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Amroha News: संरक्षित होगा शमी का वृक्ष, पौराणिक कथाओं में मिलता है वर्णन
Sat, 04 Mar 2023 09:44 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Sat, 04 Mar 2023 09:44 AM IST
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हसनपुर। बृहस्पतिवार को क्षेत्र के गांव मंगरौला में गंगा एक्सप्रेस-वे निर्माण और टी प्वाइंट निर्माण के बीच बाधक बन रहे शनिव्रत आश्रम को प्रशासन ने हटवा दिया, हालांकि वहां मौजूद ऐतिहासिक शमी के वृक्ष को तहस नहस नहीं किया गया। प्रशासन शमी के वृक्ष के संरक्षण करने का बात कह रहा है। उसकी बैरिकेडिंग की जानी है, हालांकि अभी इस दिशा में कोई कार्य नहीं किया गया है। शमी के वृक्ष का वर्णन पौराणिक कथाओं में सुनने को मिलता है। शनिव्रत आश्रम के शनिदेव की मूर्ति को गांव में ही चामुंडा मंदिर पर स्थापित किया गया है। शनिव्रत आश्रम के महाराज विष्णु गिरी बताते हैं मंगरौला में स्थिति शमी का वृक्ष का काफी पुराना है। शमी के वृक्ष की जड़ में ही पीपल का वृक्ष है। दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए हैं, जिससे इसकी महत्वता और बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि शमी के वृक्ष का वर्णन पौराणिक कथाओं में भी मिलता है। विजयदशमी के दिन शमी के वृक्ष की पूजा करने की प्रथा है। मान्यता है कि यह भगवान श्री राम का प्रिय वृक्ष था और लंका पर आक्रमण से पहले उन्होंने शमी वृक्ष की पूजा करके विजयी होने का आशीर्वाद प्राप्त किया था।
पांडवों ने की थी शमी के वृक्ष की पूजा
शनिव्रत आश्रम के महाराज विष्णु गिरी बताते हैं कि शमी वृक्ष का वर्णन महाभारत काल में भी मिलता है। अपने 12 वर्ष के वनवास के बाद एक साल के अज्ञातवास में पांडवों ने अपने सारे अस्त्र शस्त्र शमी के वृक्ष पर ही छुपाए थे। कुरुक्षेत्र में कौरवों के साथ युद्ध के लिए जाने से पहले भी पांडवों ने शमी के वृक्ष की पूजा करके विजय प्राप्ति की कामना की थी। तभी से यह माना जाने लगा है कि जो भी इस वृक्ष कि पूजा करता है उसे शक्ति और विजय प्राप्त होती है।
शमी के पत्तों से हवन होता है गुणकारी
शनिव्रत आश्रम के महाराज विष्णु गिरी बताते हैं कि शमी वृक्ष का जिक्र कई पौराणिक कथाओं में है। यज्ञ में भी शमी के पत्तों का हवन गुणकारी माना गया है। शमी का वृक्ष आठ से दस मीटर तक ऊंचा होता है। शाखाओं पर कांटे होते हैं।
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हजारों लोगों की आस्था का केंद्र है मंगरौला का शमी का वृक्ष
गांव मंगरौला में स्थित शमी का वृक्ष हजारों लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां शनिवार को पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। महाशिवरात्रि पर यहां विशाल भंडारे का आयोजन होता है। इसके अलावा हर माह की पूर्णिमा और अमावस्या पर भी यहां पूजा के लिए श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहता है।
मंगरौला में शमी के वृक्ष की महत्वता को देखते हुए ही इसे नहीं कटवाया गया है। वृक्ष से लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। इसलिए वृक्ष का संरक्षण कराया जाएगा। जल्द ही इसकी बैरिकैडिंग कराई जाएगी। शनिव्रत आश्रम को चामुंडा मंदिर पर शिफ्ट कराया जा रहा है।
-विजय शंकर, एसडीएम हसनपुर।
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पांडवों ने की थी शमी के वृक्ष की पूजा
शनिव्रत आश्रम के महाराज विष्णु गिरी बताते हैं कि शमी वृक्ष का वर्णन महाभारत काल में भी मिलता है। अपने 12 वर्ष के वनवास के बाद एक साल के अज्ञातवास में पांडवों ने अपने सारे अस्त्र शस्त्र शमी के वृक्ष पर ही छुपाए थे। कुरुक्षेत्र में कौरवों के साथ युद्ध के लिए जाने से पहले भी पांडवों ने शमी के वृक्ष की पूजा करके विजय प्राप्ति की कामना की थी। तभी से यह माना जाने लगा है कि जो भी इस वृक्ष कि पूजा करता है उसे शक्ति और विजय प्राप्त होती है।
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शमी के पत्तों से हवन होता है गुणकारी
शनिव्रत आश्रम के महाराज विष्णु गिरी बताते हैं कि शमी वृक्ष का जिक्र कई पौराणिक कथाओं में है। यज्ञ में भी शमी के पत्तों का हवन गुणकारी माना गया है। शमी का वृक्ष आठ से दस मीटर तक ऊंचा होता है। शाखाओं पर कांटे होते हैं।
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हजारों लोगों की आस्था का केंद्र है मंगरौला का शमी का वृक्ष
गांव मंगरौला में स्थित शमी का वृक्ष हजारों लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां शनिवार को पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। महाशिवरात्रि पर यहां विशाल भंडारे का आयोजन होता है। इसके अलावा हर माह की पूर्णिमा और अमावस्या पर भी यहां पूजा के लिए श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहता है।
मंगरौला में शमी के वृक्ष की महत्वता को देखते हुए ही इसे नहीं कटवाया गया है। वृक्ष से लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। इसलिए वृक्ष का संरक्षण कराया जाएगा। जल्द ही इसकी बैरिकैडिंग कराई जाएगी। शनिव्रत आश्रम को चामुंडा मंदिर पर शिफ्ट कराया जा रहा है।
-विजय शंकर, एसडीएम हसनपुर।