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Amroha News: स्कूलों के भीतर बंदर और बाहर कुत्तों का आतंक, दहशत में नौनिहाल

Thu, 17 Sep 2026 02:11 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा Updated Thu, 17 Sep 2026 02:11 AM IST
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Terror of monkeys inside schools and dogs outside; young children gripped by fear.
अमरोहा। शहर से लेकर गांवों तक बेसिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा के लिए बंदर और कुत्ते दहशत का पर्याय बने हैं। कहीं स्कूलों में बंदरों के झुंड डेरा जमाए हैं तो कहीं विद्यालय के मुख्य द्वार के आसपास कुत्तों के झुंड घूमते रहते हैं। इससे छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षक भी सहमे हुए हैं। जोया के सिविलियन विद्यालय में मंगलवार को बंदरों के झुंड ने छात्र अरुण, दो अध्यापक पूजा और तरुण राणा पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया था। बुधवार को भी विद्यालय परिसर में बंदर मंडराते नजर आए।
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जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के 1266 विद्यालय संचालित हैं, जिनमें करीब सवा लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। ऐसे में विद्यालयों के आसपास बढ़ता खूंखार कुत्ते और बंदरों का जमावड़ा बच्चों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। जोया के सिविलियन विद्यालय में बंदरों के लगातार पहुंचने की समस्या सबसे अधिक सामने आई है। सहायक अध्यापिका मनजीत रानी के मुताबिक विद्यालय के आसपास बंदरों से बचाव के लिए वार्ड सदस्य मोगिश अहमद से सुबह के समय लंगूर की व्यवस्था कराने और स्कूल अवधि में बंदरों को भगाने मांग की है। नगर पंचायत को भी सूचना देकर वन विभाग की टीम बुलाकर बंदरों को पकड़ने का अभियान चलाने की मांग की गई है। बताया कि विद्यालय के समीप पशु चिकित्सालय परिसर में लगे यूकेलिप्टस के पेड़ों पर बंदरों का जमावड़ा रहता है। पेड़ों से बंदर आसानी से स्कूल की छत पर पहुंच जाते हैं। इन पेड़ों की कटाई के लिए वन विभाग को पहले भी प्रार्थना पत्र दिया जा चुका है, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। वहीं विद्यालयों के बाहर घूमने वाले आवारा कुत्तों से भी बच्चों को बचाने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है।
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इन स्कूलों के आसपास भी मंडराते मिले बंदर डिडौली क्षेत्र के कई स्कूलों में बंदरों की मौजूदगी से विद्यार्थियों और शिक्षकों में चिंता बनी हुई है। सुशीला देवी किसान इंटर कॉलेज के आसपास भी बंदरों का झुंड मंडराता देखा गया। वहीं प्राथमिक विद्यालय डिडौली और प्राथमिक विद्यालय फतेई खालसा के आसपास भी बंदरों की आवाजाही दिखाई दी। स्कूल परिसर के नजदीक पेड़ों और छतों पर बंदरों के बैठे रहने से बच्चों के बीच डर का माहौल रहता है। शिक्षकों का कहना है कि बंदरों के अचानक स्कूल परिसर में पहुंचने से विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना पड़ता है।
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एक दिन में 150 लोगों ने लगवाए एंटी रैबीज इंजेक्शन
कुत्ते और बंदरों के बढ़ते आतंक के बीच इनके काटने के मामले भी सामने आ रहे हैं। इसका अंदाजा बुधवार को सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंचे लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। जिला अस्पताल समेत जिले के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में एक ही दिन में करीब 150 लोगों को कुत्ते और बंदर के काटने के बाद एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाया गया।
बंदर पकड़ने को लेकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे अधिकारी
जिलेभर में कुत्तों और बंदरों के हमलों से लोग घायल हो रहे हैं, लेकिन इन्हें पकड़ने की जिम्मेदारी को लेकर विभागों के बीच असमंजस नजर आ रहा है। मंगलवार को जोया के एक विद्यालय में बंदरों ने छात्र और शिक्षकों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। इसके बाद बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े हुए। डीएफओ राजीव कुमार ने नगर पालिका क्षेत्र में बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी नगर पालिका और ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायत की है। वहीं, जोया के खंड विकास अधिकारी नीरज गर्ग ने बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी वन विभाग की बताई। दोनों अधिकारियों के अलग-अलग बयान से लोगों में यह सवाल उठ रहा है कि हमलावर बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी आखिर किस विभाग की है।
वर्जन
बंदरों के संबंध में शासन का आदेश आया हुआ है। नगर पालिका क्षेत्र में बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी नगर पालिका की है, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में यह जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की है। - राजीव कुमार, डीएफओ अमरोहा

बंदर पकड़ने के लिए वन विभाग की जिम्मेदारी है और शहरी क्षेत्र में नगर निकाय की है लेकिन ग्राम पंचायत स्तर पर इसके लिए कोई अलग से बजट नहीं होता है। - नीरज गर्ग, बीडीओ जोया
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