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सावधान! घरों के हैंडपंप उगल रहे गंदा पानी
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Wed, 14 Dec 2016 12:00 AM IST
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सूख्ाे हैंडपंप
- फोटो : अमर उजाला
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हवा में तो प्रदूषण घुला ही है। अब घर का पानी भी पीने योग्य नहीं बचा है। लगातार प्रदूषित होता जा रहा है। हाल ही में आई 15 हैंडपंपों की रिपोर्ट में मटमैला और गंदा आया है, जिसके पीने पर पूरी तरह विभागीय अधिकारियों ने प्रतिबंध लगा दिया है। खतरे का निशान बना दिया है। साथ ही बताया है कि पानी प्रदूषित हो गया है, जिसके सेवन से लोगों को डायरिया, पेट खराब व किडनी का इंफेक्शन हो सकता है। गहरा बोरिंग कराने और पानी की जांच कराकर ही उसका उपयोग करने की सलाह अफसर दे रहे हैं।
नगर में काटनवेस्ट की कुइयों के सहारे जहरीला पानी धरती की कोख में भेजा जा रहा है, जिससे पानी जहर बन रहा है। आस पास का ग्रामीण इलाका भी पानी के जहर से प्रभावित हो रहा है। इससे स्थिति ये हो गई है कि ग्रामीण अंचलों के हैंडपंप जो पानी उगल रहे हैं, वह पीने के काबिल नहीं है।
यहां बता दें कि कुछ दिन जिला पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के तहत उमरी जानिब गर्व के छह हैंडपंप, गुलड़िया के तीन, दीपपुर के दो, मकसूदपुर नवादा के एक, चौधरपुर के एक, सलारपुर के दो हैंडपंपों के पानी का नमूना भरकर जांच के लिए लखनऊ भेजा गया था।
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परीक्षण के बाद जो रिपोर्ट आई है वह चौंकाने वाली है। 15 नमूनों की जांच रिपोर्ट में पानी मटमैला और गंदा है। हालांकि इसमें कोई केमिकल तत्व तो नहीं बढ़ा है। लेकिन जो है, उसके सेवन से लोगों का बीमार होना लाजमी है। डाक्टरों की मानें तो डायरिया, पेट खराबी व किडनी का इंफेक्शन लोगों के अंदर हो सकता है।
मसले को गंभीरता से लेते हुए मिशन कार्यालय में तैनात भूजल विज्ञान एवं जल गुणवत्ता के जिला सलाहकार ने हैंडपंपों पर खतरे का निशान लगाने और ग्रामीणों को घर की बजाय इंडिया मार्का हैंडपंप के पानी का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
अभी केवल 15 हैंडपंप की रिपोर्ट आई है, जिसमें पानी को गंदलापन करार दिया गया है। पीने योग्य नहीं ठहराया गया है। हालांकि कोई केमिकल तत्व उसमें बढ़ा नहीं मिला है। अन्य गांवों के हैंडपंप से भी नमूने जांच को भेजे जाएंगे। डा. इरफान खान, जिला सलाहकार भूजल विज्ञान एवं जल गुणवत्ता
पप्सरा के अलावा कई गांवों से पानी के नमूने जांच के लिए भरे गए हैं। 137 हैंडपंप चिन्हित कर लाल निशान लगाए गए हैं। इन नलों का पानी ठीक नहीं है। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, वैसे ही अगला कदम उठाया जाएगा।- डीके जैन, एक्सईएन जल निगम
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नगर में काटनवेस्ट की कुइयों के सहारे जहरीला पानी धरती की कोख में भेजा जा रहा है, जिससे पानी जहर बन रहा है। आस पास का ग्रामीण इलाका भी पानी के जहर से प्रभावित हो रहा है। इससे स्थिति ये हो गई है कि ग्रामीण अंचलों के हैंडपंप जो पानी उगल रहे हैं, वह पीने के काबिल नहीं है।
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यहां बता दें कि कुछ दिन जिला पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के तहत उमरी जानिब गर्व के छह हैंडपंप, गुलड़िया के तीन, दीपपुर के दो, मकसूदपुर नवादा के एक, चौधरपुर के एक, सलारपुर के दो हैंडपंपों के पानी का नमूना भरकर जांच के लिए लखनऊ भेजा गया था।
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परीक्षण के बाद जो रिपोर्ट आई है वह चौंकाने वाली है। 15 नमूनों की जांच रिपोर्ट में पानी मटमैला और गंदा है। हालांकि इसमें कोई केमिकल तत्व तो नहीं बढ़ा है। लेकिन जो है, उसके सेवन से लोगों का बीमार होना लाजमी है। डाक्टरों की मानें तो डायरिया, पेट खराबी व किडनी का इंफेक्शन लोगों के अंदर हो सकता है।
मसले को गंभीरता से लेते हुए मिशन कार्यालय में तैनात भूजल विज्ञान एवं जल गुणवत्ता के जिला सलाहकार ने हैंडपंपों पर खतरे का निशान लगाने और ग्रामीणों को घर की बजाय इंडिया मार्का हैंडपंप के पानी का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
अभी केवल 15 हैंडपंप की रिपोर्ट आई है, जिसमें पानी को गंदलापन करार दिया गया है। पीने योग्य नहीं ठहराया गया है। हालांकि कोई केमिकल तत्व उसमें बढ़ा नहीं मिला है। अन्य गांवों के हैंडपंप से भी नमूने जांच को भेजे जाएंगे। डा. इरफान खान, जिला सलाहकार भूजल विज्ञान एवं जल गुणवत्ता
पप्सरा के अलावा कई गांवों से पानी के नमूने जांच के लिए भरे गए हैं। 137 हैंडपंप चिन्हित कर लाल निशान लगाए गए हैं। इन नलों का पानी ठीक नहीं है। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, वैसे ही अगला कदम उठाया जाएगा।- डीके जैन, एक्सईएन जल निगम