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Amroha News: आत्महत्या बता बैंक व कंपनी ने खारिज किया था क्लेम, अब ब्याज समेत देने होंगे दो लाख

Thu, 03 Jul 2025 01:39 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा Updated Thu, 03 Jul 2025 01:39 AM IST
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The bank and the company rejected the claim saying it was a suicide, now they will have to pay two lakhs with interest
अमरोहा। ट्रेन से कटकर किसान की मौत के मामले में बैंक और कंपनी ने आत्महत्या बताते हुए बीमा क्लेम देने से इन्कार कर दिया। मामले में उपभोक्ता फोरम ने क्लेम के दो लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज समेत देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही शारीरिक, मानसिक व आर्थिक पीड़ा के लिए 15 हजार और वाद व्यय खर्च के रूप में 10 हजार रुपये भी बैंक व बीमा कंपनी को देने होंगे। पीड़ित को पूरी धनराशि एक महीने में सौंपनी होगी।
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गजरौला थानाक्षेत्र के मोहल्ला टीचर्स कॉलोनी कवि नगर नीरज उर्फ निमिषराज का परिवार रहता है। उनके परिवार में पत्नी सुमन के अलावा बेटा अतुल कुमार व दीपक कुमार हैं। नीरज ने एचडीएफसी बैंक से बीमा सर्व सुरक्षा प्लान के तहत कराया था, जो 18 जुलाई 2018 से शुरू होकर 17 जुलाई 2021 तक वैध था। नीरज नियमित बीमा की प्रीमियम राशि 1153 रुपये जमा कर रहे थे। इस प्लान में बीमा धारक की किसी भी प्रकार से दुर्घटना में मृत्यु होने पर दो लाख रुपये का डिस्कवर था।
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आरोप है कि बीमा कंपनी ने नीरज से बिना जानकारी लिए पॉलिसी में उनके पिता को नॉमिनी बना दिया था। इस संबंध में शिकायत की गई तो बैंक ने विश्वास दिलाया कि वह जल्द बीमा में उनके पिता के स्थान पर पत्नी या बेटे को नॉमिनी बना देंगे, लेकिन 27 जुलाई 2018 को नीरज की रेल दुर्घटना में आई चोटों के कारण मौत हो गई। पीड़ित परिवार की ओर से 29 जुलाई 2018 को गजरौला थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी रेल दुर्घटना में आई चोट के कारण मौत होना दर्शाया गया था।
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नीरज की मौत के बाद पत्नी सुमन ने बैंक व बीमा कंपनी से क्लेम लेने के लिए आवेदन किया, लेकिन बैंक के बीमा डिपार्टमेंट ने आत्महत्या बताते हुए क्लेम को निरस्त कर दिया। मृतक की पत्नी सुमन ने बैंक की बीमा डिपार्टमेंट के अफसरों से शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। लिहाजा उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली।

- आर्थिक व मानसिक कष्ट के लिए 15 हजार व वाद व्यय के रूप में 10 हजार भी देंने होंगे
आयोग के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह व महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित ने इंश्योरेंस कंपनी और बैंक के अफसरों को तलब किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपभोक्ता आयोग ने बैंक और बीमा कंपनी को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन तथा सेवा में कमी का दोषी माना। बैंक या बीमा कंपनी के अधिकारी किसान के आत्महत्या करने संबंधित कोई साक्ष्य दाखिल नहीं कर सके, जबकि विवेचक की जांच व थाने की जीडी में ट्रेन से गिरकर मौत होना दर्ज है। लिहाजा, उपभोक्ता फोरम ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद ने बैंक व बीमा कंपनी को क्लेम की धनराशि दो लाख रुपये को याचिका दायर करने की तिथि से भुगतान किए जाने तक नौ प्रतिशत ब्याज समेत चुकाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मानसिक शारीरिक और आर्थिक पीड़ा के लिए 15 हजार और वाद व्यय के रूप में खर्च हुए 10 हजार भी बैंक व बीमा कंपनी को देने निर्देश दिए हैं।
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