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Amroha News: संभल, मुरादाबाद और अमरोहा के साधु संतों ने तिगरी में डाला डेरा

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 10 Nov 2024 02:45 AM IST
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Saints and sages from Sambhal, Moradabad and Amroha camped in Tigri
गजरौला (अमरोहा)। तिगरी गंगा मेले में जिले के अलावा संभल, मुरादाबाद सहित दूर-दूर से आए साधु संतों ने डेरा डाल दिया है। वे तड़के गंगा में स्नान कर दिनभर तपस्या में लीन रहते हैं। बीच-बीच में चर्चा करते हुए हुक्का भी गुड़गुड़ाते हैं। दो दिन पहले मेले में आए साधु संतों का तपस्या का क्रम 17 नवंबर तक चलेगा। मेले में सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र छह फिट लंबी जटाओं वाले नाथ संप्रदाय के योगी बाबा बुद्धनाथ बने हैं। उन्होंने गंगा मैया को शीश नवाकर प्रणाम कर आशीर्वाद लिया।
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कार्तिक पूर्णिमा पर लगा तिगरी गंगा मेला आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है। यहां पर विभिन्न संस्कृतियों के दर्शन होते हैं। पतित पावनी गंगा में स्नान कर पुण्य कमाने के लिए कई दिन पहले ही श्रद्धालु डेरे डाल कर गंगा किनारे रहते हैं। मेला शुरू होने से पहले ही साधु संत तिगरी गंगा किनारे चले आते हैं। संभल के करछली गांव स्थित झारखंडी सिद्धबाबा विश्वास नाथ आश्रम से बाबा बुद्धनाथ अपने शिष्यों के साथ बीते बृहस्पतिवार मेले में आ गए। 75 वर्षीय योगी बुद्धनाथ का कहना है कि वह 45 साल से लगातार कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा मेले में आकर दस दिन तक तपस्या करते हैं। वहीं, मुरादाबाद के सुंदरपुर चाऊपुरा स्थित शिव मंदिर पर रह रहे नाथ संप्रदाय के योगी ऋषिनाथ महाराज भी मेले में कई दिन पूर्व आ गए।
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उन्होंने बताया कि वह 50 साल से गंगा मैया की तपस्या करने आ रहे हैं। अरुण नाथ, पुष्पेंद्र नाथ, योगी बाबा काली नाथ, पवन नाथ आदि साधु संतों ने बीते बृहस्पतिवार को गंगा मेला में डेरा डाल दिया। साधुओं का कहना है कि पांच बजे से पहले ही गंगा में स्नान कर लेते हैं। इसके बाद डेरे में बनाए गुरु गोरखनाथ के स्थल पर तपस्या करते हैं। यह धूना 17 नवंबर की सुबह तक जारी रहेगा। साधुओं के साथ ही उनके शिष्य आशीष, प्रदीप, बल्ले, रामरतन, भारत, अशरफी लाल, प्रमोद संन्यासियों की सेवा में लीन रहते हैं।
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गंगा किनारे करेंगे राम चरित मानस का पाठ

गजरौला। तिगरी मेले में साधु संतों के साथ आए उनके शिष्य अनादि प्रसाद मिश्र, बब्बल, विनय कुमार का कहना है कि संतों की सेवा करने से परम आनंद की प्राप्ति होती है। फिर तिगरी गंगा तट तो तपस्या स्थल है। उन्होंने बताया कि 13 नवंबर से मेले में गंगा किनारे घाट एक पर रामचरित मानस का पाठ शुरू करेंगे।

आकर्षण का केंद्र बनीं बाबा बुद्धनाथ की लंबी जटाएं

शनिवार तड़के ही योगी बुद्धनाथ ने सभी संतों के साथ पतित पावनी में स्नान किया। इसके बाद सभी साधु डेरे में चले गए। वह गंगा किनारे साधना में लीन रहे। उन्होंने सूर्य को जल अर्पित किया। इस दौरान जटायें पैरों से नीचे तक लटक रही थीं। उन्होंने बताया कि जटाएं छह फीट लंबी हैं। वह पहले अपने गुरु बाबा कालूनाथ के साथ मेले में आते थे, मगर मई में उनके गुरु का शरीर पूर्ण हो गया।
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