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तेज हवाओं और बूंदाबांदी ने बढ़ाई किसानों की मुश्किलें

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 24 Apr 2021 01:46 AM IST
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Strong winds and drizzle increased farmers' problems
अमरोहा में शुक्रवार को बारिश के दौरान गुजरते वाहन। - फोटो : JPNAGAR
अमरोहा। पिछले कई दिनों से मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। कभी तेज धूप के साथ गर्मी शुरू हो जाती है तो कभी घटाएं घिर आती हैं। शुक्रवार को फिर एक बार बूंदाबांदी और तेज हवा ने मौसम में ठंडक बढ़ा दी। किसान मौसम के इस बदलाव को लेकर परेशान हैं। गेहूं कटाई प्रभावित हो रही है और आम की फसल को लेकर भी चिंता है। उधर तापमान का उतार-चढ़ाव बीमारियों को दावत दे रहा है।
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शुक्रवार के दिन की शुरुआत गरमाहट से हुई। अच्छी धूप खिली, लेकिन सुबह करीब 11 बजे बादल घिर आए और तेज हवा चलने लगी। दोपहर से लेकर शाम तक कई बार रुक-रुक कर बूंदाबांदी हुई और हवा में ठंडक बढ़ गई। कुछ स्थानों पर मामूली रूप से ओलावृष्टि हुई। अधिकतम तापमान 31 और न्यूनतम 20 डिग्री रिकार्ड किया गया। पिछले कई दिनों से मौसम में बदलाव का यही क्रम चल रहा है। बूंदाबांदी से खेतों में नमी हो जाती है, जिससे गेहूं की कटाई प्रभावित हो जाती है। उधर, किसानों को बारिश के साथ ओलावृष्टि की आशंका परेशान कर रही है। अधिकतर खेतों पर गेहूं की फसल कटी पड़ी है। किसान गेहूं की गहाई कराने की जद्दोजहद में लगे हैं। यदि तेज आधी और बारिश के साथ ओला पड़ा तो फसलों को भारी नुकसान हो सकता है। वहीं आसमान में छाए बादलों को लेकर किसान और आम कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं।
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बीमार को दावत दे रहा बदलता मौसम
अमरोहा। मौसम में अचानक आ रहा बदलाव बीमार कर सकता है। अचानक तेज गर्मी और फिर ठंड में जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। इस तरह के मौसम में एलर्जी और वायरल फीवर जैसे रोग पनप रहे हैं। सुबह को मौसम का मिजाज देखकर लोग कम कपड़े पहनकर घरों से निकलते हैं, लेकिन अचानक मौसम ठंडा हो जाता है। जनरल फिजीशियन डॉ. चंद्रभान सिंह का कहना है कि बदलते मौसम में लापरवाही न बरतें। धूप होने या गर्मी महसूस होने पर भी पूरे कपड़े पहने रहें। तापमान के इस उतार चढ़ाव से बड़ी संख्या में लोग बुखार, सर्दी-जुकाम और गले संबंधी रोगों से पीड़ित हो रहे हैं। ऐसे में योग्य चिकित्सकों से परामर्श लेकर दवा लें।
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बदलता मौसम चिंता का विषय है। यदि आंधी-बारिश और ओलावृष्टि हुई तो गेहूं और आम की फसलों को नुकसान होना स्वाभाविक हैं। इसके लिए किसान गेहूं की कटी हुई फसल को हाथों हाथ गहाई कराते रहे।
- राजीव कुमार, जिला कृषि रक्षा अधिकारी
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