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Amroha News: हत्या के जुर्म के सजायफ्ता कैदी की बरेली की सेंट्रल जेल में मौत
Tue, 12 Sep 2023 01:46 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Tue, 12 Sep 2023 01:46 AM IST
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बछरायूं(अमरोहा)। हत्या के जुर्म में बरेली की सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे नगर निवासी अली रजी उर्फ बाबू की मौत हो गई। बरेली जेल की ओर से फोन आने पर परिजन उनका शव लेने के लिए वहां रवाना हो गए थे।
वर्ष 1993 की 22 अगस्त को कस्बे के मोहल्ला पीरजादगान में सिनेमा हाॅल कर्मी वसीम की चाकू से गोदकर हत्याकर दी गई थी। बगैर टिकट लिए फिल्म देखने को लेकर वसीम का कस्बे के ही सरवर, कमाल मुस्तफा, अली रजी उर्फ बाबू व कौशर का झगड़ा हो गया था। आरोप है कि चारों ने वसीम व नसीम पर चाकुओं से हमला बोल दिया था। इस हमले में वसीम की जान चली गई थी जबकि नसीम की जान काफी मुश्किल से बच पाई थी। वसीम की हत्या में चारों को नामजद किया गया था। 20 साल तक अदालत में चले मुकदमे में 13 अक्तूबर 2013 को मुरादाबाद के एडीजे महफूज अली ने चारों आरोपियाें को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। चारों आरोपियों में सरवर की पहले ही मौत हो चुकी है जबकि कमाल मुस्तफा व कौशर जमानत पर छूट कर आ गए थे।
नगर के मोहल्ला चौधरियान निवासी अली रजी उर्फ बाबू की जमानत की अपील विचाराधीन थी। बीते 10 साल से अली रजी बरेली की सेंट्रल जेल में बंद था। मृतक अली रजी के छोटे भाई व बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अली रफी एडवोकेट ने बताया कि सोमवार की सुबह बरेली जेल के जेलर ने उनको फोन पर भाई की मौत की सूचना दी थी। अली रफी ने बताया कि बड़े भाई अली रजी की सोमवार की तड़के ढाई बजे तबीयत खराब हुई थी। उनको बरेली के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान सुबह छह बजे उनकी मौत हो गई। परिजन उनका शव लेने के लिए बरेली रवाना हो गए थे। बाबू की मौत की जानकारी मिलने पर नगर में लोगों को 30 साल पुरानी घटना की याद ताजा हो गई।
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वर्ष 1993 की 22 अगस्त को कस्बे के मोहल्ला पीरजादगान में सिनेमा हाॅल कर्मी वसीम की चाकू से गोदकर हत्याकर दी गई थी। बगैर टिकट लिए फिल्म देखने को लेकर वसीम का कस्बे के ही सरवर, कमाल मुस्तफा, अली रजी उर्फ बाबू व कौशर का झगड़ा हो गया था। आरोप है कि चारों ने वसीम व नसीम पर चाकुओं से हमला बोल दिया था। इस हमले में वसीम की जान चली गई थी जबकि नसीम की जान काफी मुश्किल से बच पाई थी। वसीम की हत्या में चारों को नामजद किया गया था। 20 साल तक अदालत में चले मुकदमे में 13 अक्तूबर 2013 को मुरादाबाद के एडीजे महफूज अली ने चारों आरोपियाें को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। चारों आरोपियों में सरवर की पहले ही मौत हो चुकी है जबकि कमाल मुस्तफा व कौशर जमानत पर छूट कर आ गए थे।
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नगर के मोहल्ला चौधरियान निवासी अली रजी उर्फ बाबू की जमानत की अपील विचाराधीन थी। बीते 10 साल से अली रजी बरेली की सेंट्रल जेल में बंद था। मृतक अली रजी के छोटे भाई व बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अली रफी एडवोकेट ने बताया कि सोमवार की सुबह बरेली जेल के जेलर ने उनको फोन पर भाई की मौत की सूचना दी थी। अली रफी ने बताया कि बड़े भाई अली रजी की सोमवार की तड़के ढाई बजे तबीयत खराब हुई थी। उनको बरेली के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान सुबह छह बजे उनकी मौत हो गई। परिजन उनका शव लेने के लिए बरेली रवाना हो गए थे। बाबू की मौत की जानकारी मिलने पर नगर में लोगों को 30 साल पुरानी घटना की याद ताजा हो गई।
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