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4779 तालाबों की जगह दिख रहे गड्ढे
कृष्ण कुमार/अमर उजाला अमरोहा
Updated Sun, 17 Apr 2016 02:09 AM IST
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अमरोहा कैलसा क्षेत्र के मिलक पापड़ी में सूखा पड़ा तालाब
- फोटो : amar ujala
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एक समय था जब शहरभर में पचास से अधिक छोटे-बड़े तालाब थे। मौजूदा वक्त में तीन तालाब हैं। कांठ रोड पर राम तालाब, कैलसा रोड पर कुश्हक और बिजनौर रोड पर पनवाड़ी तालाब हैं। हैरत की बात तो ये है कि ये तीनों तालाब भी तहसील के राजस्व अभिलेखों में दिखाई नहीं दे रहे हैं। यही कारण है कि भूमाफिया इन तालाबों को कब्जाने में जुटे हैं। कभी विशाल स्वरूप धारण किए हुए ये तालाब अब सिकुड़ने लगे हैं।
गर्मी शुरू होते ही सूख जाते हैं तालाब ः अमरोहा। तहसील के रिकार्ड में कुल 1951 तालाब दर्ज हैं। गर्मी के मौसम में ये तालाब किसी काम नहीं आते। क्योंकि गर्मी शुरू होते ही तालाब सूख जाते हैं। इस बार भी इन तालाबों की यही स्थिति है।
सुप्रीम कोर्ट ने अवैध कब्जा कर पाटे जा चुके तालाबों को कब्जामुक्त करने के आदेश भी दिए, लेकिन जिले में यह फरमान काम नहीं आ सका। इसका नतीजा यह हुआ कि जिन तालाबों का अस्तित्व समाप्त हो चुका है, ऐसे तालाबों को राजस्व अभिलेखों से गायब ही कर दिया गया है। तालाब न होने की स्थिति में भूमिगत जल का बड़े स्तर पर दोहन हो रहा है।
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तहसील क्षेत्र से होकर बहने वाली कई नदियां अस्तित्व खोने की कगार पर हैं। जबकि जिले की कई नदियां फैक्ट्रियों से निकलने वाले दूषित पानी से जहरीली हो चुकी हैं। इस तरह प्रशासन से लेकर शासन तक का कोई ध्यान नहीं है। शायद जिम्मेदारों को हालात बिगड़ने का इंतजार है।
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गर्मी शुरू होते ही सूख जाते हैं तालाब ः अमरोहा। तहसील के रिकार्ड में कुल 1951 तालाब दर्ज हैं। गर्मी के मौसम में ये तालाब किसी काम नहीं आते। क्योंकि गर्मी शुरू होते ही तालाब सूख जाते हैं। इस बार भी इन तालाबों की यही स्थिति है।
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सुप्रीम कोर्ट ने अवैध कब्जा कर पाटे जा चुके तालाबों को कब्जामुक्त करने के आदेश भी दिए, लेकिन जिले में यह फरमान काम नहीं आ सका। इसका नतीजा यह हुआ कि जिन तालाबों का अस्तित्व समाप्त हो चुका है, ऐसे तालाबों को राजस्व अभिलेखों से गायब ही कर दिया गया है। तालाब न होने की स्थिति में भूमिगत जल का बड़े स्तर पर दोहन हो रहा है।
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तहसील क्षेत्र से होकर बहने वाली कई नदियां अस्तित्व खोने की कगार पर हैं। जबकि जिले की कई नदियां फैक्ट्रियों से निकलने वाले दूषित पानी से जहरीली हो चुकी हैं। इस तरह प्रशासन से लेकर शासन तक का कोई ध्यान नहीं है। शायद जिम्मेदारों को हालात बिगड़ने का इंतजार है।