फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Amroha News ›   Syed Saadat Ali... whose disciple Mir Taqi Mir became the king of Urdu Ghazal

Amroha News: सैयद सआदत अली... जिनके शागिर्द मीर तकी मीर बन गए उर्दू गजल के बादशाह

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 30 Dec 2024 01:48 AM IST
विज्ञापन
Syed Saadat Ali... whose disciple Mir Taqi Mir became the king of Urdu Ghazal
अमरोहा। यूं तो उर्दू अदब की दुनिया में अमरोहा के कई शायरों ने देश विदेश में अपना अलग मुकाम बनाया, लेकिन यहां की सरजमीं का एक नाम ऐसा भी था, जिसने फारसी शायरी करने वाले एक शायर को उर्दू शायरी का बेताज बादशाह बना दिया। जी हां, बात कर रहे हैं सैयद सआदत अली नकवी की। जिन्होंने मीर तकी मीर को उर्दू शायरी के लिए प्रेरित किया। जिसके बाद मीर उर्दू शायरी की दुनिया का नायाब हीरा बन गए।
विज्ञापन

अमरोहा के मोहल्ला हक्कानी में साल 1698 में जन्मे सैय्यद सआदत अली नकवी शायरी की दुनिया में मीर सआदत नकवी के नाम से जाने गए। बहुत कम उम्र में ही उन्होंने उर्दू शायरी में न केवल अपना नाम कमाया, बल्कि कई शायरों को उर्दू शायरी का ककहरा भी सिखाया। जिसके बाद उनकी शागिर्दी में आने वाले शायरों ने अदीब की दुनिया में अपनी अलग ही पहचान बनाई। प्रोफेसर नाशिर नकवी बताते हैं मीर सआदत के समय मीर तकी मीर फारसी की शायरी किया करते थे।
विज्ञापन

मुगल काल में फारसी की शायरी को खूब तवज्जो दी जाती थी, लेकिन मीर सआदत अली से मुलाकात के बाद मानों मीर तकी मीर की दुनिया ही बदल गई। बताते हैं कि सआदत अली नकवी ने मीर तकी मीर से मुलाकात के बाद उनको उर्दू जुबान में शायरी के लिए प्रेरित किया। उनकी शागिर्दी में मीर तकी मीर ने धीरे-धीरे उर्दू और फारसी की मिली जुली शायरी में अपने शब्दों को पिरोना शुरू कर दिया और उर्दू अदब की दुनिया में शायरी का बेताज बादशाह बन गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

जिक्र-ए-मीर में भी है सआदत का जिक्र
सैयद सआदत अली नकवी की शख्सियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मीर तकी मीर ने अपने जीवन के पहलुओं को लेकर लिखी किताब जिक्र ए मीर में भी उनको अपना उस्ताद माना है।
पाकिस्तानी किताब में भी मिली सआदत अली को जगह
प्रोफेसर नाशिर नकवी बताते हैं कि पाकिस्तान से प्रकाशित हुई उर्दू शायरों की किताब में भी सआदत अली को जगह दी गई है। फिलहाल पाकिस्तान के कराची में रहने वाले अमरोहा के मजापोता निवासी नकूश नकवी ने अपनी किताब तजकराह-ए-शुआरा-ए-अमरोहा में उनका जिक्र करते हुए उनकी शायरी को भी जगह दी है। बताते हैं कि मीर तकी मीर का उस्ताद होने की वजह से ही सैयद सआदत अली नकवी को मीर सआदत अली के नाम से जाना जाने लगा था। 1738 में महज 40 साल की उम्र में उनका इंतकाल हो गया था।

कौन थे मीर तकी मीर
मीर मोहम्मद तकी यानी मीर तकी मीर अपने दौर के नामचीन शायरों मे गिने जाते थे। मिर्जा गालिब ने भी उनकी शायरी के कसीदे पढ़े थे। उन्होंने कहा था कि रेख्तां के तुम अकेले उस्ताद नहीं हो गालिब, कहते हैं जमाने में एक मीर हुआ करता था। उर्दू की शायरी में मीर तकी मीर एक बड़ा नाम थे। उनका जन्म आगरा में हुआ था।
मीर सआदत अली की शायरी

यार से जो रकीब लड़ते हैं
यह हमारे नसीब लड़ते हैं
--
नहीं कुछ हिज्र में पीते शराबे अरगवानी हम
आरे साकी तेरे मारे नहीं मांगेंगे पानी हम
--
अल्लाह जो सरे लौह तेरा नाम न होता
हरगिज किसी आगाज का अंजाम न होता
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article