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नंबर आए कम तो घबराएं नहीं...आपके वास्ते खुले हैं भविष्य के रास्ते
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अमरोहा। यूपी बोर्ड के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की वार्षिक परीक्षा का रिजल्ट 27 जून को घोषित होगा। इसके चलते अभिभावक हलकान हैं। छात्र छात्राएं भी रिजल्ट को लेकर सशंकित हैं। वहीं मेधावी छात्रों को उम्मीद है कि रिजल्ट बेहतर आएगा। प्रधानाचार्य रिजल्ट को लेकर आशान्वित हैं। उन्हें उम्मीद है कि कॉलेज का रिजल्ट अच्छा आएगा। शिक्षकों ने मूल्यांकन में सतर्कता बरती है। प्रधानाचार्यों ने छात्रों से रिजल्ट को लेकर चिंता नहीं करने की अपील की है। कहा कि कम नंबर आए तो घबराए नहीं। भविष्य के रास्ते आगे भी खुले हैं।
माध्यमिक शिक्षा परिषद के जिले में हाईस्कूल और इंटर के कुल 379 इंटर कॉलेज हैं। इसमें 33 अनुदानित और 21 राजकीय इंटर कॉलेज जबकि 325 वित्तविहीन इंटर कॉलेज हैं। इसमें हाईस्कूल स्तर के 15 राजकीय और एक अनुदानित है। प्रधानाचार्यों ने कहा, रिजल्ट को लेकर घबराए नहीं। क्योंकि इस रिजल्ट के बाद अभी और परीक्षाएं देनी हैं। हाईस्कूल और इंटर एक पड़ाव है लक्ष्य नहीं है। ऐसे में कॅरियर को बेहतर बनाने के लिए संवेदनशील बने रहें। क्योंकि लॉकडाउन में बच्चों का मिजाज बदला है। वह नए दौर से गुजरे हैं। उन्हें रिजल्ट को लेकर शाबासी दें। दूसरों से तुलना नहीं करें।
घबराए नहीं, कॅरियर में पड़ाव है रिजल्ट
रिजल्ट अकेले नहीं देखने दें। बच्चों को अभिभावक अपने साथ रखें। रिजल्ट प्रभावित हुआ है, तो बच्चे को मोटिवेट करें। रिजल्ट को लेकर विद्यार्थी घबराए नहीं। हाईस्कूल और इंटर की पढ़ाई कॅरियर में पड़ाव है। जिंदगी आगे भी है। मेहनत पर भरोसा रखें। आगे की पढ़ाई मनोयोग से करें। खुर्शीद हैदर जैदी, प्रधानाचार्य, जीआईसी
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कुछ चूक हो सकती है लेकिन घबराए नहीं
रिजल्ट बेहतर आएगा। टॉप टेन में कॉलेज की छात्राएं आएंगी। रिजल्ट को लेकर विद्यार्थी नर्वस नहीं हो। बच्चों को प्रोत्साहित करें। आगे की मेहनत के लिए माहौल दें। बच्चे मेहनत करते हैं। हालांकि कुछ चूक हो सकती है, लेकिन उससे घबराए नहीं। राजो देवी, प्रधानाचार्य, जीजीआईसी
हताश नहीं हों, बच्चों का हौसला बढ़ाएं
रिजल्ट को सकारात्मक रूप में लें। बच्चों ने मेहनत की है। अच्छे नंबर आएंगे। परीक्षा में कम अंक आए तो घबराए नहीं। विद्यार्थी कतई हताश नहीं हों। यह अंतिम लक्ष्य नहीं है। आगे अभी और मेहनत करने की जरूरत है। दूसरे लोग भी बच्चों का हौसला बढ़ाएं। डॉ. जीपी सिंह, प्रधानाचार्य, जेएस हिंदू इंटर कॉलेज
बच्चों को दूर तक जाना है... नंबर की तुलना नहीं करें
