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Amroha News: किसकी शह पर बेचे थे सट्टा किंग के गुर्गों ने 55 लाख रुपये के पेड़
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गजराैला (अमरोहा)। मुंबई के सट्टा किंग रमेश चौरसिया का जाल गंगा के खादर के इलाके में इस कदर फैला है कि उसके बिना यहां पत्ता भी नहीं हिलता। उसके गुर्गे हर वह काम करते, जिससे अच्छी कमाई हो। कई महीने पूर्व सिहाली मेव मुस्तकम के रकबे में खड़े पाॅप्लर व यूकेलिप्टस के पेड़ों को कटवाया। पेड़ 55 लाख रुपये में बेचे गए थे।
मुंबई के सट्टा किंग रमेश चौरसिया की गंगा के खादर में 15 सौ बीघे जमीन सामने आने पर और उस पर मुंबई की इनकम टैक्स की टीम द्वारा अपना बोर्ड लगाकर अपने अधीन करने के बाद से हर किसी की नजर गंगा के खादर पर है। उधर चोरी छिपे लोग उसके राज खोलने लगे हैं। सिहाली मेव मुस्तकम के ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव के रकबे में पाॅप्लर व यूकेलिप्टस के पेड़ खड़े थे। हजारों पेड़ों को कई महीने पूर्व काट डाला। कुछ लोगों ने इसकी शिकायत वन विभाग के अफसरों से की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों का दावा है कि उस वक्त पेड़ 55 लाख रुपये में बेचे गए थे।
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दबंगई से जमीन पर कब्जा कर लेते थे गुर्गे
मुंबई के सट्टा किंग रमेश चौरसिया की नजर खादर की जमीन पर थी। उसने यहां पर 15 सौ बीघे बेनामी जमीन खरीदी। आस पास के गांवों के लोगों का कहना है कि उसके फार्म पर इस तरह के लोग रहते हैं, जिनको देख कर डर लगता है। कोई उधर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। सट्टा किंग ने अपने गुर्गों के जरिए न सिर्फ जमीन खरीदी, बल्कि सैकड़ों बीघे ऐसी जमीन पर कब्जा किया, जो उसके फार्म हाउस के आस पास में थी। दबी जुबान में ग्रामीणों का कहना है कि उसके गुर्गे कमजोर लोगों पर अत्याचार करते थे। कोई उधर पहुंच भी जाता तो उसे डरा धमका कर भगा देते।
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मुंबई के सट्टा किंग रमेश चौरसिया की गंगा के खादर में 15 सौ बीघे जमीन सामने आने पर और उस पर मुंबई की इनकम टैक्स की टीम द्वारा अपना बोर्ड लगाकर अपने अधीन करने के बाद से हर किसी की नजर गंगा के खादर पर है। उधर चोरी छिपे लोग उसके राज खोलने लगे हैं। सिहाली मेव मुस्तकम के ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव के रकबे में पाॅप्लर व यूकेलिप्टस के पेड़ खड़े थे। हजारों पेड़ों को कई महीने पूर्व काट डाला। कुछ लोगों ने इसकी शिकायत वन विभाग के अफसरों से की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों का दावा है कि उस वक्त पेड़ 55 लाख रुपये में बेचे गए थे।
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दबंगई से जमीन पर कब्जा कर लेते थे गुर्गे
मुंबई के सट्टा किंग रमेश चौरसिया की नजर खादर की जमीन पर थी। उसने यहां पर 15 सौ बीघे बेनामी जमीन खरीदी। आस पास के गांवों के लोगों का कहना है कि उसके फार्म पर इस तरह के लोग रहते हैं, जिनको देख कर डर लगता है। कोई उधर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। सट्टा किंग ने अपने गुर्गों के जरिए न सिर्फ जमीन खरीदी, बल्कि सैकड़ों बीघे ऐसी जमीन पर कब्जा किया, जो उसके फार्म हाउस के आस पास में थी। दबी जुबान में ग्रामीणों का कहना है कि उसके गुर्गे कमजोर लोगों पर अत्याचार करते थे। कोई उधर पहुंच भी जाता तो उसे डरा धमका कर भगा देते।
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