जश्न-ए-ईदे मिलादुन्नबी के मुबारक मौके पर जुलूस-ए-मोहम्मदी परंपरागत तरीके से निकाला गया। जगह-जगह जुलूस का स्वागत किया गया। नारा-ए-तकबीर-अल्ला-हू-अकबर, नारा-ए-रिसालत या रसूल अल्लाह, आका की आमद मरहबा, सरकार की आमद मरहबा, नारा-ए-तकबीर के नारों से फिजा गूंज उठा। जुलूस के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस के कड़े बंदोबस्त रहे।
मुस्लिम कमेेटी के तत्वावधान में जुलूस मोहम्मदी जामा मस्जिद से शुरू हुआ। जुलूस का आगाज हाफिज शमीम अमरोहवी ने तिलावते कलामे पाक से जुलूस का आगाज किया। कमेटी के सदर सरताज आलम मंसूरी के नेतृत्व में जुलूस को झंडी दिखाकर रवाना किया। जामा मस्जिद पर जुलूस की शुरुआत में जुलूस के कन्वीनर मरगूब सिद्दीकी, हाजी खुर्शीद अनवर, हबीब अहमद एडवोकेट, अली इमाम रिजवी, फहीम शाहनवाज, नईम उल हक, कमर नकवी, मंसूर अहमद सिद्दीकी एडवोकेट, नासिर सिद्दीकी, मुशाहिद अली अब्बासी, डॉक्टर नजमुन नबी, निराले मिया अंसारी, अमजद इदरीसी एडवोकेट ने अपने विचार व्यक्त किए। जुलूस अपने परंपरागत रास्तों से गुजरता हुआ टाउन हॉल के मैदान में पहुंचा। जुलूस का रास्ते में विभिन्न समाज सेवी, धार्मिक संगठनों द्वारा फूल बरसाकर स्वागत किया गया। जुलूस में पूर्व विधायक महबूब अली, पूर्व एमएलसी परवेज अली और विभिन्न सेवी संगठनों के लोग शामिल थे। दुआ इमाम गुलाम मुर्तुजा ने कराई। मुस्लिम कमेटी के प्रवक्ता मंसूर अहमद ने वाल्मीकि समाज का आभार प्रकट किया कि उन्होंने जुलूस-ए-मोहम्मदी के लिए हिंदू मुस्लिम भाईचारे की मिसाल पेश करते हुए वाल्मीकि जयंती का जुलूस 10 अक्तूबर को निकालने का ऐलान किया। अध्यक्ष सरताज आलम मंसूरी ओर संयोजक मरगूब सिद्दीकी ने सभी का आभार जताया। संचालन हाजी खुर्शीद अनवर ने किया।
वहीं जोया में रसूले खुदा हजरत मोहम्मद मुस्तफा की यौम-ए-विलादत का जश्न यानि ईद मिलादुन्नबी जोश-ओ-खरोश के साथ मनाया गया। जोया में रजा रुयते हिलाल कमेटी के बैनर तले जौहर की नमाज के बाद जुलूस निकाला गया। जुलूस आखिर में रजा मस्जिद के करीब मदरसे में पहुंचकर संपन्न हुआ। दुआ कराई गई। जुलूस में पूर्व चेयरमैन मोहम्मद यामीन, हाजी कसीम, मुज्जमिल, कारी मैराजुल, नबी आदि शामिल रहे। रजबपुर में विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए जुलूस मोहम्मदी बाबा फरीदी दरगाह पहुंचा। यहां पर दुआ कराई गई। नौगांवा सादात में भी आमदे रसूल पर जुलूस-ए-मोहम्मदी निकला।