स्कूल का रिजल्ट बेहतर आएगा। कुछ बच्चों ने बहुत मेहनत की हैं। आजकल असहनशील हो रहा है। रिजल्ट को स्वीकार करें। इस दौर में बच्चे मानसिक तौर पर कमजोर होते हैं। यह पहला और दूसरा पड़ाव है। बच्चों को दूर तक जाना है। समाज में नंबर को लेकर तुलना नहीं करें। डॉ. जमशेद कमाल, प्रधानाचार्य, आईएम इंटर कॉलेज
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माध्यमिक शिक्षा परिषद के जिले में हाईस्कूल और इंटर के कुल 379 इंटर कॉलेज हैं। इसमें 33 अनुदानित और 21 राजकीय इंटर कॉलेज जबकि 325 वित्तविहीन इंटर कॉलेज हैं। इसमें हाईस्कूल स्तर के 15 राजकीय और एक अनुदानित है। प्रधानाचार्यों ने कहा, रिजल्ट को लेकर घबराए नहीं। क्योंकि इस रिजल्ट के बाद अभी और परीक्षाएं देनी हैं। हाईस्कूल और इंटर एक पड़ाव है लक्ष्य नहीं है। ऐसे में कॅरियर को बेहतर बनाने के लिए संवेदनशील बने रहें। क्योंकि लॉकडाउन में बच्चों का मिजाज बदला है। वह नए दौर से गुजरे हैं। उन्हें रिजल्ट को लेकर शाबासी दें। दूसरों से तुलना नहीं करें।
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घबराए नहीं, कॅरियर में पड़ाव है रिजल्ट
रिजल्ट अकेले नहीं देखने दें। बच्चों को अभिभावक अपने साथ रखें। रिजल्ट प्रभावित हुआ है, तो बच्चे को मोटिवेट करें। रिजल्ट को लेकर विद्यार्थी घबराए नहीं। हाईस्कूल और इंटर की पढ़ाई कॅरियर में पड़ाव है। जिंदगी आगे भी है। मेहनत पर भरोसा रखें। आगे की पढ़ाई मनोयोग से करें। खुर्शीद हैदर जैदी, प्रधानाचार्य, जीआईसी
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कुछ चूक हो सकती है लेकिन घबराए नहीं
रिजल्ट बेहतर आएगा। टॉप टेन में कॉलेज की छात्राएं आएंगी। रिजल्ट को लेकर विद्यार्थी नर्वस नहीं हो। बच्चों को प्रोत्साहित करें। आगे की मेहनत के लिए माहौल दें। बच्चे मेहनत करते हैं। हालांकि कुछ चूक हो सकती है, लेकिन उससे घबराए नहीं। राजो देवी, प्रधानाचार्य, जीजीआईसी
हताश नहीं हों, बच्चों का हौसला बढ़ाएं
रिजल्ट को सकारात्मक रूप में लें। बच्चों ने मेहनत की है। अच्छे नंबर आएंगे। परीक्षा में कम अंक आए तो घबराए नहीं। विद्यार्थी कतई हताश नहीं हों। यह अंतिम लक्ष्य नहीं है। आगे अभी और मेहनत करने की जरूरत है। दूसरे लोग भी बच्चों का हौसला बढ़ाएं। डॉ. जीपी सिंह, प्रधानाचार्य, जेएस हिंदू इंटर कॉलेज
बच्चों को दूर तक जाना है... नंबर की तुलना नहीं करें
स्कूल का रिजल्ट बेहतर आएगा। कुछ बच्चों ने बहुत मेहनत की हैं। आजकल असहनशील हो रहा है। रिजल्ट को स्वीकार करें। इस दौर में बच्चे मानसिक तौर पर कमजोर होते हैं। यह पहला और दूसरा पड़ाव है। बच्चों को दूर तक जाना है। समाज में नंबर को लेकर तुलना नहीं करें। डॉ. जमशेद कमाल, प्रधानाचार्य, आईएम इंटर कॉलेज