{"_id":"581f74484f1c1bf37eb378a7","slug":"talaq-ulma-kalbe-sadiq-amroha","type":"story","status":"publish","title_hn":"तलाक का मसला उलमा का है सरकार का नहीं: कल्बे सादिक ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तलाक का मसला उलमा का है सरकार का नहीं: कल्बे सादिक
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Sun, 06 Nov 2016 11:50 PM IST
विज्ञापन
डॉ कल्बे सादिक
- फोटो : ब्यूरो/ वाराणसी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शिया धर्मगुरु कल्बे सादिक ने कहा कि तीन तलाक का मसला उलमा का है, सरकार का नहीं। सरकार पहले देश की समस्याएं दूर करे। भ्रष्टाचार मिटाया जाए। गरीबी को दूर किया जाए। अज्ञानता को मिटाया जाए, लेकिन किसी सरकार ने ऐसा नहीं किया। हिंदू व मुसलमान एक दूसरे को भाई से बढ़कर समझें। खुशियों में शरीक होकर भाईचारे का पैगाम दें। बेवजह की बातों में न उलझें।
शहर के मोहल्ला कटकुई स्थित दोस्त अली इमामबाड़े में मजलिस को खिताब करने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए शिया धर्मगुरु ने कहा कि पूरे हिंदुस्तान में तीन तलाक बहुत कम होते हैं, क्योंकि यह बुरी चीज है। उसको बेवजह तूल दिया जा रहा है। तलाक का मसला उलमा का है, किसी सरकार का नहीं। बेहतर होगा कि उसमें हस्तक्षेप न किया जाए। कोई भी सरकार देश में बनी हो, चाहें वह भाजपा की हो या फिर कांग्रेस की।
देश को समस्या से मुक्त बनाने के लिए काम नहीं किए जा रहे हैं। गरीबी नहीं मिटाई जा रही है। भ्रष्टाचार खत्म नहीं हो रहा है। अशिक्षा बनी हुई है। पहले इनको समाप्त किया जाए। सत्तर साल से यही समस्याएं मौजूद हैं, जिनकी ओर किसी की नजर नहीं है। बेवजह के मसलों को तूल देने की बजाय इनके बारे में सोचा जाए।
विज्ञापन
इस्लाम भाईचारे का पैगाम देेता है। हिंदू हो या फिर मुसलमान, सभी मिल-जुलकर भाइयों की तरह रहें। कोई भी धर्म दूसरे को सताने की बात नहीं कहता है। कल्किधाम के मंदिर के शिलान्यास पर उठे विरोध पर शिया धर्मगुरु ने कहा मामला उनके संज्ञान में नहीं है। सपा के परिवार में चल रहे विवाद पर बोले- ऐसा नहीं होना चाहिए।
विज्ञापन
शहर के मोहल्ला कटकुई स्थित दोस्त अली इमामबाड़े में मजलिस को खिताब करने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए शिया धर्मगुरु ने कहा कि पूरे हिंदुस्तान में तीन तलाक बहुत कम होते हैं, क्योंकि यह बुरी चीज है। उसको बेवजह तूल दिया जा रहा है। तलाक का मसला उलमा का है, किसी सरकार का नहीं। बेहतर होगा कि उसमें हस्तक्षेप न किया जाए। कोई भी सरकार देश में बनी हो, चाहें वह भाजपा की हो या फिर कांग्रेस की।
विज्ञापन
देश को समस्या से मुक्त बनाने के लिए काम नहीं किए जा रहे हैं। गरीबी नहीं मिटाई जा रही है। भ्रष्टाचार खत्म नहीं हो रहा है। अशिक्षा बनी हुई है। पहले इनको समाप्त किया जाए। सत्तर साल से यही समस्याएं मौजूद हैं, जिनकी ओर किसी की नजर नहीं है। बेवजह के मसलों को तूल देने की बजाय इनके बारे में सोचा जाए।
विज्ञापन
इस्लाम भाईचारे का पैगाम देेता है। हिंदू हो या फिर मुसलमान, सभी मिल-जुलकर भाइयों की तरह रहें। कोई भी धर्म दूसरे को सताने की बात नहीं कहता है। कल्किधाम के मंदिर के शिलान्यास पर उठे विरोध पर शिया धर्मगुरु ने कहा मामला उनके संज्ञान में नहीं है। सपा के परिवार में चल रहे विवाद पर बोले- ऐसा नहीं होना चाहिए।