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शरद पूर्णिमा पर लाखों ने लगाई डुबकी
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गजरौला (अमरोहा)। शरद पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालुओं ने ब्रजघाट और गंगाधाम तिगरी में डुबकी लगाई। इस दौरान गंगा घाट पर गंगा मैया के जयकारे गूंजते रहे।
रविवार को शरद पूर्णिमा का पर्व धूमधाम से मनाया गया। महिलाओं ने घरों में रात्रि के समय दूध में चोले भिगोकर रखे और दिन निकलने पर परिवार के सदस्यों के संग उनका सेवन किया। वहीं ब्रजघाट और गंगाधाम तिगरी में स्नान को गए। सबसे अधिक भीड़ ब्रजघाट में ही रही। वहां घाटों पर पांव तक रखने की जगह नहीं थी। भारी असुविधाओं के बीच दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने वहां गंगा में स्नान किया। घाट पर गंदगी और कूड़ा अटा हुआ था। इसके अलावा मुख्य स्नान घाट पर नावों की भरमार के चलते सही ढंग से स्नान करना भी काफी कष्टप्रद साबित हो रहा था। इसे लेकर कई श्रद्धालुओं की नाविकों से नोकझोंक भी हुई। गंगा घाट की सीढ़ियों पर भी गंदगी पसरी हुई थी। खास बात यह रही कि गंगा मंदिर से लगातार गंगा में गंदगी नहीं डालने का उद्घोष किया जा रहा था और श्रद्धालु इसके बावजूद गंगा में हवन और पूजन सामग्री के अलावा टूटी तस्वीरें और शीशे के फ्रेम डालने में लगे हुए थे। उधर, गंगाधाम तिगरी में भी श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रही। यहां भी मध्यरात्रि से ही स्नान आरंभ हो गया था।
सुबह लगा जाम, दोपहर तक रेंगे वाहन
गजरौला। शरद पूर्णिमा पर उमड़ी भीड़ में शामिल श्रद्धालुओं ने अपने-अपने वाहन ब्रजघाट में सीढ़ियों के आगे खड़े कर दिए। इसके अलावा वहां से मेरठ और दिल्ली के लिए संचालित डग्गामार वाहनों ने भी अपने वाहन वहीं लगाए और सवारियां बैठानी शुरू कर दीं। इससे सुबह के समय हाईवे पर जाम लग गया। इससे ब्रजघाट में आने वाले और हाईवे से होकर गुजरने वाले लोगों को काफी परेशानी हुई। वहीं ब्रजघाट में पुराने पुल की उधड़ी सड़क की वजह से दिल्ली की ओर जाने वाले वाहन धीमी गति से होकर गुजरे। इस कारण दोपहर तक पुल पर वाहन रेंगते रहे।
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रविवार को शरद पूर्णिमा का पर्व धूमधाम से मनाया गया। महिलाओं ने घरों में रात्रि के समय दूध में चोले भिगोकर रखे और दिन निकलने पर परिवार के सदस्यों के संग उनका सेवन किया। वहीं ब्रजघाट और गंगाधाम तिगरी में स्नान को गए। सबसे अधिक भीड़ ब्रजघाट में ही रही। वहां घाटों पर पांव तक रखने की जगह नहीं थी। भारी असुविधाओं के बीच दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने वहां गंगा में स्नान किया। घाट पर गंदगी और कूड़ा अटा हुआ था। इसके अलावा मुख्य स्नान घाट पर नावों की भरमार के चलते सही ढंग से स्नान करना भी काफी कष्टप्रद साबित हो रहा था। इसे लेकर कई श्रद्धालुओं की नाविकों से नोकझोंक भी हुई। गंगा घाट की सीढ़ियों पर भी गंदगी पसरी हुई थी। खास बात यह रही कि गंगा मंदिर से लगातार गंगा में गंदगी नहीं डालने का उद्घोष किया जा रहा था और श्रद्धालु इसके बावजूद गंगा में हवन और पूजन सामग्री के अलावा टूटी तस्वीरें और शीशे के फ्रेम डालने में लगे हुए थे। उधर, गंगाधाम तिगरी में भी श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रही। यहां भी मध्यरात्रि से ही स्नान आरंभ हो गया था।
सुबह लगा जाम, दोपहर तक रेंगे वाहन
गजरौला। शरद पूर्णिमा पर उमड़ी भीड़ में शामिल श्रद्धालुओं ने अपने-अपने वाहन ब्रजघाट में सीढ़ियों के आगे खड़े कर दिए। इसके अलावा वहां से मेरठ और दिल्ली के लिए संचालित डग्गामार वाहनों ने भी अपने वाहन वहीं लगाए और सवारियां बैठानी शुरू कर दीं। इससे सुबह के समय हाईवे पर जाम लग गया। इससे ब्रजघाट में आने वाले और हाईवे से होकर गुजरने वाले लोगों को काफी परेशानी हुई। वहीं ब्रजघाट में पुराने पुल की उधड़ी सड़क की वजह से दिल्ली की ओर जाने वाले वाहन धीमी गति से होकर गुजरे। इस कारण दोपहर तक पुल पर वाहन रेंगते रहे।
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