमंचा-कारतूस की बरामदगी से संबंधित पुलिस कर्मचारियों ने आरोपी बनाए गए परिजनों के खिलाफ कूटरचित एवं फर्जी साक्ष्य गढ़कर हत्या, हत्या के षड्यंत्र और हत्या के साक्ष्य का विलोप करने के फर्जी साक्ष्य के आधार पर आरोपपत्र प्रेषित किया है। इसलिए गैर जिम्मेदार और अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाह पुलिस कर्मचारियों की वजह से पिता को अपने जीवन के करीब 11 माह, भाई को करीब 9 माह और रिश्तेदार को करीब 1 वर्ष 3 महीने जिला कारागार में गुजारने पड़े। इस लिए इस मामले के तत्कालीन विवेचक अशोक कुमार शर्मा और उसके साथ आरोपी बनाए गए परिजनों की निशानदेही पर कथित मृतका के कपड़ों, जूते और आलाकत्ल की बरामदगी में शामिल रहे सभी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। (संवाद)
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क्षतिपूर्ति और आरोपी पुलिस कर्मियों पर करेंगे मुकदमे की मांग
अमरोहा। पीड़ित परिवार के अधिवक्ता कुलदीप चौधरी ने बताया कि पुलिस ने निर्दोष परिजनों को जेल भेजकर जघन्य अपराध किया है। पुलिस ने निर्दोष परिजनों को जुर्म कबूल कराने के लिए तरह-तरह की यातनाएं दी थीं। पीड़ित परिवार के घर से लाखों रुपये जेवर और नकदी लूटी गई थी। परिजन पहले भी इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से कर चुके हैं। इसलिए क्षतिपूर्ति की मांग की जाएगी। न्यायालय ने आरोपी पुलिस कर्मियों पर विभागीय कार्रवाई के लिए लिखा है। इसलिए हम आरोपी पुलिस कर्मियों पर मुकदमे की मांग भी करेंगे। (संवाद)

बहाली के बाद बरेली परिक्षेत्र हो गया आरोपी विवेचक का तबादला
अमरोहा। जिंदा किशोरी को मृत दर्शाकर पिता-भाई और रिश्तेदार को ऑनर किलिंग के झूठे मुकदमे में षड्यंत्र रचने वाले विवेचक इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा को निलंबित कर दिया गया था। कानूनी प्रक्रिया में निर्दोषों को न्याय मिलने में करीब पांच महीने से अधिक का समय लगा है। लेकिन षड्यंत्रकारी आरोपी विवेचक अशोक कुमार शर्मा को पिछले दिनों बहाल कर दिया गया है। हालांकि इस मामले में पुलिस के अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। वहीं पिछले दिनों अशोक शर्मा का तबादला बरेली परिक्षेत्र हो चुका है। (संवाद)
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