फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Amroha News ›   slow poison format in water

हर घूंट में पी रहे ‘स्लो प्वाइजन’

Tue, 22 Mar 2016 01:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा Updated Tue, 22 Mar 2016 01:01 AM IST
विज्ञापन
slow poison format in water
पानी की समस्या - फोटो : demo
शहर की कॉटनवेस्ट इकाइयों से दिन-प्रतिदिन शहर का भूमिगत जल जहरीला होता जा रहा है। इसके दुष्प्रभावों को देखते हुए शासन ने केमिकल से कपड़े की कत्तरों की धुलाई वाले वाशिंग प्लांट बंद करने के आदेश दिए थे, मगर उसका नतीजा ढाक के तीन पात ही निकला।
विज्ञापन


काटनवेस्ट कारोबारियों ने 15 दिन मोहलत मांग ली और अवधि बीतने के बाद भी प्लांट बंद नहीं हुए। इससे भूमिगत जल और दूषित न होने की उम्मीदें धरी की धरी रह गईं। इससे आमदिनों को छोड़ दे तो त्योहार पर लोगों को साफ पानी उपलब्ध कराने के दावे हवा-हवाई ही साबित हो रहे हैं। 
विज्ञापन


अमरोहा शहर में 150 के आसपास काटनवेस्ट इकाइयां हैं। इनमें करीब 80-85 इकाइयां कागजों में संचालित हैं, जिनका ब्योरा उद्योग केंद्र या बिजली विभाग के पास है। इनमें से 55 इकाइयों के पास ऐसे वाशिंग प्लांट हैं जिनमें केमिकल के जरिए कपड़े की रंगीन कत्तरों की धुलाई कर इन्हें सफेद बनाया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


बाद में इस कत्तर को री-साइकिल करके काटन बनाकर अन्य राज्यों व शहरों को भेजा जाता है। कत्तरों को धुलने के लिए घातक केमिकल, हैवी डिटर्जेंट का उपयोग किया जाता है। वाशिंग प्लांटों में हो रहे बोरिंग के जरिए केमिकलयुक्त गंदा पानी जमीन के भीतर छोड़ा जा रहा है। इससे आसपास के क्षेत्र का पानी दूषित होता जा रहा है।

फरवरी में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कड़ी आपत्ति के बाद शासन ने वाशिंग प्लांट बंद कराने के आदेश दिए थे। इस पर कारोबारियों ने 15 दिन का समय मांगा था, लेकिन अवधि बीत चुकी है और ये बंद नहीं हुए। 24 मार्च को होली है और इसी दूषित पानी का उपयोग लोगों को पेयजल और रंग खेलने में करना पड़ेगा। 

यह घातक तत्व हैं अमरोहा के पानी में
जल निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से प्रयोगशाला में कराई गई पानी के नमूनों की जांच में टीडीएस की मात्रा 700 से अधिक होना पाई गई है। जबकि 120 के आसपास यह मात्रा होनी चाहिए। इसके अलावा शीशा, लेड, कैल्शयम, आयरन व डिटर्जेंट की भी मात्रा अधिक मिली है।  

कैंसर कर सकता है यह पानी
वरिष्ठ फिजीशियन डा. आरएस मिश्रा कहते हैं कि काटनवेस्ट के वाशिंग प्लांटों का घातक केमिकल जमीन में डाले जाने से पानी जहरीला होता जा रहा है। अमरोहा का पानी स्लो प्वाइजन हो गया है, जो लगातार इसका इस्तेमाल करेगा उसे कैंसर जैसी बीमारियों का शिकार होना पड़ेगा। आंतें खराब हो सकती हैं। किडनी, लीवर पर भी असर पड़ेगा। पानी में डिटर्जेंट के साथ केमिकल, पेस्टीसाइड होने से पेट संबंधी बीमारियां भी होंगी।  

150 फीट से अधिक गहराई पर लगे पंप
जल निगम के अधिशासी अभियंता आरके जैन कहते हैं कि काटनवेस्ट इकाइयों के वाशिंग प्लांटों से भूमिगत जल दूषित हो चुका है। इसका सबसे अधिक असर कम गहराई पर लगाए गए नलों पर अधिक है। शहर के अधिकांश मोहल्लों में 60 से 70 फीट की गहराई पर ही नलों को लगाया गया है। जबकि सरकारी नल 150 से 180 फीट की गहराई पर लगाए जा रहे हैं। कम गहराई का पानी पीने योग्य नहीं है, ऐसा प्रयोगशाला में नमूनों की जांच से साबित हो चुका है। 

यह मोहल्ले सबसे अधिक प्रभावित 
शहर के मोहल्ला सुबोधनगर, अहमदनगर, कल्याणपुर रोड, कटकुई,  कुरैशी मोहल्ला, दिल्ली गेट, नौबतखाना, आवास विकास कालोनी, रामाशीषपुरम, पक्काबाग, जयओमनगर, वासुदेव, मंडी धनौरा रोड, कैलसा बाईपास रोड के इलाके का भूगर्भ जल अधिक प्रभावित है।


काटनवेस्ट इकाइयों में वाशिंग प्लांट बंद करने के लिए शासन का आदेश आया है। कारोबारियों ने 15 दिन का समय मांगा था। अब होली के बाद इस पर कार्रवाई की जाएगी। 
मोहम्मद नईम एसडीएम सदर अमरोहा
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed