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Amroha News: बीमा क्लेम निरस्त करने पर अब कंपनी को देने होंगे 20 हजार, जुर्माना भी लगा

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 24 Feb 2026 01:41 AM IST
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The company will now have to pay 20,000 rupees for rejecting the insurance claim, along with a fine.
अमरोहा। उपभोक्ता आयोग ने बीमा क्लेम निरस्त करने के मामले में बीमा कंपनी को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए पीड़ित के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने बीमा कंपनी को 20,583 रुपये की क्लेम धनराशि नौ प्रतिशत ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिए हैं।
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मानसिक व आर्थिक क्षति और वाद व्यय के लिए 15 हजार रुपये भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। यह राशि फैसला आने की तिथि से एक माह के भीतर अदा करनी होगी। रजबपुर थानाक्षेत्र के कूबी में वरुण कुमार का परिवार रहता है। उनकी माता शिक्षा देवी ने बीमा कंपनी से हेल्थ पॉलिसी ली हुई थी। यह पॉलिसी एक अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024 तक वैध थी। सात दिसंबर 2023 को शिक्षा देवी को पथरी की शिकायत पर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 10 दिसंबर 2023 तक उपचार चला। इलाज पर कुल 20,583 रुपये खर्च हुए।
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लिहाजा वरुण कुमार ने 14 दिसंबर 2023 को बीमा कंपनी के समक्ष प्रतिपूर्ति दावा प्रस्तुत किया, लेकिन कंपनी ने 29 दिसंबर 2023 को यह कहते हुए क्लेम निरस्त कर दिया कि अस्पताल में भर्ती और उपचार का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। सत्यापन के दौरान संबंधित नर्सिंग होम की ओर से भी लिखित सूचना दी गई कि उस अवधि में मरीज भर्ती नहीं हुई थीं। इसी आधार पर कंपनी ने मिस रिप्रेजेंटेशन ऑफ मटेरियल फैक्ट बताते हुए दावा खारिज कर दिया।
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इस मामले में वरुण कुमार ने जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग की शरण ली। मामले को गंभीरता से लेकर आयोग के अध्यक्ष रमा शंकर सिंह और महिला सदस्य मंजू रानी दीक्षित ने बीमा कंपनी के अधिकारियों को तलब कर लिया। इस दौरान वरुण कुमार ने अपना तर्क रखा कि अस्पताल द्वारा पहले गलत रिपोर्ट दी गई, बाद में भर्ती होने की पुष्टि की गई, बावजूद इसके बीमा कंपनी ने भुगतान से इन्कार कर दिया।

सुनवाई के बाद आयोग ने माना कि बीमा कंपनी द्वारा क्लेम अस्वीकार करना सेवा में कमी है। आयोग ने स्पष्ट किया कि पीड़ित बीमा राशि तथा क्षतिपूर्ति पाने का अधिकारी है और निर्धारित समय सीमा में भुगतान नहीं होने पर विधिक कार्रवाई की जा सकेगी। क्लेम के 20,583 रुपये के इसके अलावा मानसिक व आर्थिक क्षति के 10 हजार और वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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