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सुपरवाइजर की हत्या का मामला : 13 साल... 312 बार सुनवाई, आखिरी तीन मिनट में दोषियों को सजा

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 28 Sep 2024 04:23 AM IST
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Supervisor's murder case: 13 years... 312 hearings, culprits sentenced in last three minutes
अमरोहा। अमरेंद्र सिंह हत्याकांड के दोषियों को सजा मिलने तक 13 साल बीत गए। इन 13 साल में करीब 312 बार सुनवाई हुई। पुलिस ने 159 पेज की चार्जशीट लगाई थी। जबकि न्यायालय ने 30 पेज का आदेश सुनाते हुए केवल आखिरी तीन मिनट में दोषियों को उम्रकैद की सजा सुना दी। इस दौरान न्यायालय ने विपक्ष के तर्क को पूरी तरह बलहीन माना।
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अपर जिला शासकीय अधिवक्ता अमित कुमार वशिष्ठ ने बताया कि 15 अप्रैल 2011 को अमरेंद्र सिंह का शव मिलने के बाद पुलिस ने खेत मालिक रामसिंह की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया था। अमरेंद्र सिंह के पिता ने पुत्रवधू पूजा को आरोपी बनाया था। इस हत्याकांड की गुत्थी को सुलझाने में पुलिस को डेढ़ महीने का समय लगा। इसके बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष व विवेचक मलिक यूनुस अली ने 31 मई 2011 को 159 पेज का आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया था। करीब 11 महीने बाद 20 अप्रैल 2012 को न्यायालय ने इस मुकदमे में पहली सुनवाई की। 13 साल में न्यायालय ने करीब 312 बार सुनवाई सुनवाई करते हुए आरोपी और अभियोजन पक्ष को सुना।
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हर माह में करीब दो बार हुई सुनवाई
हर महीने करीब दो तारीख को पर सुनवाई हुई। सात मार्च 2024 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मृतक की पत्नी पूजा की गवाही कराई गई। इसके बाद 25 सितंबर 2024 को कोर्ट ने साक्ष्यों और सबूतों के आधार पर हत्यारोपी अमित श्रीवास्तव, दीपक गिरी, गजराज, सरजीत और हरिशंकर को दोषी करार दिया। पांचों दोषियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। लेकिन, शुक्रवार की दोपहर करीब तीन बजे न्यायालय सजा के प्रश्न पर सुनवाई की। पुलिस हिरासत में सभी दोषियों को न्यायालय के सामने पेश किया गया। इस दौरान न्यायाधीश ज्योति ने आखिरी तीन मिनट में आरोपी व अभियोजन पक्ष को सुना और दोषियों को उम्रकैद की सजा सुना दी।
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सजा सुनते ही रोने लगे तीन दोषी
कोर्ट में न्यायाधीश ने जैसे ही सजा सुनाई तो दोषी दीपक गिरी, अमित श्रीवास्तव और हरिशंकर रोने लगे। हालांकि, सरजीत और गजराज के चेहरे पर किसी भी तरह की भावुकता नहीं थी।
साक्ष्य छिपाने में भी दोषियों को मिली उम्रकैद
न्यायालय ने पांचों दोषियों को हत्या व षड्यंत्र रचने के आरोप में उम्रकैद की सजा और 10-10 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। जबकि साक्ष्य छिपाने के आरोप में पांच साल का कठोर कारावास और पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

दोषी गजराज को आपराधिक इतिहास तलब का कार्रवाई करने की मांग
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि न्यायाधीश को पत्र देकर दोषी गजराज का अपराधिक इतिहास तलब कर सख्त कार्रवाई करने की मांग की थी। पूजा का आरोप था कि गजराज शातिर अपराधी है, जो पैसे लेकर अपराध करता है। जिस पर मेरठ, मुरादाबाद, बुलंदशहर, अमरोहा में लूट, हत्या और चोरी के मुकदमे दर्ज हैं। गजराज की वजह से क्षेत्र में भय का माहौल रहता है। पिछले कुछ दिन पहले गजरौला में अध्यापक नरेंद्र सिंह को 50 हजार रुपये गोली मारी थी। इस मामले में एक महीने में जेल से जमानत पर छूटा है। मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे अपराधी को बरी करना समाज के लिए अन्याय करने जैसा होगा। पति की हत्या के मुकदमे की पैरवी करने पर मुझे भी जान से मारने की धमकी दे चुका है।
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